defexpo 2020 से: डॉ दिलीप अग्निहोत्री
डिफेंस एक्सपो ने भारत के रक्षा कौशल को विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित किया है। दुनिया की नजर इस समय लखनऊ में चल रहे डिफेंस एक्सपो पर है। विश्व में ऐसी कोई प्रमुख हथियार निर्माता कम्पनी नहीं है, जिसने डिफेंस एक्सपो का रुख ना किया हो। भारत की तो रक्षा या उससे संबंधित उपकरण बनाने वाली सभी कम्पनियां यहां भागीदरी कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ठीक कहा कि भारत केवल एक बड़ा बाजार ही नहीं रक्षा उत्पाद का बड़ा अवसर भी है। यह जितना बड़ा आयोजन है, उसी के अनुरूप यहां की बेहतरीन व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस संबद्ध में अपनी सरकार के उल्लेखनीय रिकार्ड को कायम रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के अलावा विदेशी प्रतिनिधयों ने भी यहां के इंतजाम की सराहना की है।
योगी आदित्यनाथ ने प्रशासनिक मशीनरी को पहले ही सन्देश दे दिया था। उन्होंने बता दिया था कि रक्षा के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता के दृष्टिगत इस एक्स्पो का विशेष महत्व है। इसका ध्यान रखते हुए ही सभी तैयारियां होनी चाहिए। दो वर्ष पहले उत्तर प्रदेश इन्वेस्टर्स समिट में प्रधानमंत्री ने देश के दो डिफेंस काॅरीडोर स्थापित करने की घोषणा की थी। इसमें से एक डिफेंस काॅरीडोर को उत्तर प्रदेश के हिस्से में आया था। प्रदेश सरकार ने इस दिशा में तेजी से प्रयास किया। इस डिफेंस एक्स्पो में तेईस एमओयू होंगे। इसके माध्यम से पचास हजार करोड़ रुपए का निवेश डिफेंस इण्डस्ट्रियल काॅरीडोर में सम्भावित है। जिससे लगभग तीन लाख रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

राज्य सरकार प्रदेश में अवस्थापना सुविधाओं का विकास तेजी से कर रही है। बड़े पैमाने पर एक्सप्रेसवेज़ की स्थापना की जा रही है। वर्तमान में पूर्वांचल एक्सप्रेस वे का कार्य प्रगति पर है। इसी वर्ष इसका काम पूरा हो जाये।बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे का निर्माण भी अगले वर्ष के अन्त तक सम्भावित है। इसके अलावा, मेरठ से प्रयागराज तक गंगा एक्सप्रेस-वे के निर्माण पर भी कार्य किया जा रहा है। एशिया का सबसे बड़ा नोएडा इण्टरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट जेवर में स्थापित किया जा रहा है। इसके अलावा, रीजनल कनेक्टिविटी को ठीक करने के लिए ग्यारह एयरपोट पर कार्य चल रहा है। डिफेंस काॅरीडोर की प्रगति के लिए यह एक्स्पो अत्यन्त महत्वपूर्ण है। इतना ही नहीं इससे मेक इन इण्डिया अभियान भी आगे बढ़ेगा।

भारत के साथ ही उत्तर प्रदेश डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में भी स्थापित किया जा सकेगा। क्लस्टर डेवलेपमेण्ट के माध्यम से विकसित किए जा रहे डिफेंस इण्डस्ट्रियल ईको सिस्टम से देश को बहुत लाभ होगा। देश में डिफेंस प्रोडक्शन को बढ़ावा देने के लिए कई पाॅलिसी इनीशिएटिव्स को लागू किया गया है। प्रधानमंत्री व रक्षामंत्री ने योगी आदित्यनाथ के प्रयासों को सराहनीय बताया। यह भारत का सबसे बड़ा डिफेंस एक्जीबिशन प्लेटफाॅर्म बन गया है। इतना ही नहीं विश्वस्तर पर भी यह प्रतिष्ठित हो चुका है। इस आयोजन में एक हजार डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स और डेढ़ सौ कम्पनियां भाग ले रही हैं। डिफेंस एक्स्पो में डिजिटल ट्रान्सफाॅर्मेशन आफ डिफेंस प्रतिबिम्बित हो रहा है।

मेक इन इण्डिया से भारत की सुरक्षा बढ़ेगी, वहीं डिफेंस सेक्टर में युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। दुनिया में जब इक्कीसवीं सदी की चर्चा होती है, तो स्वाभाविक रूप से भारत की तरफ ध्यान जाता है। यह डिफेंस एक्सपो भारत की विशालता, उसकी व्यापकता, उसकी विविधता और विश्व में उसकी विस्तृत हिस्सेदारी का प्रमाण है। भारत के पास रक्षा संबन्धी शोध अनुसंधान की पूरी क्षमता है। सरकार इसको प्रोत्साहन भी दे रही है। यूजर और प्रोड्यूसर के बीच भागीदारी से राष्ट्रीय सुरक्षा को और अधिक शक्तिशाली बनाया जा सकता है। पहले डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में प्राइवेट सेक्टर को टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की बहुत समस्याएं आती थीं।
भारतीय उद्योगों के लिए बिना चार्ज के ट्रांसफर आॅफ टेक्नोलाॅजी की नीति बनायी गई है। इससे भारतीय उद्योगों की भागीदारी बढ़ेगी। दुनिया के टॉप डिफेंस मैन्युफैक्चररर्स को अधिक काॅम्पीटेण्ट इण्डियन पार्टनर्स मिलेंगे। डिमाण्ड और मैन्युफैक्चररर्स की प्रक्रिया को आसान बनाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के डिफेंस कॉरिडोर के तहत लखनऊ के अलावा अलीगढ़, आगरा, झाँसी, चित्रकूट और कानपुर में नोड्स स्थापित किए जाएंगे।
अमेठी के कोरबा में इण्डो रशियन राइफल्स प्रालि ज्वाइण्ट वेंचर के तहत राइफलों का निर्माण किया जा रहा है। भारत में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को और गति एवं विस्तार देने के लिए नए लक्ष्य रखे गए हैं।रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में एमएसएमई की संख्या को पन्द्रह हजार से ज्यादा पहुंचाया जाएगा। डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग का एक कॉमन प्लेटफॉर्म बनाने का प्रयास होगा। नरेंद्र मोदी ने ठीक कहा कि भारत हमेशा से विश्व शान्ति का भरोसेमन्द पार्टनर रहा है। दुनिया में छह हजार से अधिक भारतीय सैनिक यूएन पीस कीपिंग फोर्सेज का हिस्सा हैं।
भारत में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में असीमित संभावनाएं हैं। यहां टैलेण्ट, टेक्नोलाॅजी इनोवेशन, इन्फ्रास्ट्रक्चर, फेवरेबल पाॅलिसी और फाॅरेन इन्वेस्टमेण्ट की सुरक्षा भी है। डिमाण्ड है,डेमोक्रेसी और डिसाइसिवनेस भी है। इन सबको सरकार प्रोत्साहन देगी। इससे भारत को रक्षा उत्पाद में केवल आत्मनिर्भर ही नहीं बनाया जाएगा, बल्कि भारत को प्रमुख निर्यातक भी बनाया जाएगा।







