नवेद शिकोह
पूरब की माटी अन्याय सह रही है। उसकी खुशबू से महकती फसल को काटने वाले क्या इस लहलहाती फसल को मरूस्थल बना देंगे ! कभी भोजपुरिया दिल की धड़कन कहे जाने वाले बालेश्वर को बहुत पहले ही भगवान ने बुला लिया था और मनोज तिवारी, रविकिशन और दिनेश यादव ‘निरहुआ’ जैस दिग्गज कलाकार भाजपा बुला लिए गये। इन नामचीन फनकारों में कोई संसद में बैठेगा, कोई मंत्री पद सुशोभित करेगा, कोई भाजपा अध्यक्ष बनकर मनोज तिवारी की तरह पार्टी की जिम्मेदारी संभालेगा।यानी भोजपुरिया कला के सारे सितारे भाजपा के आसमान पर चमकेंगे तो कौन नाचेगा, कौन गायेगा और कौन भोजपुरी फिल्मों में अपने अभिनय के जौहर दिखाकर इस इंडस्ट्री को दिन दूना रात चौगनी तरक्की दिलायेगा।
उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल की मिट्टी की खुश्बू सारी दुनिया में महकती है। पिछले ढाई दशकों से ना सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश और दुनिया को पूरब की कलात्मक हुनर का लोहा लेना पड़ा। दुनिया में टॉप टू कहे जाने वाली हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री चौदह-पंद्रह बरस पहले भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री की दमदार दस्तक से घबरा सा गयी थी। भोजपुरी संगीत और फिल्मों के दर्जनों सैटलाइट चैनलों की बाढ़ आ गयी। यूरोप देशों में भी पूरब के संगीत ने धूम मचा दी। गुआयना, फिजी, हॉलैंड जैसे देशों में भोजपुरी संगीत के कंसर्ट करोड़ों का बिजनेस करने लगे।

किसी जमाने में ढोल-मजीरा के साथ दूरदर्शन पर नजर आने वाले बालेश्वर ने भोजपुरी संगीत को ग्लोबल सफलता देने की शुरूआत की। भारतीय मूल के करोड़ों नागरिकों से छलकते यूरोप देशों में बलेश्वर की स्वरलहरियां गूंजने का सिलसिला ढाई दशक पहले ही शुरू हो चुका था। बालेश्वर नहीं रहे तो फिर मनोज तिवारी जैसे भोजपुरी गायिकी सम्राट नये अंदाज में उभरे। फिर भोजपुरी फिल्मों का दौर शुरू हुआ। जिसमें रविकिशन, मनोज तिवारी और दिनेश यादव ‘निरहुआ’ जैसे चंद नाम अपनी माटी की सुगंध को फिल्मों के माध्यम से दुनिया में फैलाने लगे।
लेकिन अब क्या होगा ! दशकों में एक स्टार पैदा होता है। पूरब की धरती पर तीन दशकों में ये तीन सितारों उभरे थे। अपनी कला को समर्पित इन कलाकारों की लोकप्रियता से आकर्षित सियासत ने पूर्वाचल की धरती की ये बेशकीमती फसल काट ली। पांच साल पहले दिल्ली से लोकसभा चुनाव जीतने वाले मनोज तिवारी दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष भी बन गये। संसद से लेकर सड़क तक सियासी पारी खेलने में उनकी कलात्मक गतिविधियां आउट हो गयीं। कांग्रेस के टिकट पर चुनाव हारने के बाद भोजपुरी फिल्मों के सुपर स्टार रविकशन भाजपा ज्वाइन करने के बाद राजनीति में पूरी तरह सक्रिय हो चुके हैं। अब वो भाजपा के टिकट से चुनाव लड़ने जा रहे है। रहे सहे भोजपुरी फिल्मों के सुपर स्टार और पूर्वांचल की धड़कन दिनेश यादव उर्फ निरहुआ ने भी सक्रिय राजनीति में कदम रख दिया। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के कभी करीबी रहे निरहुआ अब भाजपा के टिकट पर आजमगढ़ लोकसभा सीट से अखिलेश यादव के खिलाफ चुनाव लड़ने जा रहे हैं।
खैर जो भी हो जब सारे बड़े कलाकार राजनीति में सक्रिय हो जायेंगे तो जाहिर सी बात है पूरब की माटी मरुस्थल बन जायेगी। अपने चहेते कलाकारों को चुनाव में खड़ा देख पूर्वांचल के मन में एक सवाल कौंध सकता है। सभी बड़े और स्थापित भोजपुरिया कलाकार राजनीति में सक्रिय हो जायेंगे तो कौन नाचेगा.. कौन भोजपुरी संगीत को आगे बढायेगा और कौन क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों को विश्व पटल पर स्थान दिलवायेगा !
मनोज तिवारी सियासत में सक्रिय होने के बाद अपनी कला सेवा के लिए समय नहीं निकाल पाते। आपको याद होगा कुछ महीने पहले का वाकिया है। बतौर सांसद और दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी एक कॉलेज के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे। डायस पर आये तो कालेज की शिक्षिका ने उनसे भोजपुरी गीत का मुखड़ा गुनगुनाने का आग्रह कर दिया। मनोज तिलमिला गये। बोले- मैं जनप्रतिनिधि हूं। सांसद हूं। मैं गाना गाऊंगा ! कालेज कमेटी को आदेश देते हुए बोले कि इस शिक्षिका के खिलाफ तुरंत कार्यवाही की जाये।
अब बताइये ऐसी स्थिति-परिस्थिति में पूरब के वोटर अपने लोकप्रिय कलाकारों को वोट देकर अपनी माटी की कला के पैर पर खुद कुल्हाड़ी क्यों मारेंगे !
दिनेश यादव और रविकिशन सांसद-मंत्री हो गये तो क्या फिर आने वाली भोजपुरी फिल्मों में हम उनके अभिनय के जौहर देख पायेंगे ! हरगिज नहीं।
यूपी में सपा-बसपा गठबंधन को खतरा मान भाजपा सबसे बड़े इस सूबे में अपने अस्तित्व को बचाने में हर सियासी हथियार को आज़मा रही है। हेमामालिनी से लेकर जयाप्रदा और पूर्वांचल के सभी लोकप्रिय कलाकारों के जरिए चुनावी वैतरणी पार करने की भरपूर कोशिश की जा रही है।
पूर्वांचल(भोजपुरी) के लगभग सभी मशहूर कलाकारों को भाजपा अपने पाले में ले चुकी थी। दिनेश यादव निरहुआ ही छूटे हुए थे। बताया जाता है कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के करीबी निरहुआ सपा से टिकट चाहते थे। उन्होने इस संबंध में बात करने के लिए सपा अध्यक्ष से मिलने की कोशिश की। किंतु अखिलेश यादव ने उन्हें टिकट तो दूर मिलने का समय भी नहीं दिया। क्योंकि सपा अध्यक्ष बसपा सुप्रीमों मायावती के मार्गदर्शन में अपने फैसले ले रहे हैं।और मायावती को फिल्मी कलाकारों को टिकट देना पसंद नहीं हैं।
जिसका नतीजा ये हुआ कि भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कभी हमपेशा रहे निरहुआ को लपक कर भाजपा में शामिल करवा दिया। दिनेश यादव को लोकसभा चुनाव का टिकट देकर उनकी ख्वाहिश भी पूरी कर दी गयी।
एक जमाना था जब उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में सपा का एकक्षत्र जनाधार था। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव यहां के कलाकारों को संरक्षण और सहयोग देते रहे। भोजपुरी संगीत के सम्राट बालेश्वर को मुलायम सरकार ने यूपी का पहला यशभारती पुरस्कार दिया था। भोजपुरी अभिनेता निरहुआ को अखिलेश सरकार में यशभारती पुरस्कार देकर पूरब की कला को प्रोत्साहित किया गया। किंतु सपा से टिकट किसी कलाकार को नहीं दिया गया। बरसों पहले मैंने बालेश्वर का साक्षात्कार किया था।
भोजपुरी गायक बालेश्वर ने बताया था कि एक बार उन्होंने मुलायम सिंह से मजाक ही मजाक मे कहा- नेता जी मुझे भी चुनाव लड़वा दीजिए। मुलायम बोले- इस बात में कोई शक नहीं कि आप जैसे लोकप्रिय कलाकर अपने क्षेत्र में जीत जायेंगे। आप बड़े से बड़े दिग्गज राजनेता को चुनाव हरा सकते हैं। लेकिन हम समाजवादी आपकी लोकप्रियता भुनाकर कला के साथ अन्याय करके सफलता हासिल नहीं करेंगे। आप जैसे कलाकार अपनी कला के क्षेत्र में कलासेवा करें। हमारी सरकार आपको प्रोत्साहित करेगी। सहयोग देगी। मुलायम ने कहा जनता का मनोरंजन करने के साथ देश की कला संस्कृति की रक्षा करना आपका मुख्य दायित्व हैं।
हांलाकि मुलायम सिंह की ये नसीहत उनकी ही पार्टी में लागू नहीं हुई। फिल्मी सितारों-कलाकारों की लोकप्रियता को यूपी के चुनावों में भुनाने की परंपरा को सपा ने आगे बढ़ाया। उन दिनों सपा में टॉप टू पोजीशन मे रहे अमर सिंह की इसमें मुख्य भूमिका थी।
फिल्म निर्माता मुजफ्फर अली, अभिनेता राजबब्बर, संजय दत्त, नफीसा अली, जयाप्रदा जैसे दर्जनों कलाकारों को सपा अपनी पार्टी से टिकट दे चुकी है। कांग्रेस भी कलाकारों की लोकप्रियता भुनाने में पीछे नहीं रही। बस बहुजन समाज पार्टी ने आज तक किसी कलाकार को चुनाव नहीं लड़वाया है। क्योंकि लोकप्रिय कलाकार कभी पैसा देकर टिकट हासिल नहीं करते।







