Ivape.in वाशिंगटन डीसी में यूएसए एफडीए और इंडोनेशिया में आयोजित एशिया की पहली हार्म रिडक्शन सम्मेलन में शामिल हुआ
मुंबई, 18 नवम्बर,2017: हाल ही में एफडीएलआई ने वाशिंगटन डीसी, अमेरिका में एक तम्बाकू उत्पाद विनियमन तथा नीति वार्ता का आयोजन किा और भारत के अग्रणी वेपिंग ब्राण्ड प्अंचमण्पद के संस्थापक नीलेश जैन भारत के एकमात्र वक्ता थे जिन्हें इस आयोजन में आमंत्रित किया गया था। इस आयोजन के बाद उन्होने इंडोनेशिया के जकार्ता में आयोजित एशिया के पहले नुकसान घटाने वाले सम्मेलन मंे भी भारत का प्रतिनिधित्व किया । इस नुकसान घटाने वाले फोरम पर अलग अलग देशों में वेपिंग का समर्थन करने वाले तथा वेपिंग करने वाले उपभोक्ताओं के सक्रिय समूह एकत्रित हुए थे। इस सम्मेलन का उद्येश्य स्थानीय सरकारोे से इलेक्ट्रानिक सिगरेटों और तथाकथित ‘‘हीट-नाट-बर्न‘ उत्पाद जो कि धुम्रपान के कम हानिकारक विकल्प है उनके उपयोग को विनियमित करने के लिए उन्हें अनुमति प्रदान करने के लिए अनुरोध करना था।
विशेषज्ञों के अनुसार वेपिंग या ई-सिगरेटों के उपयोग को हार्म रिडक्शन टूल के रूप में माना जाता है। एक इलेक्ट्रानिक उपकरण- बेटरी चलित उपकरण जो प्रोपीलीन ग्लायकोल , ग्लिसरीन तथा फ्लेवरिंग से निर्मित सुगंधित द्रव को वाष्पीकृत करता है, उसके द्वारा वाष्प को अंदर लेने तथा बाहर छोडने की क्रिया को वेपिंग कहा जाता है।
जबकि एशियाई वेपर्स की आबादी पर कोई विशिष्ट आंकडे नहीं है, ऐसा आकलित किया गया है कि इस क्षेत्र में अब करोडों लोग ई-सिगरेट का उपयोग करते है जो इसे हार्म रिडक्शन उपतादों के रूप में वर्गीकृत करने का समर्थन करते हैं।
एशियाई देशों के बारे में चर्चा करते हुए विश्व में भारत आज सबसे तेजी से बढने वाली अर्थव्यवस्था है साथ ही तम्बाकू का सबसे बडा दूसरा उत्पादक भी है जहां हर साल लगभग 800 मिलियन तम्बाकू का उत्पादन होता है। लगभग 5 करोड परिवार अपने जीवनयापन के लिए तम्बाकू उद्योग पर आश्रित हैं और सबसे ज्यादा तम्बाकू उत्पादों के ग्राहकों मे से हैं।
इस अवसर पर प्अंचमण्पद के संस्थापक निलेश जैन ने कहा कि ‘‘ वेपर्स पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय प्रभाव में आकर लिया गया है न के किसी तथ्या या विज्ञान के आधार पर । वेपिंग पर अनुसंधान या अध्ययन की कमी है ओर इससे मानव जीवन को लाभ पहंुचता है । तम्बाकू मुक्त करने की वकालत करने वाले गैर सरकारी संगठन, प्रभावी लोग और विनियामक विनियमन के बारे में अस्पष्ट हैं और इसलिए वह प्रतिबंध लादने की ओर ज्यादा केन्द्रित हैं। एण्डस के विनियम 120 मिलियन धुम्रपानकर्ताओं को उस प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराएंगे जो उनके लिए जीवन और मृत्यु के बीच अंतर होगा। प्रतिबंध कोई समाधान नहीं है, लेकिन धुम्रपान के बदले बेहतर और सुरक्षित विकल्प चुनने के बुनियादी अधिकार का उल्लंघन है। ‘‘
ग्लोबल एडल्ट टौबेको सर्वेक्षण के अनुसासर आश्चर्यजनक 267 मिलियन भारतीय अभी भी सिगरेट पी रहे है और धुम्रपानरहित विकल्प जैसे कि गुटके का प्रयोग कर रहे हैं। इस लत के कारण हर साल कोई 900,000 लोग मर जाते है। धुम्रपान से होने वाली मौतों में भारत दुनिया के चार शीर्षस्थ देशों में आता है।
तम्बाकू से निकोटिन डिलेवरी पणालियों की तरफ जाने की यूएस एफडीए की नई नीति में समस्या के केन्द्र पर ध्यान दिया गया है तथा भारत जैसे देश में लोकस्वास्थ्य पर इसका व्यापक प्रभाव हो सकता है। यहां तम्बाकू का भारी मात्रा में उपयोग किया जाता है ओर जहां सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल पर कम से कम ध्यान दिया जाता है जिससे निवाराणात्मक उपायो की भूमिका और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। अमेरिका, ब्रिटैन, आस्टेªलिया के साथ अन्य प्रगत राष्ट्र एण्डस को प्रोत्साहित करने के लिए अधिक अनुसंधान, अध्ययन तथा साक्ष्य आधारित तथ्यों पर जोर दे रहे हैं । भारतीय विनियामकोें तथा और स्वास्थ्य मंत्रालय को भी प्रतिबंध न लगाकर साक्ष्य आधारित नीति बनाने की दिशा में आगे कदम बढाना चाहिए ताकि धुम्रपान छोडने वाले 140 मिलियन लागों को प्रौद्योगिकी जानकारी मिल सके जिससे उनके जीवन की प्रत्याशा में भारी अंतर आ सकता है।
डाॅ. फारसालिनोस ने कहा कि 2014 मंे यूरोप के 6.1मिलियन धुम्रपानकर्ताआंे ने ई-सिगरेट की मदद से धुम्रपान करना छोड दिया । इसके अतिरिक्त 9.2 मिलियन धुम्रपानकर्ताओं ने ई-सिगरेट के साथ धुम्रपान करना कम कर दिया था। उन्होने कहा कि ‘‘ ई-सिगरेट सिगरेट छोडने को बढावा देती है। अर्थव्यवस्था और सरकार पर बिना कोई आर्थिक भार डाले, इंडोनेशिया, एशिया और दुनियाभर में करोडो जिन्दगियों को बचाया जा सकेगा। ‘‘
फिलिपिंस ने हाल ही में सार्वजनिक स्थानों पर राष्ट्रव्यापी धुम्रपासन पर पाबदी से वेपिंग को छोड दिया है। फिलिपिन स्टेटिस्टिक्स अथारिटी के आंकडों से पता चलता है कि 2015 में 16.6 मिलियन वयस्कों या फिलिपिंस की आबादी के 23.8 प्रतिशत लोग धुम्रपान करते थे।इनमे से 76.7 प्रतिशत ने छोडने के बारे में योजना बनाई या विचार किया था, लेकिन केवल 4 प्रतिशत लोग ही इसे छोड पाने में सफल हुए थे।
द वेपर्स फिलिपिंस के अध्यक्ष टाॅम पिनलेक के अनुसार जब सरकार ने सार्वजनिक स्थानो पर धुम्रपान निषेध करने से संबंधित एक्जिक्यूटिव आर्डर जारी किए तो फिलिपिंस के कई नागरिकों ने वेपिंग को अपना लिया ।
जापान ओर यूके जैसेे देशों में जो इलेक्ट्रानिक सिगरेट और हीट-नो-बर्न के उपयोग को बढावा देते है, धुम्रपान का प्रचलन रिकार्ड गति से धट रहा है। उदाहरण के लिए यूके में 2.2 मिलियन धुम्रपानकर्ताओं ने पांच साल के अंदर धुम्रपान छोड दिया । दो साल पहले से जापान विश्व को सबसे तेज गति से धुम्रपान घटाने वाला देश बन गया है। इस साल यूएस एफडीए ने हाल ही मे यह घोषणा की है कि उसका तम्बाकू विरोधी विनियम पूरी तरह से हार्म रिडक्शन के लिए तैयार होगा जबकि न्यूजीलैड के स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में इस महिने इलेक्ट्रानिक सिगरेटोे के उपयोग को समर्थित किया है।
यदि नई नीतियां नुकसान कम करने वाले विकल्पों को प्रोत्साहित करती हैं , सार्वजनिक स्वास्थ्य लाभ अभूतपूर्व होगा और एशियाई दे्रशों में जहां धुम्रपान की दरें ज्यादा हैं इसका फायदा और भी ज्यादा होगा।
प्अंचमण्पद के बारे में 2014 मे निगमित आईवेप भारत का एक अग्रणरी वेपिंग ब्राण्ड है।आइवेप के संस्थापक इस व्यवसाय मे लोगो को धुम्रपान छोडने में मदद करने तथा यह सुनिश्चित करने के कारण जुडे हैं कि वेपिंग उत्पाद किफायती और भारतीय लोगो के लिए उपलब्ध हैं। वेपिंग खतरनाक सिगरेट के धुम्रपान का स्वस्थ्य विकल्प है।







