बैंक खाता, स्कूल और मोबाइल से आधार लिंक करना जरूरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट

0
495

नई दिल्ली, 26 सितम्बर 2018: सुप्रीम कोर्ट आज बुधवार को केंद्र के महत्वपूर्ण आधार कार्यक्रम और इससे जुड़े 2016 के कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली कुछ याचिकाओं पर फैसला सुना दिया। अदालत ने कहा है कोर्ट के अनुसार आधार कार्ड एकदम सुरक्षित है, इस पर हमला संविधान के खिलाफ है। कोर्ट ने कहा कि बैंक अकाउंट, स्कूल में आधार अनिवार्य नहीं है। इसके साथ ही मोबाइल से आधार लिंक भी जरूरी नहीं है। जस्टिस सीकरी, चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस एम खानविलकर की तरफ से फैसला पढ़ रहे हैं। कोर्ट ने कहा आधार संवैधानिक रूप से वैध है। अदालत ने कहा कि सरकार डाटा सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा की अगुवाई में पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 38 दिनों तक चली लंबी सुनवाई के बाद 10 मई को आधार मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। मामले में हाईकोर्ट के पूर्व जज के. एस. पुत्तास्वामी की याचिका सहित कुल 31 याचिकाएं दायर की गयी थीं। फैसला पढ़ते हुए जस्टिस एके सीकरी ने कहा कि ने कहा कि आधार ने समाज के वंचित तबकों को सशक्त किया है और उन्हें एक पहचान दी है। पीठ ने कहा कि किसी जानकारी का जारी होने क्या राष्ट्रहित में है? ये उच्च स्तर पर तय हो। फैसला लेने में हाई कोर्ट जज की भी भूमिका हो, आधार एक हद तक निजता में दखल है लेकिन ज़रूरत को देखना होगा। पीठ ने कहा कि हमें लगता है बायोमेट्रिक की सुरक्षा के पुख्ता उपाय हैं। किसी व्यक्ति का डेटा रिलीज़ करने से पहले उसे जानकारी दी जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने 38 दिनों की सुनवाई के बाद आधार मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब पांच जजों की संविधान पीठ तय करेगी कि आधार निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है या नहीं। इस मामले में 10 मई को सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ में सुनवाई पूरी हुई थी। फैसला आने तक सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं के अलावा बाकी सभी केंद्र व राज्य सरकारों की योजनाओं में आधार की अनिवार्यता पर रोक लगाई गई है। इनमें मोबाइल सिम व बैंक खाते भी शामिल हैं।

मामले में उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश के एस पुत्तास्वामी की याचिका सहित कुल 31 याचिकाएं दायर की गयी थीं। अदालत द्वारा फैसला सुरक्षित रखे जाने पर अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने पीठ को बताया था कि 1973 के केसवानंद भारती के ऐतिहासिक मामले के बाद सुनवाई के दिनों के आधार पर यह दूसरा मामला बन गया है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here