जी के चक्रवर्ती
इस वर्ष 2020 में पद्मश्री पुरस्कार पाने वालों में कई नाम ऐसे थे जो लोग बिल्कुल गुमनाम रहकर अपने ही स्तर से देश में एक बहुत बड़ा परिवर्तन लाने के लिये काम करते रहे। प्रति वर्ष पद्मश्री पुरस्कारों के माध्यम से हमारे देश के दुदुर हिस्से के एक कोने-कोने से अनेको ऐसे लोग निकल कर सामने आते हैं, जिन्हें किसी भी तरह की प्रसिद्धि पाने उनकी चाहत नही होती वल्कि ऐसे लोग सब से दूर रहकर देश और हमारे समाज का भला करने की इच्छा रख कर दिन रात उस दिशा में लगे रहते हैं।
उनके दिलो दिमाग मे कुछ ऐसा कर गुजरने का ऐसा जुनून सवार होता है कि उन्हें बस लोगों का परोपकार करने की ही लगी रहती है। ऐसे ही गुमनाम व्यक्तियों के नाम की सूची में एक नाम कर्नाटक की 72 वर्षीय बृद्ध पर्यावरणविद् एवं ‘जंगलों की एनसाइक्लोपीडिया’ कहे जाने वाली प्रसिद्ध तुलसी गौड़ा का नाम आता है।
गौड़ा का नाम एक सच्चे पर्यावरण संरक्षण करने वाली प्रहरी के रूप में लिया जाता है। उन्होंने शायद ही कभी सोचा होगा कि उनके ऐसा एक आदिवासी महिला जो पेड़-पौधे लगा कर उन्हें बचाने सींचने का काम करती रहती है यही काम एक दिन उन्हें पद्मश्री पुरस्कार दिलवाएगी।
तुलसी गौड़ा नाम की यह महिला जो कर्नाटक के होनाल्ली गांव में रहती हैं। उसने कभी स्कूल की शक्ल तक नहीं देखी और ना ही कभी कोई पुस्तक को देखा और नही जानती थी लेकिन प्रकृति से अटूट प्रेम एवं लगाव होने के कारण उन्हें पेड़-पौधों के विषय में आधचर्यजनक जानकारियां रखती है। उनके पास किसी भी तरह की कोई शैक्षणिक योग्यता नहीं होने के बावजूद उनका मात्र प्रकृति से लगाव के कारण उन्होंने दक्षिण भारत के इस इलाके के वन विभाग में नौकरी भी की है। वे एक आदिवासी समाज से संबंध रखने वाली महिला होने के कारण उनमे ‘जल, जंगल और जीवन’ को बचाने की संस्कृति आज भी विद्यमान है, लेकिन औद्योगिक विकास ने जहां एक तरफ आदिवासियों को विस्थापित कर दिया तो दूसरी तरफ आर्थिक लाभ के करण जंगलों की अंधाधुंध कटाई करते चले जाने से जंगल के जंगल उजड़ते चले गये इन उजड़े जंगलों की व्यथा प्राकृतिक आपदाओं के रूप में हमारे आपके समक्ष आती रहती है।
पद्मश्री सम्मान मिलने के बाद तुलसी गौड़ा की जिंदगी में कोई खास परिवर्तन हो या ना हो, पर अपने जज्बे से वह सबके जीवन में परिवर्तन लाने का जो क्रम उनके द्वारा लगातार जारी हैं उससे हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हम सभी जन-जन को पर्यावरण संरक्षण की दिशा बढ़ चढ़ कर धरातल पर इस कार्य करना चाहिये।







