कार्यसमिति ने राहुल गांधी का इस्तीफा किया स्वीकार
नई दिल्ली,11 अगस्त 2019: कांग्रेस में मची उथल- पुथल के बीच आखिरकार शनिवार देर रात फैसला हो गया और कांग्रेस को यूपीए चेयरपर्सन एवं पार्टी की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के रूप में तकरीबन ढाई महीने बाद अध्यक्ष मिल ही गया। पार्टी ने उम्मीद जताई कि इस मुश्किल घड़ी में पार्टी में नई जान फूंकने में सोनिया सक्षम हैं, ऐसा वह पहले भी कर चुकी हैं।
पार्टी की कार्यसमिति की दो सत्रों में शनिवार को हुई बैठक में सोनिया गांधी को सर्वसम्मति से कांग्रेस का अंतरिम अध्यक्ष चुन लिया गया। वह राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने से पहले तक पार्टी की पूर्ण अध्यक्ष थीं। पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और पार्टी के मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने कार्यसमिति की बैठक के बाद संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में बताया कि सुबह से कार्यसमिति की दो बार हुई बैठक में अध्यक्ष के चयन के लिए गहन मंत्रणा हुई।
प्रदेश अध्यक्षों, प्रभारी महासचिवों, प्रदेश नेताओं, वरिष्ठ नेताओं, विधायक दल के नेताओं, लोकसभा तथा राज्य सभा के सांसदों से विचार विमर्श के बाद कार्यसमिति ने सर्वसम्मति से राहुल गांधी से अपना इस्तीफा वापस लेने का अनुरोध किया। राहुल गांधी ने यह कहते हुए अनुरोध को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि जवाबदेही और जिम्मेदारी की पहली कड़ी उनसे शुरू होनी चाहिए, इसलिए वह अब अध्यक्ष बनना नहीं चाहते। इसके बाद कार्यसमिति ने गहन चिंतन-मनन के बाद अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अधिवेशन तक सोनिया गांधी को सर्वसम्मति से अंतरिम अध्यक्ष बनाया।
कार्यसमिति के इस अनुरोध को सोनिया ने स्वीकार कर लिया है। कार्यसमिति ने राहुल गांधी का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।उन्होंने बताया कि कार्यसमिति ने अध्यक्ष के रूप की गई पार्टी के लिए राहुल गांधी की सेवाओं, कायरे को सराहा और उनके समर्पण की तारीफ की। पार्टी ने कहा कि राहुल गांधी हर वर्ग की आवाज के रूप में उभरे। उन्होंने बिना थके किसानों, दलितों, युवाओं, महिलाओं, गरीबों, पार्टी के करोड़ों कार्यकर्ताओं, छोटे कारोबारियों सहित सभी वर्ग के हितों के लिए लड़ाई लड़ी।







