जी क़े चक्रवर्ती
बहुत दिनों से संपूर्ण विश्व की नजरें दो परमाणु सम्पन्न राष्ट्रों पर टिकी हुई थी। जैसा की हमें बहुत दिनों से देखने सुनने को मिल रहा था कि विश्व की दो परमाणु सम्पन्न राष्ट्रों के राष्ट्र अध्यक्षों जैसे अमेरिका के ट्रंप और उत्तर कोरिया के तानाशाह शासक किम जोंग के मध्य जुवानी जंग से लेकर युद्ध तक की धमकियां एक दूसरे को देते चले आरहे थे। इन दोनों राष्ट्र अध्यक्षों के जुवानी जंग के मध्य एक बार ऐसा लगने लगा कि हो न हो युद्ध ही छिड़ जाये।
ऐसी स्थिति में संपूर्ण विश्व की नजरें इन दोनों राष्ट्रों के हरकतों पर तटस्था पूर्ण नजरें रख रही थी। ऐसी स्तिथि में मंगलवार 12 मई 2018 को सिंगापुर में इन दोनों राष्ट्र अद्यक्षों के मध्य लम्बी बातचीत हुई। इन दोनों देशों के सशनाध्यक्षों के मध्य हुई वार्ता में दोनों देशों के मध्य नए संबंध स्थापित करने और कोरियाई प्रायद्वीप में टिकाऊ एवं मजबूत शांति व्यवस्था कायम करने से जुड़े मुद्दे शामिल थे। उत्तर कोरियाई नेता ने ‘कोरियाई प्रायद्वीप के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण’ की दिशा में काम करने पर अपनी सहमति जताई एवं इसके बदले में अमेरिका से सुरक्षा गारंटी की मांग भी की।

हालांकि उत्तर कोरिया एक अलग-थलग और एक ग़रीब देश है लेकिन सैन्य ताकत में वह कमज़ोर नहीं है। उत्तर कोरिया के नेताओं का केवल एक ही लक्ष्य एवं उद्देश्य दिखता है कि वह अपने अस्तित्व को बचाये रख पाने में सफल हों। इसके लिए उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों में बहुत बड़ा निवेश किया हुआ है। लेकिन उत्तर कोरिया सिर्फ़ अपने परमाणु शक्ति के सहारे ही आंखें नहीं दिखाया और नही कोरी धमकियाँ देता रहा। उत्तर कोरिया की फ़ौज दुनिया में सबसे बड़ी सेनाओं में से एक है और पारंपरिक और ग़ैर-परमाणु सामरिक हथियारों का ज़खीरा भी उत्तर कोरिया की सबसे बड़ी ताकत है। और उत्तर कोरिया के इतिहास में झांकें तो प्योंगयांग जोंग अपनी ताकत का इस्तेमाल करने से भी नहीं हिचकता इसी के मध्येनजर मार्च 2010 में उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया के एक छोटे लड़ाकू जहाज़ को डुबो दिया था।
उसी साल उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया के एक द्वीप पर बमबारी भी की थी। वर्ष 1950 से लेकर सन1953 तक उत्तर एवं दक्षिण करिया के मध्य चले युद्ध में चीन एवं रूस ने उत्तर कोरिया का ही साथ दिया और 27 जुलाई 1953 को संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में हुई एक युद्धविराम संधि के साथ ही यह युद्ध समाप्त हुआ था। संयुक्त राष्ट्र और उत्तर कोरिया के मध्य हुए इस संधि के दौरान वाशिंगटन और बीजिंग के बीच भी एक समझौता यह भी हुआ था कि अगर अमेरिका भविष्य में उत्तर कोरिया पर हमला करता है तो युद्धविराम संधि टूट जाएगी ऐसी अवस्था में अमेरिका किसी भी सूरत में उत्तर कोरिया पर आक्रमण करना नहीं चाह रहा था इन सभी वास्तविकताओं के मध्ये नजर कल सिंगापुर में हुए दोनों देशों के राष्ट्र अध्यक्षों के मध्य हुई वार्ता को बहुत ही ऐतिहासिक माना जायेगा साथ ही पूरी दुनिया में इसका शांति पूर्ण सन्देश जाने से उन सभी तनाव में तटस्थ रहे देशों के साथ ही सम्पूर्ण दुनिया के देशों ने एक निश्चिंतता जाहिर की है।







