- केन्द्र सरकार बना रही है नया प्लान
- मोदी सरकार करेगी अनुबंध वाले कर्मचारियों को भी खुश करने की कोशिश, प्राइवेट क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारियों को बड़ा तोहफा देने की तैयारी
नई दिल्ली, 18 नवंबर 2018: मोदी सरकार आगामी लोकसभा चुनाव से पहले देश की निजी कंपनियों में कार्यरत करोड़ों कर्मचारियों को बड़ा तोहफा देने की तैयारी में है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि सरकार प्राइवेट क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की ग्रेच्युटी की समय सीमा को पांच साल से से कम कर तीन साल करने पर काम कर रही है। सरकार की कोशिश है कि कर्मचारियों को यह सौगात इस वर्ष के अंत तक मिलना शुरू हो जाए।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अभी जो नियम है उसके तहत पांच वर्ष की सेवा करने के बाद ही कर्मचारी ग्रेच्युटी का हकदार होता है। अब नए नियमों के द्वारा सरकार इस समय सीमा को पांच से घटाकर तीन वर्ष करने जा रही है। सूत्रों की माने तो श्रम मंत्रालय ने इस सबंध में उद्योग क्षेत्र से राय मांगी है। मंत्रालय यह जानना चाहता है कि यदि यह नियम बनाए गए तो तो उद्योग जगत पर उसका क्या असर पड़ेगा और इसे लागू करने पर कंपनियों के समाने क्या दिक्कत आ सकती है।
सूत्रों के अनुसार इस प्रस्ताव को सेंट्रल बोर्ड आफ ट्रस्टीज के बोर्ड के सामने रखा जाएगा। इतना ही नहीं सरकार ग्रेच्युटी की गणना के तौर तरीके बदलने पर भी विचार कर रही है। सूत्रों के अनुसार प्राइवेट क्षेत्र में अनुबंध पर काम करने वाले कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का लाभ दिलाने के तौर तरीकों पर भी विचार किया जा रहा है। देश भर की श्रमिक यूनियनों की ये मांग काफी दिनो से है।
सूत्रों की माने तो मोदी सरकार चुनावी माहौल में निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को खुश करने की दिशा में काफी गंभीर है और सब कुछ ठीक रहा तो साल के अंत तक या फिर नये साल से लागू किए जा सकते हैं।
अनुबंध वाले कर्मचारियों के मामले में भले ही कर्मचारी का टर्म पांच साल से कम क्यों न हो उन्हें भी स्थायी कर्मचारी की तरह ग्रेच्युटी का लाभ दिलाने की तैयारी में सरकार है। ऐसे कर्मचारियों के लिए जिस फामरूले पर काम चल रहा है उसके अनुसार उन्हें आनुपातिक रूप से ग्रेच्युटी का लाभ देने पर मंथन किया जा रहा है। अनुबंध के मामले में यदि जरूरत पड़ी तो नियमों में बदलाव के बारे में भी गंभीरतापूर्वक विचार विमर्श चल रहा है।







