डॉ दिलीप अग्निहोत्री
काठमांडू के बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में आपसी सहयोग और सम्पर्क बढ़ाने पर सहमति बनी। यह राहत की बात है कि चीन और पाकिस्तान इस संगठन के सदस्य नहीं है। इस कारण बिम्सटेक में नकारात्मक बाधा की गुंजाइश नहीं रहती। आपसी सहमति बनाने का यहाँ माहौल रहता है। नरेंद्र मोदी ने उन्हीं समस्याओं व प्रस्तावों का उल्लेख किया जो सभी सदस्यों पर लागू होती है। यहां की सरकार ही नहीं आमजनता का भी इनसे सरोकार रहता है। यही कारण है कि मोदी के को बातों का सर्वसम्मति से समर्थन किया गया। इन्हें संयुक्त घोषणापत्र में शामिल किया गया। अब सभी सदस्य देशों को संयुक्त घोषणा पर तेजी से अमल करना चाहिए।बिम्सटेक भारत समेत सात देशों का एक क्षेत्रीय समूह है। इसका पूरा नाम बंगाल की खाड़ी बहु क्षेत्रीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग उपक्रम। वे ऑफ बंगाल इनीटीऐटिव फ़ॉर मल्टी सेक्टोरियल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कार्पोरेशन मतलब बेमस्टेक में अन्य सदस्य बांग्लादेश, म्यांमार, श्रीलंका, थाईलैंड, भूटान और नेपाल हैं। इस समूह के देशों की कुल आबादी वैश्विक आबादी का बाइस प्रतिशत है। इसका कुल घरेलू उत्पादन एक सौ छियानबे लाख करोड़ रुपये है।

सदस्य देश विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे। इनमें व्यापरिक, आर्थिक, यातायात सम्पर्क, डिजिटल सम्पर्क, आदि प्रमुख है। अगले महीने भारत में बिम्सटेक बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास किया जाएगा। इसका मतलब है कि ये देश आपसी रक्षा सहयोग भी बढ़ाएंगे।
यह सन्योग था कि जिस समय काठमांडू में यह सम्मेलन चल रहा था, लगभग उसी समय चेनाब नदी पर बनने वाले दो पन बिजली परियोजनाओं पर पाकिस्तान की आपत्ति को भारत ने खारिज कर दिया। बताया जा रहा है कि चेनाब नदी पर एक हजार मेगावाट पाकल दुल जलाशय और अड़तालीस मेगावाट लोअर कालनाल पनबिजली परियोजना के निर्माण पर पाकिस्तान ने आपत्ति की थी। भारत ने इस पर अपना नजरिया व्यक्त किया। इन परियोजनाओं को रोका नहीं जाएगा। पाकिस्तान जैसी कठिनाई बिम्सटेक में नहीं है।
बिम्सटेक के अध्यक्ष ओली ने काठमांडू घोषणा-पत्र का मसौदा पेश किया जिसे सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया। शांतिपूर्ण, समृद्ध और स्थिर बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के लक्ष्य को लेकर काठमांडू के घोषणापत्र में साझी बुद्धिमत्ता, सोच और दृष्टि दिखती है। बिम्सटेक के सदस्य देशों में ऊर्जा सहयोग बढ़ाने के लिए बिम्सटेक ग्रिड इंटरकनेक्शन की स्थापना के लिए सहमति पत्र पर भी हस्ताक्षर किया गया।
श्रीलंका बिम्सटेक का नया मेजबान होगा। शिखर सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों को सर्वाधिक महत्व मिला। उनके प्रस्तावों को संयुक्त घोषणापत्र में प्रमुखता दी गई। इसके अलावा उन्होंने नेपाल के प्रधानमंत्री ओली, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना और श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाला सीरीसेना सहित अन्य नेताओं से क्षेत्रीय व द्विपक्षीय विषयों पर बात की। विगत बिम्सटेक शिखर सम्मेलन का मेजबान भारत था। यह सम्मेलन दो हजार सोलह में गोवा में हुआ था। उसमें आतंकवाद की सर्वसम्मति से निंदा की गई थी।आतंकियों, उनके संगठनों और नेटवर्क की समाप्ति, उन्हें समर्थन, संरक्षण, व सहायता देने वाले देशों की जवाबदेही तय करने की मांग की गई थी।
इस बार काठमांडू में भी शातिपूर्ण समृद्धि और सतत बंगाल की खाड़ी के प्रति विश्वास व्यक्त किया गया। नरेंद्र मोदी ने ठीक कहा कि इस क्षेत्र के सभी देशों के बीच व्यापारिक संपर्क, आर्थिक संपर्क, यातायात संपर्क, डिजिटल संपर्क और आम जन से आम जन के बीच संपर्क की बड़ी संभावना है। बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में कोई देश ऐसा नहीं है, जो आतंक और नशीली दवाओं की तस्करी जैसे अंतर-देशीय अपराधों से नहीं जूझ रहा है। इसके लिए संयुक्त फ्रेमवर्क तैयार करने की आवश्यकता है। सभी सदस्य देशों को आपदा राहत अभियानों और मानवीय सहायता से जुड़े मुद्दों के लिए आपस में सहयोग और समन्वय करना चाहिए। जाहिर है कि बिम्सटेक के माध्यम से आपसी संयोग को नया आयाम दिया जा सकता है। इसके सदस्य देशों के बीच अनेक साझा समस्याएं है, इनसे निपटने के साझा विचार है। इनके बल पर आगे बढ़ा जा सकता है।







