Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Wednesday, July 29
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग»Current Issues

    राजनीति परिदृश्य में बदलाब कब तक

    By July 31, 2018 Current Issues No Comments5 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 599
    जी क़े चक्रवर्ती

    देश के कुछ राज्यों जैसे नॉर्थ-ईस्ट में त्रिपुरा, मेघालय और नागालैंड में तारीखों का ऐलान हो गया है। जबकि मिजोरम में नवंबर में चुनाव की खबर है। वहीं, हिंदी बेल्ट राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विधान सभाओं में चुनाव होना है। यहां पर विधानसभा चुनावों के लिए चुनावी बिगुल बज चुका है और हमारे इन राज्यों में आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारियों की शुरुआत भी हो चुकि है वहीं पर इन प्रदेशों मे होने वाले चुनावों को ध्यान में रखये हुए निर्वाचन आयोग स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों के मद्दे नजर यहां पर के संबंधित प्रशासनिक इंतजामों को चुस्त-दुरुस्त करने में लग गई है, यहां के राजनीतिक दल चुनावी समर में कूदने की तैयारी में धारदार रणनीति बनाने में व्यस्त हैं। किसी भी चुनावी जंग में पार्टी के हार-जीत का फैसला उसके द्वारा चुने गए उम्मीदवार के चयन पर निर्भर करता है। इसलिए अभी से कुछ एक दलों ने इस पद के उपयुक्त उम्मीदवार तय करने के दिशा में अलग-अलग समूह बनाकर काम करना शुरू कर दिया है।

    देश मे होने वाले आगामी चुनावों में आपराधिक छवि वाले नेताओं के अलावा जिन नेताओं के मामले अपराधिक मुकदमों से जुड़े है, ऐसे नेताओं को चुनावी प्रत्याशियों के रूप में चयन न किये जाने का मत देश की सर्वोच्च अदालत का मत प्रामाणिकता के लिहाज से सबसे अधिक महत्व पूर्ण है। इस परिपेक्ष्य में उच्चतम न्यायालय जुलाई 2013 में ही सजा पाए हुए सांसदों और विधायकों की सदस्यता खत्म करने की बात पहले ही कह चुकी है।
    चुनावों में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों के चुनाव लडऩे एवं उनके जीतने को लेकर देश मे एक लंबे समय से बहस होती चली आ रही है। सैद्धांतिक तौर पर हमेशा कहा जाता रहा है कि राजनीतिक दलों द्वारा दागी उम्मीदवारों को चुनावीं मैदान में उतारा ही जाना नहीं चाहिए फिर भी यदि ऐसा होता है तो जनता को उन्हें नकार देना चाहिए। लेकिन वास्तविकता इसके स्थान पर विपरीत नजर आती है। यदि हम इस बात पर गौर करें तो वर्तमान समय मे देश की अधिकतर राजनीतिक पार्टियां आपराधिक छवि वाले प्रत्याशियों को टिकट देते चले आ रहे हैं इस बात पर देश की जनता भी क्या कर सकती है? उसे यो अपना मत किसी न किसी को देना है चाहे वो उसके इच्छा के अनुरूप हो या विरुद्ध उन्हें ही अपना नुमाइंदा चुन्ने के लिए वह मजबूर है।
    वर्तमान समय मे उनकी इस तरह की उहापोह वाली स्थिति यदि हम बारीकी से समझने की कोशिश करें तो वर्तमान समय के लोगों की सामाजिक कारणों एवं अवस्थाओं पर दृष्टिपात करना होगा क्योंकि कानून की दृष्टि में जो व्यक्ति दागी, गलत या अपराधी पृवत्ति के हैं, क्या ऐसे लोग समाज के दृष्टि में भी वैसे ही है? यह आज वर्तमान समय में जवलंत प्रश्न है। ऐसा नही होने से इसका परिणाम भी हमारे सामने है, कि विभिन्न राजनीतिक दलें नैतिकता एवं आदर्श को ताक पर रख कर अपने मानदण्ड के अनुसार उम्मीदवारों का चयन कर लेते हैं।
    अभी वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉम्रस (राजनीतिक और चुनावी वकालत के माध्यम से भारत में लोकतांत्रिक सुधार लाना ) इस ADR संस्था द्वारा जारी किये गये आंकड़ों के अनुसार देश की दो सबसे बड़ी पार्टियों में से पहली भाजपा ने 37 प्रतिशत और कांग्रेस ने 26 प्रतिशत, तक आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को पार्टी की ओर से टिकट दिया था। जिनमे से 186 उम्मीदवारों को जनता ने चुनकर लोकसभा में पहुंचा भी दिया।
    पिछले कुछ वर्षों से देश के विभिन्न पार्टियों में आपराधिक छवि वाले लोगो के प्रवेश पाने से वाकी के बचे लोगों के भीतर यह भावना घर कर गयी कि केवल जीत ही सबसे महत्वपूर्ण बात है और मौजूदा समय मे उम्मीदवारों के जीत हासिल करने की योग्यता ही सर्वोपरि मानी जाने लगी, ऐसे में उम्मीदवारों के समक्ष सिद्धांतों, मूल्यों एवं नैतिकताओं जैसी बातों का गौण हो जाना स्वाभाविक सी बात है। यदि हम इसके मूल कारणों में दृष्टिपात करें तो हमारे मस्तिष्क में यह प्रश्न भी उभर कर आता है कि आखिरकार हमारे समाज में ऐसी स्थिति पैदा  होने के लिए कौन या कौन सी बजह जिम्मेदार है? जिसके मुख्य कारणों में सर्व प्रथम तो यही है कि वर्तमान समय की सपूर्ण राजनीति की धुरी जीत पर आधारित हो कर रह गयी है। जिसके कारण येनकेन प्रकारेण चुनाव में जीत हासिल करना ही सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण बात है और जीत की लालसा में वशीभूत हो कर राजनीतिक दलें ऐसे उम्मीदवारों को टिकट देते हैं जिनकी जीत की संभावना सर्वाधिक होती है और आपराधिक पृष्ठभूमि जैसे अन्य पहलू जीत के आगे बौने पड़ जाते हैं और राजनीतिक दलों की यही मजबूरी आगे चलकर जनता की भी मजबूरी बन जाने से ऐसे उम्मीदवार को अपना बहु मूल्य मत दे डालती है। मतदाताओं का राजनीतिक दलों से विशेष  भावनात्मक एवं नीतिगत तौर पर जुड़ाव होने से भी उम्मीदवार के व्यक्तित्व पर ध्यान न देते हुये पार्टी, दल के नेता एवं पार्टी के नीतियों को सामने रखकर उन्हें अपना उम्मीदवार चुन लेते हैं।
    कभी-कभी तो ऐसे उम्मीदवारों का भी चुनाव कर लिया जाता हैं, जो जनता के मध्य लोकप्रिय नहीं होने के बावजूद राजनीतिक दल के ‘प्रिय’ होते हैं। इस तरह की विकल्पहीनता की स्थिति में दल विशेष में अपना अटूट आस्था रखने वाले मतदाताओं के पास अपने दल के उम्मीदवार को चुनने के अलावा कोई विकल्प शेष नहीं रह जाता है। इसके अलावा मतदाताओं का एक वर्ग ऐसा भी है जो अपने कीमती मत को बेकार होते हुए नहीं देखना चाहती है। ऐसे वर्गों के लोग साधारणतः जीतने वाले उम्मीदवार को ही अपना मत देना पसंद करते है क्योंकि अपने कीमती मत को वह रद्दी की टोकरी में नहीं डालना चाहता, फिर भले ही ऐसे उम्मीदवार की छवि दागी ही क्यों न हो।
    आगामी देश मे होने वाले विधानसभाओं एवं लोकसभा चुनावों में दागी छवि वाले उम्मीदवारों को लेकर राजनीतिक परिदृश्य एक न एक दिन अवश्य बदलेगा और बदलना भी चाहिए वर्तमान समय मे भले ही इसके आसार कहीं से अभी नजर नही आरहे हों लेकिन उम्मीद कभी भी नही छोड़ी जानी चाहिए।

    Keep Reading

    देह से परे, आत्मा के समीप; एक निष्काम प्रेम-यात्रा

    Dharmendra 'Pradhan' may face action

    धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: नैतिकता नहीं, भारी आक्रोश के चलते शिक्षा मंत्री पद से हटे

    “My children are inside; I am standing outside” – This hell of child labor must end now.

    ‘मेरे बच्चे अंदर हैं, मैं बाहर खड़ा हूँ’ – बाल श्रम की इस नरक को अब बंद होना चाहिए

    the-nations-future-on-the-streets-of-delhi

    दिल्ली की सड़कों पर देश का भविष्य!

    क्रूर नियति के बीच हमारी क्रूरता और उम्मीद की कुछ किरणें

    The battle between development and the environment in Uttarakhand.

    उत्तराखंड में विकास बनाम पर्यावरण की जंग

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts

    पश्चिम बंगाल राज्यसभा उपचुनाव: कुलदीप माइती की अहम भूमिका, भाजपा टिकट पर लड़ सकते हैं चुनाव?

    July 28, 2026

    मोदी जी का सिपाही! रूपेश पाण्डेय की मेहनत रंग लाई, बिहार में गूंज रहा नाम

    July 28, 2026

    देह से परे, आत्मा के समीप; एक निष्काम प्रेम-यात्रा

    July 28, 2026

    McVitie’s की पैरेंट कंपनी का 2030 तक बेहतर न्यूट्रिशन वाले प्रोडक्ट्स की सेल दोगुनी करने का लक्ष्य

    July 28, 2026
    Mojtaba Khamenei's open support for Hezbollah.

    मोजतबा खामेनेई का हिजबुल्लाह को खुला समर्थन

    July 28, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading