नवेद शिकोह
लखनऊ,13 जुलाई 2019: “जो पिता का नहीं हुआ वो किसी का नहीं हो सकता।”
सोशल मीडिया पर ऐसे जुमलों की बारिश करने वाले विधायक की पुत्री पर हमलावर हो रहे थे।
पुत्री के बचाव में पिता पर चढ़ाई करते हुए किसी ने जवाब में लिखा- “जो पुत्री का नहीं हुआ वो सरकार का क्या होगा।”
कौन पुत्री अपने पिता की मर्जी के खिलाफ जाना चाहेगी ! कोई नहीं। हां ऐसी बेटी अपने पिता के खिलाफ जरूर बगावत कर सकती है जिसका पिता अपनी जातिवादी.. ऊंच-नीच वाली सोच के आगे अपनी बेटी की खुशी, फैसले और प्यार को स्वीकार करने को राज़ी ना हो।
जो जनप्रतिनिधि बनने से पहले अपने भाषणों में जातिव्यवस्था मिटा देने की बात करता हो। जो उस पार्टी का नुमांदा हो जिसकी सरकार में अंतर्जातीय विवाह के प्रोत्साहन के लिए प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती हो।
पिता-पुत्री वाले इस वाकिए से सब वाकिफ हैं इसलिए नाम लिखकर किसी निजी विवाद की नुमायश करना मुनासिब नहीं। पर इसपर चर्चा को समाज की बानगी भर मानकर जातिवादी व्यवस्था पर फिक्र करना जरूरी है।
विधायक की बेटी ने अपनी मर्जी का दूल्हा चुना। व्यस्क सवर्ण लड़की ने दलित से शादी रचा ली तो हंगामा बरपा हो गया। विधायक की बेटी ने अपने एक वीडियो के माध्यम से अपने पिता के गुर्गों से जान का खतरा बताकर आरोप जड़े। पिता ने एक चिट्ठी में आरोपों को गलत बताया।
इन सबके बीच सोशल मीडिया इस बात की गवाह बन गयी कि हमारा पिछड़ापन कम नहीं हुआ बल्कि बढ़ा है। हम इतना पिछड़े हैं कि हम ऊंच-नीच, दलित-पिछड़े, सवर्ण और हिन्दू, मुसलमान के फेर में इंसान भी नहीं बन पा रहे हैं।
देश बदल रहा है, ये कहना झूठ है। सच ये है कि देश पिछड़ रहा है। देश बदल रहा होता तो बहुत सारी घटनाएं होना बंद हो जातीं। अंतर्जातीय और दूसरे धर्म में शादी करने वालों को मौत के घाट नहीं उतारा जाता। आनर किलिंग नहीं होती। सवर्ण पिता को दलित दामाद स्वीकार होता। मुस्लिम लड़की हिन्दू लड़के से शादी कर लेती तो ये परिवार मिलकर लड़के को मार-मार कर उसके टुकड़े नहीं कर देते। ( ऐसी एक दर्दनाक घटना घटित हुई थी।)
धर्म और जाति की नफरत वाली सोच बदलो फिर देश बदलेगा।
फिलहाल देश बदल नहीं रहा, पिछड़ रहा है।






