गांधीवादी तरीके से 19 दिन से आंदोलन रत थे कर्मचारी, डिप्टी सीएम के आश्वासन पर मानें
संयुक्त संघर्ष समिति, उ.प्र. राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड के तत्वावधान में जारी गांधी वादी तरीके से चला 19 दिवसीय आन्दोलन सोमवार को उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य एवं समिति के उच्च पदाधिकारियों से हुई वार्ता के बाद स्थगित हो गया। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं मंत्री लोक निर्माण विभाग केशव प्रसाद मौर्या ने पदाधिकारियों को आश्वासन दिया कि वित्तीय वर्ष की समाप्ति के उपरान्त ही इस मामले में निर्णय लिया जाएगा।
समिति के पदाधिकारियों के अनुसार उन्होंने कहा कि जिस मुद्दे को लेकर आप लोग आन्दोलित है उसका सरकार ने संज्ञान लिया है, क्योंकि वित्तीय वर्ष की समाप्ति 31 मार्च को हो रही है। इसलिए उक्त आदेश पर तत्काल कोई निर्णय नहीं लिया सकता, लेकिन मार्च के उपरान्त मेरा पहला यह प्रयास रहेगा कि राजकीय निर्माण निगम को ईपीसी मोड़ पर केवल प्रदेश में नहीं बल्कि केन्द्र सरकार मेे भी कार्यदायी संस्था नामित किया जाए। उन्होंने आश्वसान दिया कि निगम न तो बंदी की कगार पर जाएगा और न ही उसके किसी कर्मचारी अधिकारी का अहित होगा।

प्रबंध निदेशक इं. यू.के. गहलोत द्वारा गत दिवस आन्दोलनकारियों से पूर्ण कार्य बहिष्कार के दौरान किये गए वायदे के अनुरूप सोमवार को प्रबंध निदेशक के साथ महाप्रबंधक संविदा सत्यवीर के साथ संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष राज बहादुर सिंह, सह संयोजक इं.एस.डी. द्विवेदी, इं. नरेन्द्र कुमार, उमाकांत,भजनलाल,इसहाक अली,सुरेन्द्र कुमार वर्मा और उप मुख्यमंत्री केेशव प्रसाद मौर्या के बीच लगभग बीस मिनट वार्ता हुई। इस दौरान संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने 50 करोड़ से कम के काम मिलने के बाद निगम को होने वाली वित्तीय हानि तथा अन्य समस्याओं से अवगत कराया।
समिति ने विभागीय मंत्री के समक्ष इस मांग को पुरजोर तरीके से रखा कि केन्द्र सरकार की भाॅति राज्य सरकार द्वारा भी ईपीसी मोड पर राजकीय निर्माण निगम को भी कार्यदायी संस्था नामित किया जाए। उन्होंने एक प्रस्ताव यह भी रखा कि राजकीय निर्माण निगम को जल निगम की भाति सरकारी विभाग घोषित किया जाए। उपमुख्यमंत्री स्तर पर हुई वार्ता और सकारात्मक आश्वासन मिलने के बाद संघर्ष समिति की उच्चाधिकार समिति की बैठक के उपरान्त आन्दोलन एक माह के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया गया।







