भारतीय संस्कृति की प्रासंगिकता

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राज्यपाल आनन्दी बेन पटेल की धार्मिक प्रसंगों में गहरी आस्था है। राज्यपाल बनने के कुछ समय बाद वह मॉरीसस की यात्रा पर गई थी। यहां प्रवासी घाट पर भारतीयों के पहुंचने की एक सौ पचासवीं जयंती पर आयोजित समारोह में वह मुख्यातिथि थी। यहां उन्होंने कहा था कि हमारे पूर्वज डेढ़ शताब्दी पहले यहां रामचरित मानस लेकर आये थे। इस विरासत ने आज तक यहां भारतीय संस्कृति को जीवन रखा है। इसके अलावा अयोध्या दीपोत्सव समारोह में भी वह सम्पूर्ण भक्तिभाव से सम्मलित हुई थी।

उन्होंने भाव विभोर होकर आरती की थी। पिछले दिनों गंगा यात्रा में भी उन्होंने धार्मिक आस्था का परिचय दिया था। लॉक डाउन के कारण वह विश्वविद्यालयों में ऑनलाइन परिचर्चा को प्रोत्साहन दे रही है। श्री राम कथा प्रसंग पर आयोजित ऐसी हो ऑनलाइन संगोष्ठी में उन्होंने धर्मिक मान्यता के अनुरूप विचार व्यक्त किये। आनन्दीबेन पटेल ने कहा कि राम हमारी आस्था और अस्मिता के प्रतीक हैं। वह निर्विकार है। इसलिए उन्हें किसी धर्म,जाति और वर्ग के नाम पर सीमित नहीं रखा जा सकता। धर्म वस्तुतः भगवान और मानव के बीच आस्था,विश्वास और श्रद्धा से परिपूर्ण रिश्ते को सुदृढ़ बनाये रखने का माध्यम है। सत्य के मार्ग का अनुसरण करते हुए भगवान,गाॅड,खुदा और वाहे गुरू तक पहुंचा जा सकता है।

इस ई-ल संगोष्ठी में रामकथा के मर्मज्ञ जगतगुरू रामानन्दाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य भी सम्मलित हुए। डाॅ राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय अयोध्या ने राम नाम अवलंबन एकू अंतर्राष्ट्रीय ई संगोष्ठी का आयोजन किया था। आनन्दी बेन पटेल ने कहा कि भारतीय लोक जीवन में राम सर्वत्र और सर्वदा प्रवाहमान महाऊर्जा के पर्याय हैं। राम का नाम केवल साधन नहीं अपितु वह साध्य भी है। जो बुराइयों के प्रभाव को नष्ट करता है। मानव मात्र को विपत्ति से मुक्ति प्रदान करता है। भारतीय संस्कृति प्रभु श्रीराम के जीवन मूल्यों से प्रकाशित आत्मबोध प्रदान करने वाली है। आध्यात्म को अपनाकर ही जीवन मूल्यों को सुरक्षित किया जा सकता है।

वसुधैव कुटुम्बकम की संकल्पना मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम से जुड़ी है। इसके अलावा राज्यपाल ने वर्तमान कोरोना आपदा के भी उल्लेख किया। कहा कि हमारे वेदों,पुराणों एवं उपनिषदों में विभिन्न बीमारियों के संबंध में अनेक प्रकार की जड़ी बूटी एवं पेड़-पौधों का जिक्र किया गया है। इसका उपयोग हमारे ऋषि मुनियों और राजवैद्य औषधि के रूप में करते थे। आज भी इन जड़ी बुटियों की प्रासंगिकता बनी हुई है। भारतीय परम्परागत ज्ञान में बीमारियों से बचाव के अनेक उपाय बताए गए हैं। लेकिन समय की जमी धूल ने उसे अदृश्य बना दिया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों को स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया है। साफ सफाई को अपनाकर निरोग रहा जा सकता है। संक्रमणों से बचाव के लिए सनातन धर्म में हाथ,पैर और मुख धोकर भोजन करने,दांतों से नाखून न काटने,दूसरों के स्नान के तौलिया का प्रयोग न करने आदि के जो नियम बताये गये हैं। उनका सभी को पालन करना चाहिए। स्पष्ट है कि राज्यपाल ने भारतीय संस्कृति व उसके जीवन मूल्यों का वर्तमान परिप्रेक्ष्य में उल्लेख किया। निसंदेह विश्व की यह सबसे प्राचीन संस्कृति आज भी प्रासंगिक है। क्योंकि इसमें उल्लखित दर्शन व विचार शास्वत है।डॉ दिलीप अग्निहोत्री

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