डॉ दिलीप अग्निहोत्री
नीति आयोग की स्थापना विकास और सहयोगी संघवाद को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से की गई था। इसमें संदेह नहीं कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस लक्ष्य को बाहर ढंग से समझा है। यही कारण है कि विकास के कई बिंदुओं पर उत्तर प्रदेश को शीर्ष पर पहुंचाने में सफल रहे है। नीति आयोग की अवधारणा पर उन्होंन न केवल अमल किया बल्कि उसमें अपना सक्रिय योगदान भी दिया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के विकास को सर्वाधिक महत्व दिया। नीति आयोग के गठन के समय इसी प्रकार की अपेक्षा की गई थी। नीति आयोग के माध्यम से राज्यों के बीच विकास की स्वस्थ प्रतिद्वंदिता प्रारंभ करने की कल्पना की गई थी। योगी ने इसे चरितार्थ किया। उन्हीं की तरह अनेक मुख्यमंत्री भी इस दिशा में बेहतर कार्य करने में सफल रहे। जिनको विकास की अपेक्षा वोटबैंक की सियासत ज्यादा पसंद थी, वह उसी में उलझे रहे।जिन्होंने विकास को अपना संवैधानिक दायित्व समझा वह अपने राज्य को आगे बढाने में सफल रहे। योगी आदित्यनाथ ने नीति आयोग की बैठक में विकास के सकारात्मक प्रस्ताव किये। उनकी बातों का प्रभाव इसलिए भी हुआ क्योकि उनका क्रियान्वयन पक्ष भी उल्लेखनीय रहा है।
नीति आयोग की गतवर्ष और वर्तमान बैठक पर विचार करें तो पूरी तस्वीर स्पष्ट होती है। गत वर्ष की बैठके में योगी ने विकास कार्यों का जो ब्यौरा दिया था, उसे आगे बढाने में भी वह सफल रहे है। खाद्यान्न उत्पादन में उत्तर प्रदेश की भागीदारी बीस प्रतिशत भागीदारी है। इसीलिए योगी पद संभालने के तत्काल बाद कृषि पर ही सर्वाधिक ध्यान दिया था।किसानों के लिए बाजार को व्यापक और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए ई-नाम योजना प्रदेश की मण्डी समितियों में लागू करने का मामले में उत्तर प्रदेश पहले पायदान पर रह। दुग्ध, गेहूं, गन्ना और आलू उत्पादन में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर है।
इसी प्रकार शौचालय निर्माण, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण व शहरी निर्माण में उत्तर प्रदेश ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। पूर्वांचल एक्सप्रेस बुंदेलखंड एक्सप्रेस व डिफेंस कॉरिडोर की दिशा में कार्य चल रहा है। गेंहू, धान, खरीद के नए रिकार्ड कायम हुए। अभी हुई नीति आयोग की संचालन परिषद की बैठक का मुख्य एजेंडा सूखे की स्थिति, कृषि क्षेत्र का संकट और नक्सल प्रभावित जिलों से संबंधित था। इसी क्रम में वर्षा जल संचयन, आकांक्षी जिला कार्यक्रम, कृषि क्षेत्र में संरचनात्मक बदलाव के मुद्दों पर भी विचार हुआ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही कहा कि दो हजार चौबीस तक तक देश की अर्थव्यवस्था साढ़े तीन सौ लाख करोड़ रु तक ले जाने का लक्ष्य कठिन है, लेकिन राज्यों के ठोस प्रयासों से इसे हासिल किया जा सकता है। इस कथन में सहयोगी संघवाद का ही विचार समाहित था। केंद्र व राज्य को मिलकर आय और रोजगार बढ़ाने में निर्यात क्षेत्र में कार्य करना है। नया जलशक्ति मंत्रालय सिंचाई क्षेत्र में उपयोगी होगा।केंद्र सरकार दो हजार बाइस तक तक किसानों की आय दोगुनी करने के लिए प्रतिबद्ध है।
सरकार मछली पालन, पशुपालन, फल और सब्जी उत्पादन पर जोर दे रही है। किसान सम्मान निधि और अन्य योजनाओं का लाभ किसानों को समय पर मिलना चाहिए। योगी आदित्यनाथ ने नीति आयोग की बैठक में उपयोगी सुझाव दिए। इनपर अमल केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं देश के विकास को भी सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि सूखा घोषित क्षेत्रों में फसल क्षति की सीमा को तैतीस प्रतिशत से कम करते हुए बीस प्रतिशत किया जाए। किसान क्रेडिट कार्ड की ऋण व्यवस्था को फसल के स्थान पर भूमि क्षेत्रफल के आधार पर बनाया जाए। बाढ़ मेमोरेण्डम के आधार पर परिसम्पत्तियों के रेस्टोरेशन हेतु भारत सरकार द्वारा एक माह के अंदर निरीक्षण कराकर राज्यों को अपेक्षित सहायता दी जाए।
आपदाओं से क्षतिग्रस्त होने वाली सम्पदा के पुनर्निर्माण की अवधि को स्पष्ट किया जाय। राज्य आपदा राहत कोष की सहायता राशि बढ़ायी जाए। किसान क्रेडिट कार्ड की ऋण व्यवस्था को फसल के स्थान पर भूमि क्षेत्रफल के आधार पर बनाये जाने से किसानों को अधिक साख सीमा उपलब्ध हो सकेगी। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के खर्चों के लिए केंद्र से मिलने वाली सहायता की दरें बड़ाई जाए। डीबीटी के माध्यम से भुगतान करने वाला उत्तर प्रदेश देश में पहला राज्य बन गया है।। पिछले दो वर्षों में पचास लाख से अधिक किसानों को डीबीटी के माध्यम से बारह सौ करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि सीधे उनके खाते में भेजी गयी है।
जाहिर है कि योगी आदित्यनाथ ने नीति आयोग की बैठक के एजेंडे के अनुरूप सार्थक सुझाव दिए। उनका फोकस मुख्यरूप से किसान कल्याण और विकास पर था। इन क्षेत्रों में योगी आदित्यनाथ का रिकार्ड भी बेहतर रहा है।







