अयोध्या में भूमि पूजन और देश में दिवाली

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डॉ दिलीप अग्निहोत्री

आज पांच अगस्त को पांच सदियों का सपना साकार हुआ। श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण हेतु भूमि पूजन हुआ। तीन दशक पहले अयोध्या से संकल्प लेकर गए नरेंद्र मोदी भूमि पूजन में सहभागी बने। तब उन्होंने कहा था कि अब वह मंदिर निर्माण के भूमि पूजन पर ही अयोध्या आएंगे। यह संकल्प आज पूरा हुआ।

इस अवसर पर उन्होंने इस आंदोलन से जुड़े लोगों के प्रति सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने प्रभु राम की विश्व व्यापी महिमा का उल्लेख किया। कहा कि विश्व की सर्वाधिक मुस्लिम जनसंख्या वाले इंडोनेशिया सहित दुनिया में कई ऐसे देश हैं जो भगवान राम के नाम का वंदन करते हैं। राम मंदिर को भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत का प्रतीक है। रामायण दुनिया के अनेक देशों में लोकप्रिय है। इसमें संदेह नहीं कि श्री राम मंदिर निर्माण हेतु भूमि पूजन देश के लिए एक परम गौरवशाली क्षण रहा। इस राष्ट्रीय गौरव कभी धूमिल नहीं हो सकता है। पांच सदियों का सपना साकार हुआ। विदेशी आक्रांता बाबर की सेना ने इसका विध्वंश किया था। तभी से राष्ट्रीय अस्मिता के प्रतीक भगवान राम का मंदिर बनाने के लिए हिंदू समाज ने निरंतर संघर्ष किए हैं।

उन्नीस सौ चौरासी में प्रारंभ हुआ जनभूमि मुक्ति आंदोलन निर्णायक साबित हुआ। उसमें तीन लाख से अधिक गांवों की सहभागिता के साथ सोलह करोड़ राम भक्तों ने सक्रिय रूप में भाग लिया था। इसके साथ ही प्रायः पूरा हिन्दू समाज भावनात्मक रूप में मंदिर आंदोलन से जुड़ा था। गत वर्ष सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय देने तक यह संघर्ष निरंतर चलता रहा। विश्व हिंदू परिषद का विचार है कि इस अद्वितीय अभियान का ही परिणाम था कि राष्ट्रीय शर्म का प्रतीक बाबरी ढांचा अब वहां नहीं है।

राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक भगवान श्री राम के भव्य मंदिर निर्माण का संकल्प एक एक कदम आगे बढ़ते हुए साकार हो रहा है। जन्मभूमि आंदोलन का इतिहास देश को आत्मग्लानि से आत्मविश्वास की ओर जाने वाली एक अद्भुत गौरव यात्रा है। लगभग एक हजार वर्षों तक विदेशी आक्रमणकारियों के विरुद्ध चले निरंतर संघर्ष के बाद हमने विजय प्राप्त की थी। परंतु छद्म धर्म निरपेक्षता की विभाजनकारी राजनीति ने देश के स्वाभिमान को कुंठित करने का प्रयास निरंतर किया। हिंदू समाज को न केवल काल्पनिक आधारों पर बांटा जा रहा था। अपितु हिंदुओं में एक हीन भावना का निर्माण भी किया जा रहा था। इस आंदोलन ने विभाजन की सभी रेखाओं को समाप्त कर दिया है।जाति,पंथ,भाषा क्षेत्र आदि से ऊपर उठकर हिंदू संगठित हुआ है।

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समाज में स्वाभिमान,आत्मविश्वास व राष्ट्रीय गौरव के विचार की आवश्यकता थी। राम मंदिर निर्माण से इसका जागरण हो रहा है। विभाजनकारी राजनीति करने वालों की मंशा पूरी नहीं हो सकती। वैश्विक मंच पर भारत एक महाशक्ति बन रहा है। विहिप के अनुसार राष्ट्रीयता का गौरव किसी भी देश के लिए एक महत्वपूर्ण प्रेरक तत्व होता है। तुष्टिकरण की सियासत इसी दिशा में चक रही थी। अब भारत की राष्ट्रीयता को किसी विदेशी आक्रांता से नहीं जोड़ा जा सकता।

राष्ट्र पुरुषों की प्रेरक गाथाएं ही इस को परिभाषित करती हैं। भगवान राम से बढ़कर राष्ट्रपुरुष कोई नही हो सकता। विहिप के संयुक्त महामंत्री ने यह भी कहा कि इस कल्याणकारी परिवर्तन की गति तेज होती जा रही है। भगवान राम के मंदिर का शीर्ष कलश स्थापित होने तक सभी विभाजनकारी तत्व पूर्ण रूप से निरर्थक व निष्तेज हो जाएंगे। आत्म गौरव स्वाभिमान तथा आत्मविश्वास से युक्त एक नए भारत का संकल्प साकार होगा।

नरेंद्र मोदी ने ठीक कहा कि राम मंदिर आंदोलन में अर्पण, तर्पण, संघर्ष व संकल्प था। जिनके त्याग, बलिदान और संघर्ष से आज ये स्वप्न साकार हो रहा है। उन्होंने उनको नमन किया जिनकी तपस्या राममंदिर में नींव की तरह जुड़ी हुई है।

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