दो सौ देशों के प्रतिनिधि हुए शामिल, 14 दिसम्बर तक चल सकती है समिट
नई दिल्ली, 05 दिसम्बर 2018: जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय स्तर देश अब किस कदर जागरूक हुए हैं इसकी बानगी तब देखने को मिली जब जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए फंडिंग दो गुना इक्किट्ठी हो गयी।

2021 से 25 के लिए विश्व बैंक 14 लाख करोड़ रुपए देगा। वह लड़के का तो विदेश में अहम बैठक हुई शुरू
विश्व बैंक ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए 2021 से 25 तक के लिए 200 बिलीयन डॉलर करीब 1400000 करोड रुपए देने का ऐलान किया है। यह रकम मौजूदा 5 साल के लिए दिए गए फंड की दोगुनी हैं। पोलैंड के साथ काटोवित्स में 2015 के पेरिस समझौते के बाद जलवायु परिवर्तन पर सबसे अहम बैठक रविवार से शुरू हो गई है।
पोलैंड में संयुक्त राष्ट्र जलवायु समिट में विश्व बैंक ने कहा कि इससे लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी। विश्व बैंक के मुताबिक यह पहली बार है कि उत्सर्जन कम करने के लिए 2021- 25 के दौरान हर साल 50 बिलियन डॉलर दिए जाएंगे। जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए विकसित देशों ने विकासशील देशों में निवेश करने पर सहमति जताई थी। सूत्रों के अनुसार 2020 तक के लिए $100 बिलियन डॉलर दिए जाने हैं।

तो इसलिए बढ़ रहा है पृथ्वी का तापमान:
पृथ्वी का तापमान बढ़ने की मुख्य वजह पर्यावरण में जमा हो रहा कार्बन और ग्रीन हाउस गैसें हैं। इनकी वजह से वायुमंडल में प्रवेश करने वाली उस्मा यानी गर्मी वापस नहीं जा पाती। जिससे धरती लगातार गर्म हो रही है। यही एक कारण है कि धरती के गर्म होने के परिणाम स्वरुप महाद्वीप अंटार्कटिक तेजी से पिघल रहा है। वहां मौजूद बर्फ तेजी से पिघल रही है। बताया जाता है कि 1980 में यहां 77 लाख वर्ग किलोमीटर में बर्फ फैली थी जो 2018 में यह घटकर 46 लाख वर्ग किलोमीटर हो चुका है। चिंतित वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यदि यही रफ्तार रही तो 2050 तक अंटार्कटिक पूरी तरह से पिघल जाएगा।
भारत की है इसमें अहम भूमिका:
भारत जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में एक अहम देश है। यह चीन जैसे देशों के साथ मिलकर अमीर देशों पर दबाव डालता है कि वह कार्बन उत्सर्जन कम करें, साथ ही भारत की मांग रही है कि अमीर देश विकासशील देशों को आर्थिक मदद के साथ- साथ और टेक्नोलॉजी दें, ताकि साफ-सुथरी ऊर्जा का संयंत्र लगा सकें।







