सुधारों से बढा आजादी का उत्साह

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डॉ दिलीप अग्निहोत्री
स्वतंत्रता दिवस का प्रत्येक समारोह गरिमापूर्ण होता है। पूरा देश इसमें उत्साह के साथ सम्मलित होता है। यह हमारी राष्ट्रीय परम्परा है। लेकिन इस बार का पन्द्रह अगस्त विशेष कहा जा सकता है। यह कहना गलत नहीं होगा कि इसकी तैयारी कुछ दिन नहीं बल्कि कई महीनों से चल रही थी। पन्द्रह अगस्त से पहले तीन महत्वपूर्ण कार्य हुए। एक तो भारत ने चंद्रयान छोड़ा। इसने पूरे विश्व में स्वतंत्र भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी। भारत दुनिया के शीर्ष देशों में शुमार हुआ। इस उपलब्धि के एक हफ्ते बाद ही हमारी संसद ने एक बार मे तीन तलाक देने पर रोक का विधेयक पारित कर दिया। इससे भारत की मुस्लिम महिलाओं को इस कुप्रथा से आजादी मिली। विश्व के अनेक मुल्क तीन तलाक को पहले ही प्रतिबंधित कर चुके थे। यह कार्य नरेंद्र मोदी सरकार ने पूरा किया।
 मुस्लिम महिलाओं को न्याय मिलने के अगले हफ्ते ही जम्मू कश्मीर को अलगाववादी और विकास विरोधी अनुच्छेद से आजादी दिलाई गई। स्वतंत्रता दिवस को प्रतिवर्ष उत्साह के साथ मनाने के पीछे बड़ा उद्देश्य होता है। एक तो यह देश का राष्ट्रीय पर्व है। इस दिन हमारा देश आजाद हुआ था। इसलिए राष्ट्रीय पर्व को पूरे उत्साह के साथ मनाना हम लोगों का राष्ट्रीय, नैतिक और संवैधानिक कर्तव्य है।
इस राष्ट्रीय पर्व को मनाने का दूसरा उद्देश्य यह है कि इस दिन हम लोग अपने महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का स्मरण करें और उनके जीवन से प्रेरणा लें। यह भी हमारे और देश के लिए जरूरी है। क्योंकि हमारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने बहुत संघर्ष के बाद यह आजादी दिलाई है। इस आजादी को सुरक्षित रखना, और देश के विकास में अपना योगदान देना, यह सब वर्तमान पीढ़ी को करना है। आज के दिन हमको स्वतंत्रता संग्राम पर भी विचार करना चाहिए। देश का पहला स्वतंत्रता संग्राम अठारह सौ सत्तर में हुआ था। लेकिन उसमें भारत के भीतर ही फुट थी, कुछ लोग अंग्रेजो का साथ दे रहे थे। इसलिए भारत का यह संग्राम सफल नहीं हुआ। अंग्रेजो को फुट डालो और राज करो कि नीति बनाने का मौका मिला।
उन्होंने इसी के बल पर भारत पर इतने समय तक राज किया। लेकिन जब भारत ने असहयोग आंदोलन अर्थात नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट सविनय अवज्ञा आंदोलन अर्थात सिविल डिस ओबीडीएन्स मूवमेंट और भारत छोड़ो आंदोलन अर्थात क्यूट इंडिया मूवमेंट के माध्यम से राष्ट्रीय एकता का सन्देश दिया,  अहिंसक आंदोलन किया, तब अंग्रेजो को भारत छोड़कर जाना पड़ा। केवल इन बातों से ही हमको सबक मिलता है। वह यह कि हम लोग एकता की भावना से रहेंगे तो देश का भला होगा, देश मजबूत बनेगा यदि हमलोगों के बीच नफरत होगी तो देश कमजोर होगा। इसलिए आज के दिन हमको देश के हित  में कार्य करने का संकल्प लेना चाहिए।
तीन सौ सत्तर को हटाने का  निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है। पाक अधिकृत कश्मीर तक हमारी सुरक्षा व्यवस्था पहले के मुकाबले ज्यादा सुदृढ होगी। सैन्य गतिविधियों के लिए ढांचागत निर्माण संभव होगा। फिलहाल गिलगिट पाक अधिकृत कश्मीर में है। यह क्षेत्र सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यहां पांच देशों भारत, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, तजाकिस्तान व चीन की सीमा मिलती है। इसलिए हिंदुकुश पर्वत अर्थात गिलगित बाल्टिस्तान का इलाका बहुत संवेदनशील है। इसी इलाके से मध्यकाल में विदेशी आक्रांताओं के आक्रमण होते थे। सड़क मार्ग से यह विश्व के अधिकांश देशों से जुड़ा है। विदेशी आक्रांता इसी का लाभ उठाते थे। हिमालय के दस शीर्ष शिखर में से आठ यहीं है। तिब्बत पर चीन का कब्जा होने के बाद  पानी के वैकल्पिक स्त्रोत यहीं पर है। यूरेनियम और सोने की दृष्टि से भी यह समृद्ध है।
अमित शाह ने ठीक कहा कि पाक अधिकृत कश्मीर भी भारत का है। जम्मू कश्मीर पर तो कोई विवाद ही नहीं था। तीन सौ सत्तर और पैंतीस ए के कारण यह विवादित दिखाई दे रहा था। अब इसको हटा दिया गया है। अलगाव की बाधा दूर हुई है। अब जम्मू-कश्मीर में देश के अन्य राज्यों के लोग भी जमीन लेकर बस सकेंगे, कश्मीर का अब अलग झंडा नहीं होगा,अलग संविधान नहीं होगा, दोहरी नागरिकता समाप्त हो जाएगी,जम्मू-कश्मीर की लड़कियों को अब  दूसरे राज्य के पुरुष से शादी करने पर उनकी नागरिकता खत्म नहीं होगी, जम्मू कश्मीर सरकार का कार्यकाल अब छह साल का नहीं, बल्कि पांच वर्ष का ही होगा,भारत का कोई भी नागरिक अब जम्मू कश्मीर में नौकरी भी कर सकेगा, यहां के लोग अब शिक्षा के अधिकार, सूचना के अधिकार जैसे भारत के हर कानून का लाभ उठा सकेंगे,केंद्र सरकार की कैग जैसी संस्था अब जम्मू-कश्मीर में ऑडिट कर सकेगी, सुप्रीम कोर्ट का हर फैसला लागू होगा, महिलाओं को पर्सनल कानून से आजादी मिलेगी।
जाहिर है कि इस बार पन्द्रह अगस्त के पहले देश में इस बार अनेक अभूतपूर्व कार्य हुए है। इनसे आजादी का समारोह संवर गया।

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