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    Home»इंडिया

    प्लेटलेट्स भ्रांतियों का समाधान करती पीजीआई निदेशक की पुस्तक

    By January 8, 2020 इंडिया No Comments5 Mins Read
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    डॉ दिलीप अग्निहोत्री

    एलोपैथी से जुड़ी किताबों की कमी नहीं है। लेकिन इसका दायरा इस विषय के विद्यर्थियो व चिकित्सको तक सीमित रहता है। उन्हीं को ध्यान में रख कर ऐसी पुस्तकों को लिखा भी जाता है। लेकिन राममनोहर लोहिया चिकित्सालय व पीजीआई लखनऊ के निदेशक डॉ ए के त्रिपाठी का लिखना आमजन के लिए होता। ऐसे लोग जिन्हें एलोपैथी की जानकारी नहीं होती, वह लोग भी उनके लेखन का लाभ उठा सकते है। डॉ त्रिपाठी बीमारी से जुड़ी समस्या उठाते है, उसके संबन्ध में भ्रांतियों का उल्लेख करते है,इसके बाद वह समाधान भी प्रस्तुत करते है। उनके हिंदी लेखन की भाषा शैली अत्यंत सहज होती है। कोई भी साक्षर व्यक्ति इसे आसानी से समझ सकता है। कुछ समय पहले उन्होंने एनीमिया से संबंधित ऐसी ही किताब लिखी थी। इसमें निर्धन ग्रामीण महिलाओं,बच्चों से लेकर धनी वर्ग तक की समस्या समाहित थी। अब उसी तर्ज पर उनकी नई किताब “प्लेटलेट्स की कमी,भ्रांतियां और समाधान” प्रकाशित हुई है।

    डॉ त्रिपाठी ने इस पुस्तक को लिखने का उद्देश्य भी बताया। वह कहते है कि अधूरी व गलत जानकारी से लोग भ्रमित हो जाते है। अतः स्वास्थ के लिहाज से महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषयों की प्रमाणिक जानकारी देना आज की जरूरत भी है और चुनौती भी। वाइरल या अन्य प्रकार के बुखार में सामान्यतः प्लेटलेट्स की संख्या में कमी हो जाती है। ऐसे में डॉक्टर सही जानकारी न दे सके तो लोग घबरा जाते है। ऐसे में कई बार जरूरत न होने पर भी प्लेटलेट्स चढ़ा दिया जाता है। इससे आर्थिक व शारीरिक रूप से भी नुकसान होता है। प्लेटलेट्स बीस हजार से नीचे न हो तब तक ब्लीडिंग का खतरा नहीं रहता। इसी भ्रांति का पुस्तक में निवारण किया गया।

    पुस्तक में सर्व प्रथम वह प्लेटलेट्स के निर्माण और जरूरत की जानकारी देते है। इस संबद्ध में रिपोर्ट की सच्चाई,कमी को लेकर चिंता,बड़े आकार की प्लेटलेट्स,बार बार जांच का रोग,प्लेटलेट्स कमी के नुकसान,सावधानी,गर्भावस्था में इसकी कमी, पपीते के पत्ते व अन्य देशी उपाय कितने कारगर,डेंगू में रक्तस्राव के कारण व इलाज आदि विषयों पर प्रकाश डाला गया। लेखक यह भी बताते है कि प्लेटलेट्स की जांच कब करानी चाहिए। यह जानकारी दी गई कि प्लेटलेट्स रक्त में पाई जाने वाली तीन प्रकार की रक्त कोशिकाओं में से एक है। इसके अंदर विभिन्न प्रकार के केमिकल भरे होते है। प्लेटलेट्स का प्रमुख काम सख्त स्राव की जगह थक्का बनाकर रक्त को बहने से रोकना है।

    प्लेटलेट्स की संख्या कम होने से रक्तस्राव देर तक होता रहता है। प्लेटलेट्स की जांच रिपोर्ट का सही होना जरूरी है। कई कारणों से जांच में गड़बड़ी हो जाती है। एक स्वस्थ व्यक्ति में प्लेटलेट्स की संख्या 1.5 लाख प्रति क्यूबिक मिली लीटर से लेकर 4.0 लाख प्रति क्यूबिक मिली लीटर होती है। बार बार घबराहट में जांच कराने की धारणा का उदाहरण देकर समाधान किया गया है। वायरल,मलेरिया व दवाइयों के प्रयोग से भी प्लेटलेट्स कम होती है। इसको कमी के कई अन्य कारण भी होते है। प्लेटलेट्स संख्या में गिरावट हो तो रक्त में विटामिन बी 12 के मात्रा की जांच करा लेना चाहिए। एस्प्रिन तथा अनेक दर्द निवारक गोलियां प्लेटलेट्स के काम मे रुकावट डालती है।

    मेथी, अदरक के अत्यधिक सेवन से प्लेटलेट्स कमजोर पड़ जाते है। लिवर, गुर्दे की बीमारी, वायरल, डेंगू का भी इसपर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। प्लेटलेट्स कम होने की दशा में उचित सावधानी के निर्देश भी पुस्तक में दिए गए है। उन दवाओं के सेवन से बचना चाहिए जो प्लेटलेट्स को कम करती है। इस अदरक,मेथी का प्रयोग भी नहीं करना चाहिए। एक अलग अध्याय में बताया गया कि पपीते का पत्ता व अन्य देशी दवा इसमें कितनी कारगर है। डॉ त्रिपाठी ने पहले बताया कि इन सबको खारिज करना उनका उद्देश्य नहीं है। वह कहते है कि पपीते का वर्णन आयुर्वेद में नहीं है।

    प्लेटलेट्स कम होने के अनेक कारण होते है। अलग अलग मरीजों में अलग अलग कारण हो सकते है। डेंगू मरीज पर हुए प्रयोग में पपीते के पत्ते को प्लेटलेट्स बढ़ाने वाला पाया गया।लेकिन यह वैज्ञानिक दृष्टि से पर्याप्त नहीं है। ऐसे ही तथ्य कीवी फल के संबन्ध में है। इसमें फोलिक एसिड जैसे तत्व होते है। लेकिन प्लेटलेट्स बढ़ाने में यह कितनी कारगर है, इसपर संदेह है। बकरी का दूध, गिलोय, आदि बहुत गुणकारी है। लेकिन प्लेटलेट्स के संबन्ध में इनपर शोध होना आवश्यक है। प्लेटलेट्स चढ़वाने में भी जागरूकता व सावधानी जरूरी है। गर्भावस्था में प्लेटलेट्स सामान्यतः कम हो जाता है। प्लेटलेट्स का निर्धारित मात्रा से अधिक होना भी असमान्य स्थिति उतपन्न करता है। यह रक्त रोग हो सकता है। इन सबकी जांच कब करानी चाहिए,इसके भी सुझाव दिए गए है।

    जाहिर है कि यह पुस्तक जनसामान्य के लिए उपयोगी है। डॉ त्रिपाठी का कहना है कि प्लेटलेट्स हमारे रक्त में मौजूद एक आवश्यक अवयव है। यह रक्तस्राव होने से बचाता है। डेंगू आदि बुखरों में इसकी संख्या कम हो जाती है। डॉ त्रिपाठी इस समय पीजीआई लखनऊ के निदेशक है। इसके पहले किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय लखनऊ क्लिनिकल होलीमेटोलॉजी विभाग के प्रोफेसर व अध्य्क्ष थे। रक्त रोग विज्ञान पर उनके करीब सवा सौ शोध पत्र देशविदेश में प्रकाशित हुए है। कई पुस्तकें भी लिखी है। एनीमिया कुछ रोचक जानकारी पर हिंदी संस्थान द्वारा उन्हें विश्वविद्यालय स्तर का सम्मान मिल चुका है। उन्हें अनेक अंतरराष्ट्रीय फेलोशिप भी प्राप्त हुई है। उत्तर प्रदेश सरकार से विज्ञान रत्न अवार्ड,विज्ञान गौरव तथा केंद्र सरकार द्वारा उन्हें सम्मान मिल चुका है।

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