पेड़ कटने पर टूटे अण्डों और मासूम बच्चों के साथ बैठा रहा पंछी, देखकर इंसानियत भी हो गयी शर्मशार

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मुंबई आरे की घटना से देश में उबाल: एक पेड़ काटने पर जब इतने पंछी व्याकुल हुए तीन हज़ार दरख़्त गिराने पर हजारों पंछियों पर क्या बीती होगी

कोच्ची, नई दिल्ली, 06 अक्टूबर 2019: यह इंसानियत और मानवता को बेहद ही शर्मशार करने वाली घटना है। रातों -रात मुंबई के गोरेगांव की आरे कॉलोनी में दो हजार पेड़ काटे जाने की घटना जो इन दिनों देश के हर अख़बारों और सोशल मीडिया की सुर्खिया बनी हुयी है। बता दें कि अब एक ऐसे ही संवेदनशील घटना केरल से भी है जिसने सबको हैरान कर दिया है। केरल में पलक्कड़ रेलवे स्टेशन परिसर में स्थित एक गुलमोहर का पेड़ काटने के जुर्म में रेलवे के अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ केस दर्ज कराया है। दरअसल इस पेड़ पर 100 से अधिक प्रवासी पक्षियों के घोंसले थे, जो पेड़ कटने से उजड़ गए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एक अक्टूबर को पलक्कड़ रेलवे स्टेशन परिसर में स्थित गुलमोहर के पेड़ को काट दिया गया था। गुलमोहर का ये पेड़ बहुत पुराना बताया जा रहा है। पेड़ काटे जाने से इसमें बने सौ से अधिक घोंसले टूट गए और उनमें मौजूद अंडे टूटकर जमीन पर बिखर गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पेड़ कटने के बाद प्रवासी पक्षी दो दिन तक वहीं बैठे रहे और अपने अंडों को खोजते रहे। वहीं पेड़ कटने के दो दिनों तक पक्षियों को अपने टूटे हुए अंडों के पास बैठे हुए देखा गया, जो काफी ह्रदय विदारक दृश्य था।

रेलवे परिसर में काटे गए पेड़ की सूचना जब पर्यावरण कार्यकर्ता बोबन मट्टूमंथा को मिली तो उन्होंने इसकी जानकारी वन विभाग को दे दी। सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचे वालयाल रेंज के वन अधिकारियों ने रेलवे स्टेशन के अधिकारियों और पेड़ काटने वाले ठेकेदार पर केस दर्ज कराया है। बोबन मट्टूमंथा ने बताया है कि पेड़ काटने से पहले वन विभाग से इजाजत लेनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। यह चित्र बोबन ने स्वयं खींचा है। इस मामले में पंछी का एक टीवी न्यूज का वीडियो भी है। भले ही भाषा मलयालम है लेकिन यदि दिल से सुनेंगे तो भाव समझ जाएंगे।

सुलग रहा है मुंबई आरे का मामला:

यह जंगल नहीं है। यहां इतने बड़े 90 साल पुराने पेड़ को गिराना न तो अनैतिक है और न गैर कानूनी। यह पेड़ किसी के लिए हर दिन छाया था तो सैकड़ों परिंदे अपने पुश्तेनी घरों को गिरता देख विरोध भी नहीं कर पाए। इस पेड़ से यादें जुड़ीं थी, किसी का आहार तो किसी का आसरा। एक रात में 800 ऐसे पेड़ निर्ममता से काट कर सड़क पर पाट दिए गए। संस्कृति, धर्म, आस्था, दर्शन नें लिखे पेड़ को देवी देवता बताने वाले सैंकड़ों आख्यान, भाषण, प्रवचन सभी ढह गये इन पेड़ों जे साथ।

नवरात्रि में देवी पूजने वालों के लिए एक पेड़ देवी स्वरूप ही होता है। आरए कालोनी मुंबई में ऐसे ही विशाल पेड़ गिराए जा रहे हैं। पेड़ जे ढहते ही यदि आपकी आत्मा धक्क न बोले तो किसी अच्छे मनोचिकित्सक को भी दिखाएं।

एक बात औऱ, इस कुकर्म का विरोध कर रहे लोगों को पुलिस, अदालत और ठेकेदार की तिगड़ी ने जेल भेज दिया। इनमें कई छात्र है और उनके सोमवार को इम्तेहान है जिस दिन उन्हें जेल में ही रहना होगा। इस आतंक के जरिये युवा और लड़कियों को डरा दिया गया ताकि विरोध के स्वर न उठें।

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