संक्रान्ति का संहार’ और ‘काल यात्रा: वेद से बर्लिन तक’ में दिखेगा इतिहास और भारतीय संस्कृति का अनोखा संगम; यूपी प्रेस क्लब में जुटे दिग्गज?
लखनऊ, 16 सितम्बर: हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब में आयोजित एक गरिमामय समारोह में प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. विद्यासागर उपाध्याय की दो नई पुस्तकों का विमोचन किया गया। अखिल भारतीय साहित्य परिषद, लखनऊ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्य जगत के कई प्रमुख विद्वानों और विचारकों ने शिरकत की।
इतिहास और संस्कृति को पिरोतीं दो कृतियाँ
24 ग्रंथों के रचयिता डॉ. विद्यासागर उपाध्याय की इन दोनों कृतियों में प्रमाणित ऐतिहासिक तथ्यों और वैचारिक चेतना का अद्भुत समावेश देखने को मिलता है:
‘संक्रान्ति का संहार’ (ऐतिहासिक उपन्यास): अद्विक प्रकाशन द्वारा प्रकाशित यह उपन्यास 14 जनवरी 1761 को हुए पानीपत के तृतीय युद्ध पर आधारित है। इसमें इतिहास के इस निर्णायक अध्याय को राजनीतिक अंतर्दृष्टि और मानवीय संवेदनाओं के साथ पिरोया गया है।
‘काल यात्रा : वेद से बर्लिन तक’ (कहानी-संग्रह): बेंजाई प्रकाशन द्वारा लाई गई यह पुस्तक प्राचीन वेद काल से लेकर आधुनिक विश्व तक की सांस्कृतिक और वैचारिक यात्रा को कहानियों के माध्यम से प्रस्तुत करती है।
विद्वानों और आलोचकों के विचार
कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद के अध्यक्ष निर्भय नारायण गुप्त ने की। मुख्य वक्ता और आलोचक डॉ. रिंकी मणिकर्णिका ने दोनों कृतियों की सराहना करते हुए कहा कि ‘संक्रान्ति का संहार’ ऐतिहासिक तथ्यों के कड़े परिश्रम का परिणाम है, वहीं ‘काल यात्रा’ भारतीय ज्ञान-परंपरा और वैश्विक चेतना के विविध आयामों को बहुत ही सहजता से उजागर करती है।
डॉ. ममता पंकज के संचालन में संपन्न हुए इस समारोह में पेशवा बाजीराव बल्लाल भट्ट के वंशज राजराजेश्वर प्रभाकर नारायण राव पेशवा, आरा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति आचार्य धर्मेन्द्र, पूर्व सीएमओ डॉ. अनिल मिश्र, महेंद्र भीष्म और डॉ. नरेन्द्र भूषण सहित साहित्य और बौद्धिक जगत की अनेक हस्तियां उपस्थित रहीं।







