- केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान ने बनाया विशेष मॉडल
- स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक होंगी सब्जियां
उपेन्द्र नाथ राय
सिकुड़ती जमीन व रसायनों के अंधाधुंध प्रयोग से स्वास्थ्य पर पड़ रहे बुरे प्रभाव से बचने के लिए दीवारों पर सब्जी उगायी जा सकती है। इससे जहां घर की सुंदरता में इजाफा होगा वहीं रसोईघर का बजट कम करते हुए सब्जी की जरूरत भी पूरी की जा सकेगी। बिना रासानियक खाद विहीन ये सब्जियां सेहत को बेहतर बनाने में भी मददगार होंगी। ये बातें केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, (रहमानखेड़ा) के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एस.आर. सिंह ने कही। उन्होंने इस तरह का माडल विकसित किया है, जिससे छत या दीवारों पर सब्जियों को उगाया जा सकता है।
डॉ. सिंह ने मीडिया को बताया कि आईसीएआर-सीआईएसएच द्वारा विकसित की गयी डिजाइन माडलों से यह संभव हुआ है। इससे सीमित स्थान में बिना मिट्टी के सब्जियों को उगाया जा सकता है।
संस्थान में ही किया गया सफल प्रयोग, लहलहा रही मेथी, पालक:
उन्होंने बताया कि आईसीएआर-सीआईएसएच कुछ मॉडल विकसित किए हैं और उनका उपयोग करके संस्थान ने प्याज, मेथी, पालक, धनिया, सलाद, चुकंदर, पत्तागोभी और कई अन्य सब्जियां सफलतापूर्वक उगाई है। मिट्टी के अधिक वजन के कारण छत पर पौधें उगने के लिए हल्के वजन वाले मिश्रण का उपयोग किया जा सकता है। कई विकल्पों पर शोध किया गया। इस प्रकार के खेती के मॉडल में रोग और कीट के प्रबंधन के लिए कीटनाशकों प्रयोग की आवश्यकता लगभग न के बराबर होती है। डॉ. एस.आर. सिंह, संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक ने कई मॉडल विकसित किए, जिन्हें उपलब्ध स्थान के अनुसार समायोजित किया जा सकता है। उन्हें बालकनी में या दीवार के साथ पर पक्के फर्श पर रख सकते हैं।
छतों या दीवारों पर सीलन का भी खतरा नहीं:
प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एसआर सिंह ने कहा कि ज्यादातर, लोग सजावटी पौधों का उपयोग दीवारों को सजाने के लिए उपयोग करते हैं। इन पौधों को उगाने के लिए कई रेडीमेड प्लास्टिक के कंटेनर उपलब्ध हैं, लेकिन दीवार के साथ उगने वाली सब्जियों के लिए विशेष डिजाइन के कंटेनर बाज़ार में उपलब्ध नहीं हैं, जिन्हें दीवार के साथ खड़ा किया सके। उन्होंने कहा कि ये संरचनाएं छत पर मिट्टी को छत से छूने नहीं देती हैं। फलस्वरूप सीलन का खतरा नहीं होता है। संस्थान के इस प्रयास ने कई शहरी उद्यमियों को परिवार के लिए सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ घरेलू उपयोग के लिए सब्जी उगाने के लिए इस तकनीक का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया है।
मूसलाधार बारिश में भी आसानी से बचायी जा सकती हैं सब्जियां:
उन्होंने कहा कि सब्जियों को उगाने के लिए सर्दियों का मौसम सबसे उपयुक्त है, लेकिन स्थान के अनुसार, कई फसलों को अधिकांश मौसमों में उगाया जा सकता है। बरसात में सब्जियों को खुले में नहीं उगाया जा सकता है, वे अधिक पानी के कारण सड़ सकती हैं, लेकिन इस पद्धति से मूसलाधार बारिश में भी पौधों को आसानी से बचाया जा सकता है।
उत्पादकों को मिलेगी संतुष्टि:
उन्होंने बताया कि जब बाजार में सब्जियां अधिक कीमत पर मिलती हैं, तो खुद की उगाई गई सब्जियां उत्पादकों को विशेष संतुष्टि देगी। ये संरचनाएं पुदीना, बेसिल, पत्तेदार सब्जियों जैसे धनिया तथा हर्ब्स जिनका उपयोग थोड़ी मात्रा के लिए होता है, विशेष रूप से अत्यधिक उपयुक्त हैं। इस तरह की पद्धति में चिकोरी, पार्सले और बान्चिंग प्याज जैसी विदेशी सब्जियां भी अच्छी होती हैं। लेट्यूस, चिकोरी, पालक, स्विस चार्ड छोटी सी जगह पर शानदार पत्ते विकसित करते हैं। इन नवीन तरीकों को अपनाकर एक छोटे परिवार के लिए पर्याप्त सब्जियां उगाई जा सकती हैं।







