मदद ऐसी हो निज आत्मा को नाज हो

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निम्न मध्यवर्ग को संबल देने की बहुत जरूरत, हर समाज के लोगों से अपील अपने-अपने समाज के निम्न मध्यवर्गीय परिवारों का भी रखें ख्याल

विश्वव्यापी विपदा के वक्त एक अपील- रामप्रताप गुप्त
राष्ट्रीय संगठन मंत्री अखिल भारतीय कसौंधन वैश्य महासभा, Mob N. 9452085562

विश्व समेत अपने देश में भी जो विपदा की स्थिति आयी हुई है, स्वाभाविक है कि इससे वर्तमान समय में जो परेशानियाँ हैं उनका सामना तो करना ही पड़ेगा आगे भी करना पड़ेगा। सरकार कोविड-19 से बचाव के लिये समय-समय पर गाईडलाईन जारी कर रही है साथ ही इसके प्रभाव को रोकने के लिये लॉकडाउन का सीजन-2 भी लागू हो चुका है। सबके समक्ष बड़ी चुनौतियाँ हैं। मध्यम वर्गीय परिवारों, छोटे व्यापारियों, प्राईवेट कंपनियों पर कम सैलरी पे काम करने वाले लोग जो खुद की खुद्दारी के लिये इस वक्त भी गरीब कहलाने से कतरा रहे हैं, मदद की जरूरत है फिर भी हाथ फैलाना इनकी आदत में शुमार न था, इसलिये इस बुरे दौर का सबसे गहरा प्रभाव इन सब पर बहुत पड़ रहा है। इन तमाम वर्गों के लोगों का बजट भी महीने के हिसाब से चलता था, लेकिन दुर्भाग्य यहाँ ऐसा तांडव कर रहा है कि ये लोग किसी से कुछ भी कह नहीं सकते। इनमें से कई लोगों का रोजगार तो गया ही साथ ही भविष्य के लिये मानसिक तनाव के चलते बीमारियों का असर भी बढ़ रहा है।

 

सरकार गरीबों के लिये हर बजट में बहुत सी योजनाओं के तहत पैसा पास कर देती है और गरीबों को इसका आंशिक या पूर्णतः लाभ भी मिल जाता है। इस महामारी के चलते सरकार को अलग से भी एक बड़ा बजट पास करना पड़ा। भारत में लगभग सभी ने अपनी हैसियत के तहत दान भी खूब किया है और लगातार कर भी रही है। यानि जनता सरकार की मदद के लिये साथ खड़ी है साथ ही जनता स्वैच्छिक तरीके से भी जगह-जगह गरीबों की मदद कर रही है। मदद के रूप में पैसों व जरूरत के सामानों का वितरण का एक स्वस्थ व संगठित तरीके से हो तो शायद सभी को सही लाभ मिल सके। पर हम सब अतिसंवेदनशील होकर जल्दबाजी में व गैर संगठित तरीके से मदद को लगे हुए हैं। जरूर इसका लाभ तो वंचितों को व पीड़ितों को मिलेगा लेकिन कितना? मदद ऐसी हो कि आप की अपनी आत्मा को भी शुकून मिल सके तो मुझे लगता है वही सबसे बड़ी मदद होगी। सरकार गरीबों के लिये जो कर रही है सो कर ही रही है लेकिन कई जगहों पर यह कहावत जरूर चरित्रार्थ हो रही है ‘अंधा बाँटे रेवड़ी, फिर फिर अपने को दे’।

 

निम्न मध्यमवर्ग के लिये स्थितियाँ जरूर गंभीर हैं। सरकार, गैर सरकारी संगठन, स्वैच्छिक मददगार और जन प्रतिनिधि इन सब मददगारों की नज़रों से भी यह वास्तविक रूप से पीड़ित लोगों की मदद कौन करेगा? अपनी दयनीय स्थिति का रोना इन सबके आदत में जरूर नहीं था। वजह थी खुद्दारी के साथ कमा कर खाते थे और देश की सेवा में प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से संलग्न रहते आये हैं। ऐसे सभी लोगों की मदद के लिये हर समाज के पदधिकारियों को अपने समाज के ऐसे लोगों की पहचान अपनी राष्ट्रीय, प्रादेशिक, जिले व तहसील स्तर की बनी समितियों के माध्यम से कराने के लिये सक्रिय होना चाहिए। लगभग हर समाज का अपना आनलाईन सोशल ग्रुप भी है, इस ग्रुप व फोन आदि आधुनिक संचार के माध्यम द्वारा भी ऐसे लोगों की जानकारी एकत्रित कर लेना चाहिए और मदद के लिये तत्पर रहना चाहिए। तभी भारत इस महामारी के बाद भी दुर्बल नहीं पड़ेगा। आपका अपना समाज दुर्बल नहीं पड़ेगा आप के अपनों की इस अव्यवस्था से कमर नहीं टूटेगी। अपने राष्ट्र के लिये ऐसी मदद जरूर देशभक्ति की भी महानतम् श्रेणी में गिनी जायेगी।

 

ऐसी मदद से हो कि निज आत्मा को नाज हो और यह मदद जरूर आपको पूरे जीवन को आनंदित करेगी। मैं जिस समाज से हूँ उस कसौंधन वैश्य समाज के लोगों से भी विनम्र निवेदन करता हूँ कि अपने समाज के आधार (निम्न मध्यवर्ग व जरूरतमंदों) को जरूर मजबूत करें, ऐसे लोगों की पहचान के लिये आप ऑनलाईन अभियान भी चला सकते हैं, बहुत कुछ नहीं तो राशन पानी या खाना वगैरह तो पहुंचाया ही जा सकता है। साथ ही जो भाई सक्षम हैं वो अपने आसपास के गरीबों का भी ध्यान रखे, सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं को उन तक पहुँचाने में मदद करे। सरकार ने हर स्तर पर मदद के लिये नंबर जारी कर रखे हैं। यदि कोई इतना भी सक्षम नहीं है तो दिये गये तमाम हेल्पलाईन नंबर पर कॉल करके उन गरीबों को भी मदद दिलायी जा सकती है। इस तरह का सहयोग और मदद भी महामारी के बाद भी भारत की मजबूती में मील का पत्थर साबित होगी।

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