राष्ट्रपिता और लालबहादुर शास्त्री दोनों ही हमारे देश की महान विभूतियां हैं

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गांधी संकल्प यात्रा:

महात्मा गांधी के जीवन में संकल्प और पदयात्रा को विशेष महत्व मिला था। वह संकल्प के धनी थे। त्यागपूर्ण जीवन का उन्होंने एक बार संकल्प लिया, तो फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। कठिन ध्येय मार्ग से कभी विचलित नहीं हुए। पदयात्रा के माध्यम से वह वह भारत के जनमानस से जुड़ना चाहते थे। उनकी एक सौ पचासवीं जयंती पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में गांधी संकल्प यात्रा की शुरुआत की।

लखनऊ में उन्होंने राष्ट्रपिता और पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री को श्रद्धांजलि अर्पित की। कहा कि दोनों हमारे देश की महान विभूतियां हैं। संयुक्त राष्ट्र में एक सत्र केवल महात्मा गांधी पर था। जिसमें अलग अलग देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने अपने विचार रखे। इसी सत्र में देश के प्रधानमंत्री ने भी ऐतिहासिक सम्बोधन दिया था। महात्मा गांधी की मान्यता केवल भारत की सीमा तक ही समिति नहीं थी बल्कि उनकी मान्यता पूरी दुनिया के लिए थी। कोई पद न लेना गांधी जी का संकल्प था। वह राष्ट्र समाज और मानवता के लिए जीवन भर चलते रहे। वह पद की श्रेणी से बहुत ऊपर थे। देश को आजाद कराने भी उनका संकल्प था। अहिंसा के बल पर उन्होंने यह लक्ष्य हासिल किया। आजादी के बाद उन्होंने आदर्श शासन व समाज की स्थापना का विचार दिया था। लखनऊ में उन्नीस सौ सत्रह में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ था।

इस अधिवेशन में बिहार के चम्पारण निवासी आर्यावत के राजकुमार शुक्ल गांधी से मिले और उनसे नील खेतिहरों के लिए लड़ने की अपील की। गांधी जी चम्पारण गए। वहां सत्याग्रह का प्रयोग किया। अंग्रेजों को सत्याग्रह के सामने झुकना पड़ा था। गांधी जी स्वच्छता को बहुत अहमियत देते थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के एकसौ पचासवीं जयंती पर देश को सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त बनाने का संकल्प व्यक्त किया था। यह संकल्प पूरा होगा।राजनाथ सिंह की इस पदयात्रा से लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया।

  • डॉ दिलीप अग्निहोत्री

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