शतरंज के बहुत बड़े खिलाड़ी हैं अमित शाह

0
162
  • अमित शाह की यात्रा के रोचक प्रसंग: घड़ी नहीं पहनते लेकिन समय के बड़े पाबंद हैं अमित शाह

डॉ दिलीप अग्निहोत्री

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर लिखी गई किताब इस समय चर्चा में है। अमित शाह और भाजपा की यात्रा उनकी जीवनी नहीं है, लेकिन पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा और कार्यशैली की जानकारी अवश्य मिलती है। भाजपा और शाह की यात्रा को अलग करके देखना कठिन है।

इस यात्रा में अमित शाह से संबंधित कई रोचक प्रसंग है। गुजरात विधानसभा चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद अन्य पार्टियों के नेता विश्राम करने चले गए। जबकि अमित शाह वहां से तत्काल त्रिपुरा रवाना हो गए। वहां चुनाव प्रचार में जुट गए। इससे उनकी कार्यशीली का अनुमान लगाया जा सकता है। यूपीए सरकार ने अमित शाह को साजिश के तहत घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई। लेकिन न्यायपालिका से उन्हें इंसाफ मिला।

ज्योतिष शास्त्र के भी जानकार हैं अमित शाह:

इस पुस्तक में कई रोचक प्रसंगों का भी उल्लेख है। अमित शाह अत्यधिक व्यस्तता के बाद भी नियमित डायरी लिखते हैं। यह तथ्य उन्होंने स्वयं स्वीकार किया। लेकिन कहा कि यह प्रकाशित कराने के लिए नहीं है। शाह इसका उपयोग स्वमूल्यांकन के लिए करते है। पुस्तक में बताया गया कि अमित शाह ज्योतिष शास्त्र के भी जानकार हैं। बचपन में वह ज्योतिष शास्त्री के संपर्क में आए थे। उनसे नियमित चर्चा होती थी।

इससे उनको ज्योतिष ज्ञान प्राप्त हुआ। अपनी पोती के जन्म से पूर्व शाह ने कहा था कि घर में लक्ष्मी आ रही है। इसके बाद वह कर्म पर विश्वास रखते है।वह शतरंज के अच्छे खिलाड़ी रहे है। कहा गया कि वह शतरंज खेलते समय चाल गिनते थे,समय नहीं। कितने चाल में विरोधी को परास्त करना है, यह उनका लक्ष्य होता है। इसी लक्ष्य को लेकर वे हर चाल चलते हैं।

वह समय का अनुशासन मानते है, लेकिन घड़ी नहीं पहनते। वह मानते है कि राजनीतिक जीवन में उपहार देने की शुरुआत घड़ी और कलम से होती है। राजनीतिक जीवन में उपहार की संस्कृति को रोक देने के लिए घड़ी न पहनने का निर्णय लिया।

सादगी पसंद हैं अमित शाह:

वह सादगी पसंद है, प्रत्येक परिस्थिति को सहजता से स्वीकार करते है। अमेठी में उनकी बैठक एक गोदाम में हुई थी। बिलंब हुआ तो शाह ने उसी गोदाम में ठहरने का निश्चय किया। वह छत पर गए और रात्रि विश्राम के लिए स्थान स्वयं ढूंढ लिया। उसी अव्यवस्थित कमरे में सो गए। इस घटना से पता चलता है कि वह बड़े नेता होने के बाद भी अपने की पार्टी का कार्यकर्ता ही मानते है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here