दिलीप अग्निहोत्री
हिन्दू चिंतन में गाय की बहुत महिमा बताई गई है। विश्व में गाय ही ऐसी जीव है जिसका दुग्ध, गोबर, मूत्र तक मे औषधीय गुण होते है। यहां तक कि गौ के गोबर से बने कंडे की राख का भी औषधीय प्रयोग होता है। प्राचीन भारत मे कृषि और गौ पालन परस्पर पूरक माने जाते थे। इसके अनेक लाभ थे। एक अन्न और गाय के दूध में सम्पूर्ण पोषण होता है। एक गाय का गोबर चार लोगों के परिवार की ईंधन जरूरत को पूरा कर सकता है। आज स्वास्थ विशेषज्ञ यह स्वीकार कर चुके है कि गाय के संबन्ध में भारतीय ऋषियों का अनवेषण सही है। गाय के दुग्ध विशेताओं से पूर्ण होता है। गौ मोटर्स अनेक बीमारियों का समाधान होता है। लेकिन इधर उत्तरप्रदेश एक समस्या देखी जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आददित्यनाथ ने हिन्दू मान्यताओं का सम्मान करते हुए गौवंश की हत्या पर कड़ाई से प्रतिबंध लगाया है। इनकी संख्या बढ़ गई है। हिन्दू समाज इस बात से तो सन्तुष्ट है। लेकिन उनके संरक्षण की पूरी उम्मीद सरकार से ही करता है। सरकार को अपना काम करना चाहिए। लेकिन समाज को भी अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करना चाहिए। गाय जब दूध देना बंद करती है तो लोग उसे छोड देते है। जबकि दूध न देने वाला गोवंश भी अपने जीवन का को चलाने लायक लाभ दे सकता है। इसके लिए बाड़े बनवा कर वहां गोवंश को रखना चाहिए। सरकार को चाहिए को गाय के गोबर व मूत्र पर आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन दे, केमिकल खाद से जमीन की उपजाऊ क्षमता कमजोर होती जा रही है। इसे केवल गोबर की से ही बचाया जा सकता है। छुट्टा पशु समस्या उतपन्न कर रहे है। लेकिन इसका समाधान उनकी हत्या से नहीं हो सकता। किसानों को फसल के समय जागना पड़ रहा है। लेकिन कहीं से भी अन्न उत्पादन में कमी दर्ज नहीं की जा रही है।
यूरोप और अमेरिका ने गऊ को मांस से बने चारे दिए। इससे उनमें निमाड़ी फैली। गायों की हत्या की गई। इससे भी परेशानी बढ़ गई। प्रकृति से ज्यादा खिलवाड़ घातक होता है।
गोवंश की हत्या भरतीय समाज को आहत करती है। वह चाहता है कि इनकी हत्या पर लगे प्रतिबंध का कड़ाई से पालन किया जाए। लेकिन यही बात समाज की जिम्मेदारी को भी बढा देता है। ये विचार लायंस क्लब राजधानी अनिंद द्वारा वैदिक आश्रम गौशाला में आयोजित समारोह में व्यक्त किये गए। इस गौशाला में बूढ़े गोवंश की संख्या अधिक है, जिन्हें लोग छुट्टा छोड़ देते है। समारोह में इंजीनियर आर आर गंगवार ने गौशाला के संचालन में पचास हजार रुपये की सहयोग राशि प्रदान की। लॉयन्स क्लब राजधानी अनिंद ने गौ संरक्षण कार्यक्रम चलाने की भी घोषणा की। यह कहा गया कि गोवंश का संरक्षण भारतीय मान्यताओं के अनुरूप है। यह कार्य केवल सरकार के भरोसे नहीं हो सकता है। समाज को भी इसमें योगदान करना होगा।
इस अवसर पर लायंस क्लब के अध्यक्ष राकेश अग्रवाल, डॉ आरसी मिश्रा, राकेश श्रीवास्तव, योगेश दीक्षित, सन्तोष पांडेय, बीएम श्रीवास्तव, जगदीश अग्रवाल, कर्मजीत सिंह लूथरा,मनोज रुहेला, विनोद तिवारी सहित स्थानीय लोग मौजूद थे। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार गौमूत्र में तीस से अधिक उपयोगी तत्व होते हैं। इसमें गंधक एवं तांबा कीटनाशक का काम करते हैं। जबकि नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटेशियम, लोहा, चूना, सोडियम उपज को बढ़ा देते हैं। गौमूत्र से बने कीटनाशक के उपयोग से उपज में वृद्धि होती है। गोबर की खाद, मूत्र के कीटनाशक कृषि लागत को कम करते है। रासायनिक कीटनाशकों के गौमूत्र से कीटनाशक तैयार करने में खर्च एक चौथाई रह जाता है। यह सराहनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं गौ संरक्षण के लिए समर्पित है। इसके साथ ही वह फसलों की सुरक्षा के प्रति भी गंभीर है।
योगी ने कहा कि प्रदेश में अब कांजी हाउस नहीं, बल्कि गो संरक्षण केंद्र बनेंगे, ताकि कोई भी गोवंश किसी की फसल नष्ट न करे। साथ ही उनकी हत्या भी न हो। योगी ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार से जुड़े लोग दूध निकालकर खेतों में पशुओं को छुट्टा छोड़ देते हैैं। इससे फसलों को तो नुकसान होता ही है, गो तस्करों को भी उनका संरक्षण प्राप्त होने के चलते आए दिन घटनाएं होती हैैं। यह एक षड्यंत्र है। लेकिन वह चाहे कितने ही प्रयास कर लें, कुछ होने वाला नहीं है। हम गायों को न सिर्फ संरक्षण देंगे, बल्कि उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित करेंगे। मुख्यमंत्री की इस घोषणा पर विश्वास करना चाहिए। लेकिन समाज को भी इसमें सहयोग करना चाहिए।







