Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Saturday, September 26
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»इंडिया

    संविधान सभा की बहस से संबंधित तथ्य

    ShagunBy ShagunJanuary 25, 2025Updated:January 25, 2025 इंडिया No Comments6 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 541
    डॉ राकेश कुमार आर्य 

    आज देश अपना 76वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान के लागू होने की तिथि है। उस दिन हमारे सनातन राष्ट्र भारतवर्ष ने अपने गणतंत्र का दिशा पथ निर्धारित किया था। सदियों तक लाखों – करोड़ों बलिदान देने के पश्चात जिस गणतंत्र के राष्ट्रपथ पर देश ने चलने का निर्णय लिया था, सचमुच वह बहुत ही त्याग, तपस्या और बलिदान के पश्चात मिले हुए क्षण थे।

    9 दिसंबर 1946 को भारत के संविधान के निर्माण के लिए संविधान सभा की पहली बैठक हुई। इस सभा की अध्यक्षता डॉ सच्चिदानंद सिन्हा द्वारा की गई थी। जबकि दो दिन बाद अर्थात 11 दिसंबर को संविधान सभा का स्थाई अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद को बनाया गया। 26 नवंबर 1949 तक 2 वर्ष 11 माह और 18 दिन में संविधान बनकर तैयार हुआ। इस दौरान कुल मिलाकर संविधान सभा ने 165 दिन अपनी विशेष बैठकें की। इन बैठकों के माध्यम से संविधान सभा के सदस्यों ने संविधान की एक-एक धारा पर खुलकर अपने विचार व्यक्त किये। 101 दिनों तक प्रत्येक खंड पर जमकर चर्चा हुई। संविधान देश के लिए किस प्रकार उपयोगी हो सकता है, किस धारा में कितना संशोधन अभी अपेक्षित है ? किस वर्ग का अभी तक शोषण होता रहा है और अब उसे किस प्रकार का संवैधानिक संरक्षण प्रदान कर अपना विकास करने के समुचित अवसर प्रदान किए जाएंगे ? इत्यादि बिंदुओं और धाराओं पर विस्तृत चर्चा हुई।

    संविधान सभा में सदस्यों ने कुल मिलाकर लगभग 36 लाख शब्द बोले थे। संविधान सभा में डॉ भीमराव अंबेडकर ने प्रत्येक धारा पर अपने विचार व्यक्त करने का कीर्तिमान स्थापित किया। उन्होंने संविधान निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था। विश्व के अन्य देशों के संवैधानिक प्राविधानों का उन्होंने विस्तृत अध्ययन किया था। यही कारण था कि संविधान सभा के वह एकमात्र ऐसे सदस्य थे, जिन्होंने सबसे अधिक शब्द बोले थे। वह संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे। यद्यपि उनका कार्य संविधान सभा द्वारा पारित किए गए प्रस्तावों या धाराओं का संग्रह करना और प्रस्तावित धाराओं का लेखन करना मात्र था, परंतु उन्होंने संविधान सभा में होने वाली चर्चाओं में भी जिस प्रकार बढ़ चढ़कर भाग लिया, उससे उनकी बौद्धिक प्रतिभा का सभी लोगों ने लोहा माना।

    मुस्लिम और ब्रिटिश राजशाही की तानाशाही ने जमकर लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन किया था। परिणामस्वरूप जब देश को स्वाधीनता प्राप्त हुई तो संविधान सभा में मौलिक अधिकारों पर 16 दिनों तक बहस कराई गई। इससे संविधान सभा के सदस्यों को मौलिक अधिकारों की स्थिति, स्थापना और उनके परिणामों पर चर्चा करने का पूरा अवसर प्राप्त हुआ। संविधान सभा की सामूहिक इच्छा थी कि भविष्य में वह दुर्दिन दोबारा लौटकर न आएं, जब लोगों के संवैधानिक मौलिक अधिकारों का हनन हो । इसके लिए संविधान को प्रत्येक दृष्टिकोण से न केवल लचीला बनाने का विचार किया गया अपितु उसे उन प्रावधानों के प्रति कठोर बनाने का भी प्रयास किया गया जिनसे देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन होना संभावित था।

    भारतीय संविधान सभा ने निर्णय लिया कि राज्य को लोक कल्याणकारी बनाए रखने के लिए कुछ नीति निर्देशक तत्वों का समायोजन भी किया जाए। वास्तव में ये नीति निर्देशक तत्व देश की सरकारों के पथ प्रदर्शक तत्व कहे जा सकते हैं। इनका उद्देश्य लोकशाही को लोकतंत्र के पवित्र पथ पर डाले रखकर उसे जन भावनाओं के अनुकूल बनाए रखना था। इतना सुंदर और उदार बनाना था कि भविष्य में लोक कल्याण के अपने पवित्र उद्देश्य से वह इधर-उधर होने के बारे में सोच भी ना पाए। राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों पर संविधान सभा ने 6 दिनों तक चर्चा की थी। एक-एक सदस्य ने अपने विचार व्यक्त किये और संविधान के प्रति सभी देशवासियों की श्रद्धा समान रूप से बनी रहे, इसके लिए संविधान को सर्वप्रिय बनाए रखने के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर संविधान सभा ने भरसक प्रयास किया। देश का कोई भी वर्ग या संप्रदाय संविधान नाम की पवित्र पुस्तक से शासित और अनुशासित होने में अपने आप को गौरवान्वित अनुभव करे, इसके लिए प्रत्येक वर्ग और संप्रदाय की भावनाओं का सम्मान करने का यथासंभव प्रयास किया गया।

    देश के नागरिकों की नागरिकता की अवधारणा पर भी संविधान सभा में प्रतिष्ठित सदस्यों ने खुलकर अपने विचार व्यक्त किए थे। इस पर भी पर्याप्त समय दिया गया था।

    जिन सदस्यों को प्रारूप समिति का सदस्य बनाया गया था, संविधान सभा में उनकी विशेष जिम्मेदारी थी। उन्हें प्रारूप समिति का सदस्य ही इसलिए बनाया गया था कि वह संविधानों के विषय में अन्य सदस्यों की अपेक्षा कुछ अधिक जानकारी रखते थे। उनकी बौद्धिक प्रतिभा की इसी विशिष्टता का सम्मान करते हुए उनसे यह अपेक्षा की जाती थी कि वह संविधान सभा में अन्य सदस्यों की अपेक्षा अधिक तार्किक और ठोस विचार प्रस्तुत करेंगे। यही कारण था कि प्रारूप समिति के सदस्य अन्य सदस्यों की अपेक्षा कुछ अधिक देर तक अपना सकारात्मक चिंतन संविधान की धाराओं पर खुलकर प्रस्तुत करते थे। अन्य सदस्यों के विचारों पर प्रारूप समिति के सदस्य अपनी प्रतिक्रिया देते थे। उन विचारों का तार्किक आधार पर सुधार करने का प्रयास करते थे और सुधरे हुए सुथरे विचारों को लिखने का कार्य भी करते थे। संविधान सभा में कल 15 महिला सदस्य थीं। उनमें से भी केवल 10 ने ही संविधान सभा की सक्रिय बहस में भाग लिया था। संविधान सभा की कुल बैठकों में होने वाली चर्चाओं के कुल दो प्रतिशत भाग में ही महिलाओं की सहभागिता रही थी। स्वतंत्रता सेनानी और कांग्रेस की सदस्य जी दुर्गाबाई ने महिला सदस्यों में सबसे अधिक शब्द बोलने का कीर्तिमान स्थापित किया था।

    संविधान सभा में नामित रियासतों के सदस्यों की तुलना में प्रति के सदस्यों ने बहस में अधिक सक्रिय भाग लिया था। जहां प्रांतीय सदस्यों ने लगभग 85 प्रतिशत चर्चाओं में अपना बहुमूल्य योगदान दिया, वहीं रियासतों के सदस्यों ने लगभग 6 प्रतिशत चर्चाओं में ही अपना योगदान दिया।

    यहां पर यह भी स्पष्ट करना आवश्यक है कि देश की स्वाधीनता के समय राज्य और रियासत में एक मौलिक अंतर था। वास्तव में यह मौलिक अंतर राज्य और रियासत के शासन प्राधिकार और स्थिति के आधार पर था। रियासतें स्थानीय शासकों द्वारा शासित स्वतंत्र इकाइयां थीं। वहीं राज्य ब्रिटिश शासन के अधीन थे। रियासतें ब्रिटिश भारत का हिस्सा नहीं थीं। ज्ञात रहे कि देश की स्वाधीनता के समय 20 रियासतें ऐसी थीं, जो आकार में ब्रिटेन और फ्रांस से भी बड़ी थीं अर्थात ब्रिटेन और फ्रांस से 20 गुणा भारत आजादी के समय स्वाधीन था।

    ( लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता हैं )

    Shagun

    Keep Reading

    यूपी समेत कई राज्यों में बारिश का अलर्ट, बंगाल की खाड़ी का डीप डिप्रेशन कमजोर होने लगा

    पांच शहरों में FSDA की बड़ी कार्रवाई, 7 रेस्तरां के लाइसेंस निलंबन की संस्तुति

    Anant Chaturdashi is on September 25; Lord Vishnu's 'Anant' (infinite) form will be worshipped.

    अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को, भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की होगी पूजा

    वामन द्वादशी आज: भगवान विष्णु के वामन अवतार की कथा, पूजा-विधि और महत्त्व

    Three-day-old baby elephant swept away by the waves; mother left writhing in distress on the shore; emotional reunion follows rescue.

    लहरों में बह गया तीन दिन का नन्हा हाथी, किनारे तड़पती रही मां; रेस्क्यू के बाद हुआ भावुक मिलन

    Lucknow Ganesh Visarjan

    ढोल-नगाड़ों के बीच निकली गणपति विसर्जन शोभायात्रा, उमड़े श्रद्धालु

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts

    Funded Trader Markets के रिवॉर्ड्स ने पार किया USD 7.4 मिलियन का आंकड़ा, हर पेआउट का पब्लिक लेजर उपलब्ध

    September 25, 2026
    Vijay’s Story vs. Rajveer’s Investigation: A Powerful Clash Awaits in ‘Drishyam: The Conclusion’

    ‘आक्रोश’ के बाद फिर आमने-सामने अजय देवगन और जयदीप अहलावत

    September 24, 2026

    यूपी समेत कई राज्यों में बारिश का अलर्ट, बंगाल की खाड़ी का डीप डिप्रेशन कमजोर होने लगा

    September 24, 2026
    Euler Motors opens 15th showroom in Delhi-NCR; 122 outlets nationwide.

    ऑयलर मोटर्स ने दिल्ली-NCR में खोला 15वां शोरूम, देशभर में 122 आउटलेट्स

    September 24, 2026

    पांच शहरों में FSDA की बड़ी कार्रवाई, 7 रेस्तरां के लाइसेंस निलंबन की संस्तुति

    September 24, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading