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    Home»ब्लॉग»Current Issues

    पाप के घरौंदे बनते संरक्षण गृह

    By August 11, 2018 Current Issues No Comments6 Mins Read
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    जी क़े चक्रवर्ती

    आज मौजूदा के समय मे मानवता और इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एवं मानवीय समाज की संस्कृति और आदर्श को तार-तार कर देने वाली एक नही, दो नही तीन-तीन घटनाये पहले बिहार के मुझफ्फरपुर दूसरी गोरखपुरके देवरिया में और तीसरा प्रतापगढ़ में बच्चियों एवं महिलाओं के यौन शोषण के मामले ने देश के साथ ही साथ सम्पूर्ण मानव समाज को शर्मसार कर दिया है।

    निश्चित रूप से यह हमारे मानव समाज के प्रति वह अपराध है जो आश्रयहीन बदकिस्मत लड़कियां जहाँ वह सिर छिपाने के लिये पहुंचीं, वहीं आश्रय ग्रह ने उनके बेसहारा होने जैसी मजबूरी का फायदा उठाते हुए उनकी अस्मिता से खिलवाड़ किया। वैसे तो पिछले दिनों हरियाणा से लेकर देश के अनेक राज्यों में बालिका संरक्षण गृहों में संगठित रूप से जिस्मफरोशी का धंधा जोरों से गुप्त रूप से फलता-फूलता रहा जिसकी वजह से कम उम्र की बालिकाओं के शारीरिक शोषण की खबरें लगातार आती रही हैं मगर बिहार के मुजफ्फरपुर में समाज कल्याण विभाग के संरक्षण में एक समाजसेवी संस्था द्वारा चलाये जा रहे बालिका गृह में  44  बल्किकाओं में से 34 लड़कियों की मेडिकल जांच के बाद उनके साथ हुये यौन शोषण की आशंका पुलिस द्वारा व्यक्त की गई। यहां तक कि उनके साथ होने वाले इन शोषण का विरोध करने वाली बच्चियों को अनेको तरह की यातनाएं भी दी जाती रही।

    घटनाये यही तक सीमित नहीं रही राक्षसों द्वारा यहां तक की एक बच्ची की हत्या कर उसे जमीन में दफना देने जैसी आरोप बालिका गृह की एक बालिका द्वारा लगाई जाने के बाद बालिका गृह के परिसर में खुदाई की गई। जिसे सच पाया गया। यह एक गहन चिंता का विषय है कि वर्ष 2013 से वर्ष 2018 के बीच इस बालिका गृह से छह लड़कियां गायब हुईं। यह मामला उस वक्त उजागर हुआ जब टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की ओर से एक सोशल ऑडिट हुआ। तेरह साल से 18 साल की लड़कियों के शोषण किये जाने की आशंका के बाद समाज कल्याण विभाग की ओर से मुजफ्फरपुर में पुलिस में एक रिपोर्ट लिखाई गई थी।  इस मामले में बालिका गृह के संचालक के साथ दस लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था इस रैकेट में सात महिलाएं भी शामिल होने की पुष्टि हुई थी।

    अभी इस घटना का अंत भी नहीं हुआ था कि यूपी के देवरिया में ताजा घटित हुयी घटना हिला दिया। घटनाक्रम का एक सबसे दुखद पहलू यह है कि यहां की एक लड़की ने एक महिला कर्मचारी एवं एक अन्य महिला पर देह शोषण में सहायक के रूप में इन लड़कियों को बहला फुसला कर किसी अन्य के हवाले करने जैसा आरोप भी लगाया है। यह अवश्य हुआ कि इस बालिका ग्रह की चलाने वाली महिला एवं उनके पति को अरेस्ट कर जेल भेज दिया गया है।

    अभी इस मामले की परतें खुलेंगी तो कई और सफेदपोश लोग बेनकाब होने के बाद इसमे और लोगों के शामिल होने के मामले सामने आने की संभावना हैं। यह मामला इसलिए भी गंभीर हो जाता है क्योंकि जिस बालिका गृह पर बालिकाओं के यौन शोषण व उत्पीड़न के आरोप लगे हैं, वह संस्थान पिछले साल तक यानि कि वर्ष 2017 तक सरकारी मदद से चल रहा था, इस बालिका गृह को काली सूची में डाल कर सरकारी सहायता रोक दी गई थी। लेकिन फिर भी यह बालिका ग्रह बकायदे संचालित होती रही जिस पर सरकारी अमले के लोगो तक ने दुबारा इस संस्था की ओर मुड़कर नही देखा कि यह संस्था अभी भी चल रही है या बंद हो गई है।

    कभी किसी भी सरकारी या व्यक्तिगत संस्था ने यह पता लगाने की आवश्यकता महसूस ही नहीं की कि लाचारी की मारी इन बच्चियों का अब क्या हाल है या उनके साथ क्या हो रहा है?

    ठीक ऐसा ही एक और मामला सरकारी सहायता प्राप्त संस्थान प्रतापगढ में संचालित हो रहा था। इस मामले में मुख्यमंत्री के सख्त होते ही इस बालिका गृह मामले में भी प्रतापगढ़ के डीएम द्वरा छापा मार कर जांच की गई तो यहां भी अनेको अनिमित्ताये पाई गई। यहां के रजिस्टर में दर्ज बालिकाओं की संख्या को जांच के दौरान एक बालिका को और जोड़ा गया। यहाँ पर भी कुछ गड़बड़ियों या कुछ इसी तरह की गतिविधियों के चलने की संभावना व्यक्त की गई है। अब यहां यह प्रश्न उठता है कि खुद पुलिस ही इन लापता या घर से भागी हुई आवारा बालिकाओं को इन संरक्षण ग्रह के सुपुर्द कर देती है और वह यह भूल जाती है कि वह वहां सुरक्षित है या नहीं!

    समाज मे किसी भी घटना के घटित हो जाने के बाद उस पर जम कर राजनीति किये जाने का हमारे देश मे एक प्रथा सी चल पड़ी है घटना के पनपने वाले स्थान या उसमे चल रहे इस तरह की गतिविधियों की सूचना हमारे नेताओं को पहले नही होती लेकिन जैसे ही इन मामलों में धड़पकड़ होने और इस तरह के घृणित कार्यों के खुलासे होते ही राज नेता लोगों इस पर राजनीति करना शुरू कर देते हैं।

    उनसे यह पूछा जाना चाहिए कि कार्रवाई से पहले या ऐसी घटनाओं के खुलासा होने से पहले ये राजनीतिक दल या उनके नेता लोग कहां थे? कोई नेता इन बच्चियों को इस नरक से मुक्त कराने के लिए सामने निकल कर क्यों नहीं आया? निश्चित रूप से यह संचालकों द्वारा संचालित संगठित घृणित अपराध की श्रेणी में आने के बावजूद इन्हें आर्थिक मदद देने वाले सरकारी विभाग भी उतने जिम्मेदार या दोषी है, जो समय-समय पर देश के विभिन्न प्रदेशों में संचालित होने वाले ऐसे बालिका गृहों की जांच कर बच्चियों के साथ होने वाले कुकृत्यों एवं अत्याचारों का संज्ञान नहीं लिया जाता है।

    उत्तर प्रदेश, बिहार से लेकर देश के अनेको राज्यों में संचालित होने वाले बालगृहों एवं विशेष कर बिहार एवं उत्तर प्रदेश के बालिका सुधार गृहों में रह रहे इन बालिकाओं के यौन शोषण व उत्पीड़न की खबरें लगातार मिलती ही रहती हैं।

    सुप्रीम कोर्ट ने बिहार एवं उत्तर प्रदेश में स्थित ऐसे आश्रय गृहों में नाबालिग बच्चियों एवं महिलाओं के साथ हाल ही में हुए यौन शोषण की मामलों में चिंता व्यक्त करते हुए यह प्रश्न किया कि समाज मे ऐसी घटनाएं कब रुकेंगी? देश के लोगों के सोच में बदलाव आने के साथ ही उनकी मानसिकता एवं सोच विकृत अवस्था की ओर उन्मुख होता दिखाई दे रही है। समाज की इस बुराई को समय रहते यदि रोका नही गया एवं इस पर कठोर दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित नही किया गया तो आगे आने वाले दिनों में समाज उत्श्रंखलता की ओर मुड़कर तमामों तरह की विकृतियों को ही जन्म देगा।

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