पीओके में लोगों की जगी पाकिस्तान से आजादी की उम्मीद

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लोगों ने भारत पर जताया भरोसा: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के द्वारा दिए गए बयान के बाद पीओके को लेकर उम्मीद जगी

नई दिल्ली,23 अगस्त 2019: क्या वास्तव में कुछ बड़ा होने वाला है फिलहाल संकेत तो यही मिल रहे हैं बता दें कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर यानि पीओके को लेकर दिए गए कड़े बयान के बाद एलओसी पार रह रहे विभाजित परिवारों में आजादी की उम्मीद जगी है, जो लंबे अरसे से पाकिस्तान के कब्जे से आजादी के लिए आवाज उठाते आए हैं।

यह बात मूलत: एलओसी के जिला पुंछ के रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार एवं जम्मू से प्रकाशित दैनिक उर्दू तसकीन के संपादक सुहैल काजमी ने इस संवाददाता से कही है। काजमी का कहना है कि 1947 के बंटवारे और फिर 1971 की जंग के दौरान एलओसी के जिला राजौरी व पुंछ से जो लोग सरहद पार चले गए थे, वह सब पाकिस्तान से आजादी चाहते हैं।

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 व 35ए को हटाने का गत दिनों एक अहम फैसला लिया था। इस बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दो टूक कहा कि अब पीओके पर बातचीत होगी। पीओके का समूचा इलाका अविभाजित जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है, जिस पर पाकिस्तान ने कब्जा कर रखा है। पाकिस्तान के इस कब्जे वाले हिस्से का दौरा कर चुके वरिष्ठ पत्रकार सुहैल काजमी ने बताया कि वहां के स्थानीय नागरिक पाकिस्तान से आजादी को लेकर दशकों से आंदोलनरत हैं।

मोदी सरकार को पाकिस्तान के कब्जे वाले हिस्सों को भी मुक्त कराने का एक अहम कदम उठाना चाहिए: जम्मू से प्रकाशित दैनिक उर्दू तसकीन के संपादक सुहैल काजमी

उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पीओके को लेकर दिए गए बयान से पाकिस्तान के भीतर आजादी समर्थकों का मनोबल बढ़ा है। यहां तक कि पाकिस्तान के कब्जे वाले नार्दर्न एरिया में रह रहे जनजातियों के अलावा अन्य लोग भी आजादी की मांग को लेकर लगातार आवाज उठाते आ रहे हैं, जबकि इन लोगों के आंदोलन को कुचलने के लिए पाकिस्तानी व रेंजर्स भयावह अत्याचार करते रहते हैं।

काजमी का कहना है कि गिलगित में दौरे के दौरान उन्हें भारी तादाद में स्थानीय नागरिकों ने पाकिस्तान से मुक्त करने की फरियाद की।पीओके में पाकिस्तान से आजादी को लेकर उठ रही आवाजों का विस्तारपूर्वक उल्लेख नई दिल्ली के एक अग्रणी प्रकाशक डायमंड बुक्स ने अंग्रेजी में प्रकाशित पुस्तक ‘‘एन एनकाउंटर विद पाकिस्तान रियल्टी’ में किया है। इस पुस्तक के लेखक भी पाकिस्तान के गैर-कानूनी कब्जे वाले इन तमाम इलाकों का दौरा कर चुके हैं।

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