23 फरवरी: मधुबाला की पुण्य तिथि पर विशेष
नई दिल्ली, 23 फरवरी 2019: मधुबाला का जन्म 14 फरवरी 1933 को हुआ था खूबसूरती की मल्लिका कही जाने वाली मधुबाला आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। ग्यारह भाई बहनों में वह पांचवी संतान थीं। मधुबाला अपने काम के प्रति काफी समर्पित थीं. वह कई बार भोजन त्याग कर एक मशीन की तरह काम करती थीं।
अब सही कहा जाये तो कोई उम्र होती है 36 साल दुनिया को अलविदा कहने की, लेकिन अगर तकदीर में यही हो तो कोई कर भी क्या सकता है। पता नहीं किस नामुराद घड़ी में मधुबाला के दिल मे एक सूराख हो गया था जो आखिरकार जान लेवा साबित हुआ और 23 फरवरी 1969 वह मनहूस तारीख थी जब बेशुमार चाहने वालों के दिलों को गोया चीरती हुई मधुबाला किसी नामालूम दुनिया में चली गईं।
उनमें बचपन से ही सिनेमा में काम करने की तमन्ना थी, जो आखिरकार पूरी हो गई। मुमताज ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत वर्ष 1942 की फिल्म ‘बसंत’ से की थी। यह काफी सफल फिल्म रही और इसके बाद इस खूबसूरत अदाकारा की लोगों के बीच पहचान बनने लगी।
मधुबाला के अभिनय को देखकर उस समय की जानी-मानी अभिनेत्री देविका रानी बहुत प्रभावित हुयी और उन्होंने मुमताज जेहान देहलवी को अपना नाम बदलकर ‘मधुबाला’ के नाम रखने की सलाह दी।
महज़ 14 साल की उम्र में उन्होंने राज कपूर के साथ फिल्म नील कमल में काम किया। इसके दो साल बाद मधुबाला ने बॉम्बे टॉकिज की फिल्म ‘महल’ में अभिनय किया और फिल्म की सफलता के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
मधुबाला ने उस समय के सफल अभिनेता अशोक कुमार, रहमान, दिलीप कुमार और देवानंद जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ काम किया । उन्होंने भारतीय सिनेमा को ‘फागुन’, ‘हावड़ा ब्रिज’, ‘काला पानी’ और ‘चलती का नाम गाड़ी’ जैसी सुपरहिट फिल्में दीं। मधुबाला को यूं तो लाखों चाहने वाले थे मगर उन्होंने अपना दिल दिलीप कुमार को दिया। उस समय दिलीप कुमार के चाहने वालों की कमी नहीं थी।
एक बार की बात है मुगले आजम की शूटिंग के दौरान बहुत ज्यादा तबियत खराब होने पर मधुबाला को पता चला कि उनके दिल में छेद है और वह ज्यादा दिनों तक जी नहीं पाएंगी। मधुबाला को पता था कि उनके साथ कई फिल्में कर चुके किशोर कुमार उनसे बहुत प्यार करते है, लेकिन दिलीप कुमार के प्यार में उन्होंने कभी इस ओर ध्यान ही नहीं दिया। लेकिन अब उन्हें किशोर कुमार के रूप में एक ऐसा आशिक दिखायी देने लगा जिसके सहारे वह और जी सकती थीं।
अदा पे नाज तो होता है सब हसीनों को
फ़जा को नाज है जिस पर वो है अदा तेरी
मधुबाला के लिए वक्त किसी सुपर सोनिक जेट की रफ्तार से बीता। फिल्मी सफर कब शुरू हुआ। कब उन्होंने कामयाबी और मकबूलियत की नई ऊंचाइयों को छुआ और फिर कब वक्त कई तरह के आजार के साथ उस मुकाम पर पहुंचा जहां उसे सालों साल बाद पहुंचना चाहिए था।
बतौर अदाकारा मधुबाला के बारे में कुछ कहने सुनने की जरूरत इसलिए नहीं है क्योंकि लोग सब कुछ जानते हैं। उन एक्ट्रेसेस की कमी नहीं है जिनमें खूबसूरती के साथ साथ अदाएं भी भरपूर हों लेकिन इस मामले में गालिबन मधुबाला को हर किसी पर शफकत हासिल थीं। कोई भूलने की बात है फ़िल्म हावड़ा ब्रिज में अशोक कुमार के साथ फिल्माया गीत-ये क्या कर डाला तूने ….
साल 1969 में मधुबाला ने फिल्म ‘फर्ज’ और ‘इश्क’ का निर्देशन करना चाहा, लेकिन यह फिल्म नहीं बन पाई. उन्होंने साल 1947 से 1964 तक लगभग 70 से अधिक फिल्मों में काम किया।. जिसमें ‘बसंत’, ‘फुलवारी’, ‘नील कमल’, ‘पराई आग’, ‘अमर प्रेम’, ‘महल’, ‘इम्तिहान’, ‘अपराधी’ आदि शामिल हैं।
फ़िल्म फागुन, महल, शीरीं फरहाद, चलती का नाम गाड़ी , काला पानी, मिस्टर एंड मिसेज 55 और भी कई फिल्में। बहरहाल सूची तब तक अधूरी है जब तक मुगल-ए-आजम को न शामिल किया जाए। और फिर क्या कहें। मधुबाला की तो दास्तां ही अधूरी रह गयी। मधुबाला 23 फरवरी 1969 को हमेशा के लिए इस दुनिया से चली गयी।







