सोशल मीडिया पर आपके नाम का ही राजनीतिकरण हो रहा है…!

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एक पत्रकार का सन्देश रवीश कुमार के नाम


रवीश कुमार जी,

आपको ईमानदार पत्रकार और निष्पक्ष विश्लेषक मानता रहा हूं। आपकी पत्रकारिता जनता के सरोकारों पर आधारित रही है। मुझे याद है कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार को आलोचनात्मक दृष्टि से देखने वाले कार्यक्रम ” रवीश की रिपोर्ट” से आपकी पत्रकारिता पर करोड़ों दर्शकों ने विश्वास करना शुरू किया था। जब आप कांग्रेस की हुकुमतों के सामने सवाल खड़े करते थे.. सरकार के झूठ और आम जनता की तकलीफों का सच बयां करते थे, तब से महसूस होने लगा था कि आप भारत के बड़े और भरोसेमंद पत्रकार साबित होंगे।

सरकार की कमियों को ढूंढ-ढूंढ कर उजागर करना एक सच्चे पत्रकार का पहला फर्ज होता है। हिम्मत,साहस, निष्पक्षता, शालीनता, संतुलन,सौहार्द की भावना, निर्भीकता और विपक्षी तेवर किसी भी सच्चे पत्रकार की ख़ूबियां हैं।
करोड़ों पाठक/दर्शक आपकी ऐसी तमाम खूबियों और सादगी के क़ायल है। देश-दुनिया के हजारों लोग और पत्रकार भी आपको अपना आइडियल मानते हैं।

लेकिन ये क्या ! आपके नाम से खुल कर किसी राजनीति दल का प्रचार हो रहा हैं। मेरे ख़्याल में कांग्रेस या किसी भी पार्टी के प्रत्याशी के लिए खुल कर वोट की अपील करने वालों को किसी पत्रकार का नाम इस्तेमाल नहीं करना चाहिए है। झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास के सामने पूर्वी जमशेदपुर में कांग्रेस उम्मीदवार गौरव वल्लभ को वोट देने की अपील करने वाले यदि किसी नामचीन पत्रकार का नाम इस्तेमाल करेंगे तो लगेगा कि ये सब उस पत्रकार की सहमति से हो रहा है।
माना कि ये ट्वीट सीधे आपने नहीं रवीश फैन क्लब ने जारी किया है. लेकिन क्या ये मुम्किन है कि आपके नाम और तस्वीर के साथ लाखों की फॉलोइंग वाला कोई एकाउंट आपकी रजामंदी से नहीं चलता हो। अगर आपकी रजामंदी से नहीं चलता है तो आप एतराज जता सकते हैं। इस बात पर कि आपके नाम पर किसी पार्टी का प्रचार ना हो।

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आप सोशल मीडिया के राजनीतिकरण के ख़िलाफ हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर आपके नाम का ही राजनीतिकरण हो रहा है। आप ही तो बार-बार कहते हैं कि मीडिया और सोशल मीडिया किसी पार्टी विशेष की प्रचारक बन जाये तो देश, समाज और लोकतंत्र के लिये ये बेहद घातक है। आपने इस तरह की बातें कई बार ज़ाहिर की हैं कि राजनीतिक दलों की आई टी सेल समाज को गुमराह करने की कोशिश कर रही हैं। गोदी मीडिया और वाट्सएप यूनिवर्सिटी भी आपका ही जुमला है। यदि आप निष्पक्ष पत्रकार हैं और आपके नाम और तस्वीर से सोशल मीडिया पर लाखों की फॉलोइंग वाले एकाउंट किसी राजनीतिक दल का प्रचार कर रहे हैं तो क्या आपका दायित्व नहीं कि अपने नाम को राजनीति प्रचार के लिए इस्तेमाल नहीं होने दें। इस पर एतराज़ जतायें। इसपर आपत्ति दर्ज करें। इसकी शिकायत करें।

यदि आप ऐसा नहीं करेंगे.तो आपको भाजपा के आईटी सेल के झूठ और गोदी मीडिया पर सवाल उठाने का हक़ नहीं बचेगा। लगेगा भारत की मीडिया पत्रकारिता का कर्त्तव्य भुलाकर दो हिस्सों की लालच में बंट गयी है। मीडिया का एक हिस्सा सत्ता पक्ष की गोदी में बैठा है और दूसरा हिस्सा विपक्ष की गोदी में बैठकर इस्तेमाल हो रहा है।

अच्छा होगा कि सत्ता और विपक्ष के हिस्सों में बंटे ऐसे पत्रकार राजनीति में ही आ जायें। यदि ऐसे लोगों की विचारधारा किसी भी राजनीति दल से मेल खाती है तो वो वही पार्टी ज्वाइन कर चुनाव हराने जिताने की खूब अपीलें करें, और बतौर पार्टी कार्यकर्ता अपने लेखनीय और वाक कोशल का ख़ूब इस्तेमाल करे। स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी से लेकर एम जे अकबर तक तमाम लोग पत्रकारिता से सियासत में आये।

लेकिन ये मुम्किन नहीं कि पत्रकार बने रहने के साथ किसी पार्टी का प्रचार किया जाये। ये तो ऐसे है जैसे पैग पीते हुए शराब ना पीने की अपील की जाये।

आपका शुभचिंतक
नवेद शिकोह

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