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    चुनाव में व्यक्तिगत आरोपों का दौर कितना घातक!

    ShagunBy ShagunFebruary 4, 2022 Current Issues No Comments5 Mins Read
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    चुनाव की सरगर्मी बढ़ गई है। दल चुनाव प्रचार की मर्यादाओं को भूलने लगे हैं। व्यक्तिगत आरोप प्रत्यारोपों का दौर जारी है। चुनाव आयोग को चाहिए कि इस प्रकार की गंदी राजनीति पर अंकुश लगाए। लोगों को खुलेआम धमकियां मिल रही हैं। इससे तो लोकतंत्र पर लगातार खतरा बढ़ता जा रहा है। राजनेताओं को नहीं भूलना चाहिए कि चुनाव मात्र एक प्रक्रिया है जिससे चुनकर आए लोग देश को चलाने में अपनी अहम भूमिका निभाते हैं। राजनीति में जो सेवा भाव से आते हैं वह तो ठीक है पर कुछ लोग राजनीति में पैसा बनाने और अराजकता फैलाने का लक्ष्य लेकर आते हैं। इनका लक्ष्य देश  सेवा और राष्ट्र भक्ति न होकर अराजकता फैलाने का होता है। इनकी नियति ही दूषित होती है। देश में तमाम राजनीतिक दल हैं। जिनकी अपनी विचारधारा है। पर राष्ट्र भक्ति ,देश सेवा सभी का लक्ष्य होना चाहिए। चुनाव शांतिपूर्ण और निश्पक्ष हों, अराजक तत्वों पर अंकुश लगे यह चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है।
    आज भी लोग चुनाव आयुक्त श्री टी. एन. शेषन को याद करते हैं जिन्होंने चुनाव आयुक्त की शक्ति दिखाई । गुण्डे बदमाशों पर अंकुश लगाया। बिहार जैसे राज्य में जहां जंगल राज था , लालू की तूती बोलती थी। जहां हमेशा लालू और उसके समर्थक बूथ के बूथ लूट लेते थे। उन जैसे बदमाशों पर सख्त कदम उठाकर उन्होंने दिया कि चुनाव आयोग अगर चाहे तो अराजकत तत्वों से सख्ती से निपट सकता है। निश्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनावों ने गुण्डे बदमाशों की कमर तोड़ दी। लालू और लालू जैसे राजनेताओं को पैदलकर दिया था। आज भी चुनाव आयोग को शेषन जैसी सख्ती करके अराजकतत्वों से सख्ती से निपटना चाहिए। चुनाव की प्रक्रिया शुरू होते ही गुण्डे , बदमाश हरकत में आ गए और गंदी, भड़काऊ भाषा का प्रयोग करने लगे हैं । इन अराजकतत्वों को विभिन्न दलों का संरक्षण मिला हुआ है। चुनाव आयोग को ऐसे अराजकतत्वों पर सख्त से सख्त कार्यवाही करनी चाहिए। ऐसे अराजकतत्वों को जहां चुनाव हो रहा हो वहां से जिला बदर कर देना चाहिए।
    राष्ट्रीय टीवी चैनलों पर अमर्यादित बहसों पर रोक लगा देनी चाहिए। इससे भी माहौल खराब होता है। धमाचौकड़ी, पोस्टर बाजी, जुलूस, बड़ी बड़ी चुनाव सभाओं की अनुमति नहीं होनी चाहिए। जनता समझदार है, वह लोगों के किए गए काम पर अपना अमूल्य वोट देगी। टीवी चैनलों पर लोगों की जीतहार का विश्लेषण भी नहीं होना चाहिए। जनता जिसदल की विचारधारा को ठीक समझेगी उसे वोट देगी। इससे राजनेताओं में भी जनता की सेवा करने की प्रतियोगिता होगी, और उनका चाल चरित्र भी जनता के हित का होगा।
    उत्तर प्रदेश में चुनाव का माहौल कुछ ज्यादा ही गंभीर है। राजनीतिक दलों की भरमार है। दलबदलुओं ने माहौल को और गंभीर बना दिया है। गठबंधन की राजनीति चरम पर है। दलों के दलदल में राजनेता चकरघिन्नी हुए जा रहे हैं। जाति के आधार पर नए नए दल रोज बन रहे हैं। वह अपने लाभ हानि के गणित में उलझे हुए हैं। उनको अपना हित जहां दिखेगा वहीं बैठ जाएंगे। उनकी न कोई नीति है न विचारधारा है। अपना काम बनता ,भाड़ में जाए जनता। ऐसे दल मौसम विज्ञानी की तरह राजनीति में लाभ हानि की गणना करते रहते हैं।
    हारजीत से सबके सब चौकन्ने हैं। राजनीतिक दल सुविधाओं का पासा जनता पर फेंक रहे हैं। कोई बिजली मुफ्त का राग अलाप रहा है ,कोई मुफ्त पानी देने की बात कर रहा है। सुशासन देने की कोई बात नहीं करता है। तमाम दलों को विदशों से पैसा मिल रहा है। देश में अराजकता फैलाने के लिए, ऐसे दलों और लोगों से जनता को सावधान भी रहना है। सच है चुनाव में दिया एक गलत वोट , भविष्य के लिए आफत बन सकता है।
    राष्ट्र हित में काम करने वाले लोगों को जनता का प्यार मिलता है। पर मायावी राजनेता और दल जनता को सब्जबाग दिखाकर वोट पाने का लगातार प्रयास करते रहते हैं। ये गरीब जनता को बरगलाने की पूरी कोशिश करते हैं। जनता सब समझती है पर बोलती नहीं है। भाजपा और सपा पूरी शिद्दत से चुनाव मैदान में हैं। सरकार बनाने का दावा करते हैं। बसपा का अपना वोट बैंक है, वह भी सरकार बनाने का दावा करते हैं। कांग्रेस चुनाव में उत्साहित नहीं दिख रही है। यहां दिक्कत यह है कि कांग्रेस के नामीगिरामी नेता कांग्रेस को छोड़कर जा रहे हैं।कांग्रेस ने जिन्हें प्रत्याशी बनाया वह चुनाव ही नहीं लड़ना चाह रहे हैं । कांग्रेस अब बस सोनिया, राहुल, प्रियंका वाड्रा की जेबी संस्था बनकर रह गई है। जो राजनेता कांग्रेस में बचे हैं, वह भी किनारा करते जा रहे हैं। कांग्रेस का भविष्य उज्वल नहीं दिख रहा है। कांग्रेस को अब सोचना चाहिए कि कैसे कांग्रेस का उद्धार हो।
    चुनाव आयोग की सख्ती ही चुनाव को सही दिशा में ले जाएगा। गुण्डे, बदमाशों पर सख्त कार्यवाही चुनाव को सही दिशा में ले जा सकती है। अराजकतत्व अराजकता फैलाने की फिराक में हैं। कुछ राजनीतिक दल ऐसे गुण्डे, बदमाशों को पालते हैं। उनसे भी शासन प्रशासन को सतर्क रहना पड़ेगा। सब ठीक ठाक हो गया तो इन्हें कौन पूंछेगा। उत्तर प्रदेश में सख्ती के कारण माफिया जेल में हैं। बहुतों ने उत्तर प्रदेश से किनारा कर लिया है। तमाम बदमाश एनकाउंटर में मारे गए हैं। ऐसे हालात में चुनाव और चुनाव प्रचार शांतिपूर्ण ढंग से होने की उम्मीद की जा सकती है।
    चुनाव में भड़काऊ भाषण पर रोक लगे। हिन्दू मुसलमान, पाकिस्तान, जिन्ना पर चुनाव में बहस नहीं होनी चाहिए। ऐसे तत्वों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए। चुनाव आयोग की सख्ती और सतर्क दिशानिर्देश चुनाव को कायदे से निपटा देंगे।
    अन्त में मेरी सभी से गुजारिश है कि लोकतंत्र को सफल बनाने के लिए सब सतर्क रहे।अराजकतत्वों के बहकावे न आएं। चुनाव को उत्सव के रूप में ले। जिससे चुनाव आयोग चुनाव को निश्पक्ष और शांतिपूर्ण सम्पन्न करा सके। – अंशुमान खरे 

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