मुश्किल घड़ी में भारतीय प्रवासियों के रियल महानायक!

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मदद के जलसे में ‘जलसे’ वाले प्रवासी बिग बी का जिक्र क्यों नहीं !

  • नवेद शिकोह

प्रवासी मजदूर ही नहीं होते। बड़े लोग भी प्रवासी होते हैं। सदी के महानायक अभिनेता बच्चन भी प्रवासी हैं। उन्होंने भी काम की तलाश में उत्तर प्रदेश का इलाहाबाद छोड़कर महाराष्ट्र के मुंबई को अपनी कर्मस्थली बनाया।

फिलहाल इन दिनों बिग बी जैसे पर्दे के महानायक के बजाय हकीकत के नायकों का जिक्र हो रहा है। कोरोना काल के जख्मों पर मरहम लगाते फर्ज और इंसानित पसंद लोगों की मदद के जलसे मे शामिल फरिश्तों की चर्चा हर रोज हो रही है। इत्तेफाक से ना जाने कहां से बच्चन साहब का जिक्र आ गया। हुआ यूं कि स्वर्ग की कल्पना की हकीकत की तस्वीरें आउट हो गयीं। ये तस्वीरें प्रवासी अमिताभ बच्चन के बंगले ‘जलसा’ की हैं, जो इन दिनों गूगल पर खूब देखी जा रही हैं।

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कोरोना काल के सबसे बड़े दर्द गरीब प्रवासी मजदूरों की चर्चा के बीच बच्चन परिवार के खूबसूरत महल जलसा की तस्वीरें आउट हुयीं तो इसका रिएक्शन कॉकटेल बन गया।

दौलतमंद अमिताभ बच्चन पर सवाल खड़े करते एक मीम में अमिताभ कहते हैं- मेरे पास, गाड़ी हैं बंगला है, जलसा है, फिल्में है, इज्जत है, दौलत है, शोहरत है, तुम्हारे पास क्या है !

सोनू सूद जवाब देते हैं- मेरे पास मदद की भावना है।

ये सच है कि कभी मुबंई की सियासत ने प्रवासियों को सताया था, उस वक्त महानायक अमिताभ बच्चन भी इसकी चपेट में आये थे। काम के लिए अपनी जन्मस्थली छोड़ने के दर्द को कुरेदने वाले दर्द से बिग बी भलीभांति वाक़िफ हैं। आज कुदरत ने और सरकार की लापरवाहियों ने प्रवासी मज़दूरों को जो दर्द दिये उसे देखकर पत्थर दिल भी पिघल गये। तमाम दौलतमंद सेलीब्रिटी भी प्रवासियों की मदद के लिए आगे आये। इसमें फिल्म अभिनेता सोनू सूद सुर्खियों मे हैं। हजारों परेशान प्रवासी मजदूरों को ये उनके घरों तक पंहुचाने का इंतजाम जिस शिद्दत से कर रहे हैं उसे देखकर देश-दुनिया सूद को सैल्यूट कर रही है। बॉलीवुड के पर्दे की दुनिया में भले ही अमिताभ बच्चन को सदी के महानायक का ख़िताब मिला हो पर आजकल कुछ लोग हकीकत की जमीन पर सोनू सूद को महानायक कह रहे हैं। ये मामूली अभिनेता फिल्मों में खलनायक की भूमिका में पर्दे पर अक्सर नजर आता है। लेकिन देश पर संकट के समय ये खलनायक महानायक के तौर पर तब उभरा जब लोगों ने देखा कि ये मुंबई से यूपी-बिहार जाने के लिए भूखे-प्यासे मजदूरों की मदद के लिए ये शख्स अपनी जमा पूंजी न्योछावर किये दे रहा है।

सूद ने ऐसी लकीर खीच दी कि फिल्म इंडस्ट्री के तमाम बड़े-बड़े दिग्गज और राष्ट्रवाद के बयानवीरों पर पर सवाल उठने लगे।

लोग सदी के महानायक अमिताभ बच्चन पर भी सवाल रहे हैं। कहा जा रहा है कि बतौर अभिनेता श्री बच्चन को इन देश ने सबसे ज्यादा प्यार दिया। इनका अभिनय पसंद किया। लम्बे दौर तक इनकी फिल्में पसंद करते रहे.. हिट करते रहे। आज बिग भी के पास सब कुछ है। काम, मान-सम्मान, मैन पॉवर, खुशहाल परिवार और बेपनाह दौलत। इनके विदेशों में बैंक एकाउंट और सम्पत्तियों का जिक्र भी अक्सर होता रहता है। बिग भी ने गुप्त दान-महादान किया हो तो वो अलग बात है। ऐसा हो तो बहुत अच्छी बात भी है। लेकिन अभी तक सदी के इस महानायक की जाहिरी तौर पर किसी मदद की तस्वीर सामने नहीं आयी। जबकि कोरोना काल में बिलखते गरीबों, बच्चों, बूढ़ों, महिलाओं को भूखा प्यासा तड़पता सब देख रहे हैं। सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलते गरीबों के पैरों के छाले जब फूटते हैं तो पत्थर दिल भी पसीजने लगते हैं। मामूली सा धन सम्पन्न व्यक्ति भी देश के इन गरीबों की मदद के लिए सामने आ रहा है। इसलिए अब हर बड़े धन सम्पन्न सेलिब्रिटी पर सब की नजर है।

तीन दशक तक अमिताभ बच्चन की फिल्मों को मजदूरों, प्रवासियों, रिक्शेवालों, कुलियों, ठेले वालों कामगारों जैसे गरीब मेहनतकशों ने हिट किया। अमिताभ को आम और गरीब भारतीय बेहद पसंद करता था। क्योंकि ये ऐसे किरदार निभाते थे जो आम या गरीब मेहनतकश की नुमाइंदगी करता था। अमिताभ के किरदार गरीब मेहनतकश को फर्श से अर्श पर पंहुच जाने के सपने भी दिखाते थे। बिग बी के सुपर हिट हो जाने के बाद भी अमिताभ इलीट क्लास के हीरो नहीं बन सके थे। शुरुआती कामयाबी के तीन दशक तक अमिताभ का स्टारडम मजदूरों, प्रवासियों, कुलियों, ठेले वालों, रिक्शे वालों, पान वालों.. इत्यादि गरीब आम मेहनतकशों तक सीमित था।

प्रवासी मजदूरों की मुसीबत का एक दौर वो भी था जब महाराष्ट्र में शिवसेना ने यूपी-बिहार के लोगों, प्रवासी मजदूरों-कामगारों को शिकार बनाया था। अमिताभ बच्चन खुद भी प्रवासी हैं। वो उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद के हैं। मुबंई में प्रवासियों के अपमान या तकलीफों को वो इस रुप में भी करीब से महसूस कर चुके होंगे। आज फिल्म इंडस्ट्री की सबसे बड़ी शख्सियत और सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के पास गाड़ी है, बंगला है, खुशहाल परिवार है, नाम है, काम है, सम्माना है, सपनों के स्वर्ग जैसा जलसा (बंगला) है..
बस नहीं दिख रही है तो वो है- मदद की भावना। आज मदद के जलसे में सोनू सूद जैसे अदना से अभिनेता महानायक कहला रहे हैं। और महानायक अमिताभ बच्चन ही इस जलसे से ग़ायब हैं।

पब्लिक डोमेन पर इस तरस की तमाम जुमले कसे जा रहे हैं। फिल्म इंडस्ट्री और राजनीति के उन बयानवीर सितारों पर भी तंज कसे जा रहे हैं जो अक्सर अपने को राष्ट्रवादी बयानवीर हैं, लेकिन इस कोरोना महामारी में राष्ट्र को बचाने की लड़ाई में कहीं नज़र नहीं आ रहे हैं। अनुपम खेर, सोनू निगम, कंगना रनोत, किरन खेर, मनोज तिवारी, रवि किशन, परेश रावत, हेमा मालिनी और सनी देआल जैसे फिल्म और सियासत के सितारों के सामने भी तमाम सवाल खड़े किये जा रहे हैं। – नवेद शिकोह

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