Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Sunday, October 25
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग»Current Issues

    संवैधानिक मुखिया का मन्तव्य

    By June 16, 2018 Current Issues No Comments6 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 656
    डॉ दिलीप अग्निहोत्री
    राज्यपाल के रूप में राम नाईक के प्रत्येक कार्य के पीछे संवैधानिक आधार होता है। वह अपनी सीमा समझते है और उसी के अनुरूप निर्णय करते है। यह अजीब है कि पूर्व मुख्यमंत्री आवास प्रकरण पर जो लोग जांच की मांग कर रहे थे, वह राज्यपाल पर हमला बोल रहे है।  जिस पत्रकार वार्ता में राज्यपाल के लिए तीखे शब्द प्रयोग किये गए, उसी में जांच की मांग भी की गई। सपा प्रमुख ने कहा कि मीडिया से पहले उस घर में कौन कौन गया इसकी भी जांच होनी चाहिए। अब यह कैसे हो सकता है वह जांच की मांग करें तो समाजवाद, राज्यपाल जांच का सुझाव दें तो संघ की आत्मा।  जबकि राज्यपाल नाईक ने भी केवल बंगले में तोड़ फोड़ की जांच कराने और दोषी की विधि के अनुरूप सजा देने का सुझाव दिया था।
    उन्होंने न किसी को दोषी बताया, न किसी का नाम लिया। ऐसे में राज्यपाल पर हमले की बात समझ से परे है। उनके पत्र के मूल विचार को समझना चाहिए था। उन्होंने लिखा कि पूर्व मुख्यमंत्रियों के बंगले राज्य सम्पत्ति विभाग की अमानत है। इनका रख रखाव लोगों के द्वारा दिये गए कर से होता है। इसलिए इसमें तोड़ फोड़ की जांच होनी चाहिए। बिडंबना देखिये कि कुछ दिन पहले यही बात अखिलेश यादव कह रहे थे। उनका कहना था कि इसके पीछे किसी अधिकारी की साजिश है , इसलिए जांच होनी चाहिए। यही बात राज्यपाल में कही है।
    राज्यपाल द्वारा इसका संज्ञान लेना सराहनीय है। वह सोते से जागे नहीं है। वह कर्तव्यों के निर्वाह में जागते ही रहते है। वह संवैधानिक मुखिया है। उनका पत्र मात्र एक बंगले तक सीमित नहीं था। प्रायः देखा जाता है कि अपनी मांगे पूरी न होने या शासन ,प्रसाशन के प्रति विरोध व्यक्त करने के लिए प्रदर्शनकारी सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाते है। दूसरी बात यह कि बड़ी संख्या में सरकारी कर्मी सरकारी आवास में रहते है। सार्वजनिक स्थानों पर भी सम्पत्ति को नुकसान पहुचाया जाता है। ईस्टर्न एक्प्रेस वे का उद्घाटन कुछ दिन पहले ही हुआ है। यहां यात्रियों की सुविधा के लिए लगाई गई अनेक सामग्री को लोग उखाड़ ले गए। राज्यपाल के पत्र को उस व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखना चाहिए।
    यदि शीर्ष स्तर पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की जांच कर कार्रवाई नहीं की जाती तो नीचे तक उसका गलत सन्देश जाता। जिसका स्वागत होना चाहिए था , उसके लिए कटुता पूर्ण बयान दिया गया। ऐसा भी नहीं कि राज्यपाल ने किसी एक बंगले पर ही अपने सुझाव दिए। यह बात उनकी राज्य विभाग के संबंधित अधिकारी के साथ बात चीत से स्पष्ट होती है। उस अधिकारी ने राज्यपाल को बताया कि खाली हुए सभी बंगलों की वीडियो ग्राफी कराई जाएगी ,और यह राज्यपाल को भी दी जाएगी। इस बात से राम नाईक संतुष्ट हुए। उनका दिलचस्पी किसी व्यक्ति या बंगला विशेष पर नहीं थी। संवैधानिक मुखिया के रूप में वह सरकारी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने का सन्देश देना चाहते थे।
    राज्यपाल ने इसमें कुछ भी गलत नहीं लिखा कि चार विक्रमादित्य आवास खाली करने से पूर्व उसमें की गई तोड़ फोड़ व नुकसान पहुंचाने का मामला मीडिया और आमलोगों में चर्चा का विषय है। यह नितांत अनुचित और गंभीर मामला है। पूर्व मुख्यमंत्री को आवंटित आवास राज्य संपत्ति के कोटे में आते है। इसलिए मुख्यमंत्री इस पर विधि के अनुरूप कार्रवाई करें। ऐसे में यह कहना ठीक नहीं था कि राज्यपाल सोते सोते जागते है, और वह संविधान की आत्मा को खत्म कर रहे है। राम नाईक संविधान के प्रति बहुत सजग रहते है। वह अपने इस दायरे के अंतर्गत ही कार्य करते है। बंगले में तोड़ फोड़ हुई , यह सच्चाई अब सबके सामने है। किसने की इज जांच का विषय है। राज्यपाल का सुझाव संविधान की भावना के अनुरूप है। ऐसे कार्यो से संविधान की आस्था खत्म नहीं होती। बल्कि उसे मजबूती मिलती है। इसमें राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को घसीटने का भी कोई औचित्य नहीं था। उधर कांग्रेस अध्यक्ष महात्मा गांधी की हत्या के लिए संघ को दोषी बता रहे है। उनके लिए उस समय दिए गए न्यायिक निर्णय कोई महत्व नहीं, जिसमें महात्मा गांधी की हत्या के आरोप से संघ को बरी किया गया था।
    इतना ही नही जवाहर लाल नेहरू और लालबहादुर शास्त्री ने गणतंत्र दिवस परेड पर पथ संचलन के लिए संघ को आमंत्रित किया था। राहुल ने एक झटके में नेहरू जी और शास्त्री जी को गलत साबित कर दिया। उसी प्रकार युवा नेता अखिलेश यादव ने भी पूर्व मुख्यमंत्रियों के बंगले खाली कराने को साजिश करार दिया। इतना ही नहीं उन्होंने अन्य पूर्व मुख्यमंत्रियों का नाम नहीं लिया । कहा कि उन्हें और मायावती के खिलाफ साजिश की गई है। साथ में यह भी जोड़ा कि वह न्यायपालिका का सम्मान करते है। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्रियों का बंगला खाली कराने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया था। इसमें कल्याण सिंह, राजनाथ सिंह और नारायण दत्त तिवारी भी शामिल थे। लेकिन अपनी चुनावी सुविधा के अनुरूप केवल अपने और मायावती के खिलाफ साजिश बताया गया। गौरतलब है कि बसपा प्रमुख ने केवल अपने बंगले की बात की। गठबन्धन की जरूरत उन्हें भी है। लेकिन उन्होंने किसी अन्य का बचाव नहीं किया। वैसे यह गनीमत है कि बंगला खाली करने वालों में कल्याण सिंह भी है। अन्यथा इस मसले को समीकरण के हिसाब से नया रंग भी दिया जा सकता था। जो लोग सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी किसी साजिश का अंदेशा व्यक्त कर रहे है, वह इसे दूसरी दिशा में मोड़ भी सकते थे।
    अखिलेश ने कहा कि सरकार के इशारे पर मुझे बदनाम करने की साजिश की गई। यदि गंजेड़ी या स्मैकिए टोंटी निकाल ले गए,तो इसका खुलासा भी जांच से ही हो सकता है। इस प्रकरण पर राजनीतिक पार्टियों के आरोप प्रत्यारोप अपनी जगह पर है। लेकिन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और राज्यपाल के लिए अनुचित टिप्पणियों से बचना चाहिए। संघ के प्रचारकों का तो अपना कोई निजी आवास भी नहीं होता। उन्हें किसी पूर्व मुख्यमंत्री के बंगले से क्या लेना देना। भाजपा पर चाहे जितना हमला बोला जाए उस पर किसी को आपत्ति नहीं हो सकती। भजपा उसका जबाब देगी। इसी प्रकार राज्यपाल द्वारा विधि के अनुसार जांच कराने के सुझाव पर भी नाराजगी अनुचित थी। खासतौर पर तब जबकि जांच की मांग पहले से की जा रही थी।

    Keep Reading

    नीले ड्रम’ हत्याकांड पर आया फैसला : जैसी करनी, वैसी भरनी

    अकीदा बनाम अंधविश्वास: पक्के विश्वास और भटकती भीड़ की दास्तान

    नालसा का एलएडीसी सिस्टम खत्म करने का फैसला: क्या गरीब कैदियों से छिन जाएगा न्याय का सहारा?

    Nepal Flood Tragedy: The Most Harrowing Incident of Devastation

    नेपाल बाढ़ त्रासदी: तबाही का सबसे दर्दनाक हादसा

    रक्षाबंधन: परंपरा, पहचान और बाजारवाद का संगम

    Trump Trapped in a Labyrinth: US President's Mounting Difficulties Amid the Maze of an Iran War

    चक्रव्यूह में फंसे ट्रंप: ईरान युद्ध की भूलभुलैया में अमेरिकी राष्ट्रपति की बढ़ती मुश्किलें

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    In the age of AI, providing accurate news is more important than rushing.

    एआई के दौर में जल्दबाजी नहीं, सही खबर देना जरूरी : विशाल सिंह

    October 24, 2026
    Anupam Kher’s story will travel from the glitz of fashion to the Himalayas.

    फैशन की चमक से हिमालय तक पहुंचेगी अनुपम खेर की कहानी

    October 24, 2026

    “मेड इन रशिया” फोरम का मुख्य विषय उच्च प्रौद्योगिकी होगा

    October 24, 2026
    2nd KN Singh Memorial Cricket Tournament: Hosts Vivekananda Modern Academy defeat SR International

    दूसरा केएन सिंह स्मारक क्रिकेट टूर्नामेंट: मेजबान विवेकानंद मॉडर्न एकेडमी ने एसआर इंटरनेशनल को दी शिकस्त

    October 22, 2026

    भारतीय विशेषज्ञों ने BRICS+ फैशन समिट में AI और कारीगरी पर की चर्चा

    October 21, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading