शव को बरामद करने का कोई भी प्रयास भारत के लिए खतरनाक साबित होगा

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  • आदिवासी अधिकार संगठन ने कहा, इस तरह का प्रयास खतरनाक होगा
  • अगर सेंटीनल सदस्य किसी बाहरी बीमारी से ग्रस्त हो जाते हैं तो पूरे समुदाय के नष्ट होने की आशंका है

नई दिल्ली, 29 नवंबर 2018: अंडमान के उत्तरी सेंटेनियल दीप पर बसे सबसे खतरनाक आदिवासियों के हाथों मारे गए अमेरिकी नागरिक जान एलेन चाउ के शव का फिलहाल अभी तक कुछ नहीं पता चल पाया है ऐसे में आदिवासी समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए काम करने वाले एक समूह ने कहा है कि भारत को अंडमान निकोबार द्वीप समूह के एक संरक्षित आदिवासी समुदाय के सदस्यों द्वारा मारे गए अमेरिकी नागरिक का शव खोजने के उसके खतरनाक प्रयास रोक देने चाहिए।

बता दें कि सेंटीनल आदिवासियों ने 17 नवंबर को अमेरिकी नागरिक जॉन एलेन चाऊ (27) को उस समय मार दिया था जब चाऊ ने कथित रूप से मछुआरों को धन देकर उत्तरी सेंटीनल द्वीप पर घुसने का प्रयास किया था। इस द्वीप पर बाहरी लोगों के प्रवेश पर पाबंदी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मछुआरों ने भारतीय अधिकारियों को बताया था कि उन्होंने सेंटीनल आदिवासियों को समुद्र तट पर चाऊ के शव को जलाते हुए देखा था। अधिकारी इस द्वीप से उसका शव निकालने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन उन्होंने द्वीप पर कदम नहीं रखा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार लंदन के समूह ’सर्वाइवल इंटरनेशनल‘ ने कहा, शव को बरामद करने का कोई भी प्रयास भारतीय अधिकारियों और सेंटीनल दोनों के लिए खतरनाक होगा। दरअसल, अगर सेंटीनल समुदाय किसी बाहरी बीमारी से ग्रस्त हो जाता है तो उसके खत्म होने की आशंका रहती है।

इस संगठन के निदेशक स्टीफन कॉरी ने सोमवार को कहा, हम भारतीय अधिकारियों से जॉन एलेन चाऊ के शव को बरामद करने के प्रयास रोकने का अनुरोध करते हैं। इस तरह का कोई भी प्रयास भारतीय अधिकारियों और सेंटीनल दोनों के लिए अतिशय खतरनाक होगा क्योंकि अगर सेंटीनल सदस्य किसी बाहरी बीमारी से ग्रस्त हो जाते हैं तो पूरे समुदाय के नष्ट होने की आशंका है।

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