आठवां दिन लखनऊ बुक फेयर गोमतीनगर: रचनाकारों की जुबानी ‘ढाई आखर प्रेम का’
लखनऊ, 4 मई। संगीत नाटक अकादमी गोमतीनगर परिसर में चल रहा लखनऊ पुस्तक मेला अब समापन की ओर बढ़ रहा है। इसबार नयी जगह छह मई तक चल रहे पुस्तक मेले में लखनवियत की नई रंगत दिखाई देती है तो यहां की किताबों में पुराने शहर के इतिहास, रवायत और यहां के रचनाकारों का साहित्य भी खूब है। मेले में कल ‘ढाई आखर प्रेम का’ काव्य समारोह खास होगा।
मेले में हिन्दी वांग्मय निधि के स्टाल पर लखनवी संस्कृति पर 41 किताबों का सेट है और प्रत्येक किताब 20 रुपये की है। इसके अलावा इसी स्टाल पर स्थानीय रचनाकारों में रोमेल मुद्राराक्षस की मुद्राराक्षस रचना वीथिका, डा.अर्चना प्रकाश, डा.शैलनाथ चतुर्वेदी, डा.अलका हर्ष शिवालिका, राजेन्द्र वर्मा, परमहंस मिश्रा, जयराज बिहारी, सुधा शुक्ला, बाबा बौड़म, डा.भावना घई और आलोक शुक्ल की रचनाओं की किताबें है। अभिनव छाबड़ा के स्टाल पर परवीन तलहा, योगेश प्रवीन, अजेश जायसवाल, विपुल वाष्र्णेय, मुनव्वर राना, अमृतलाल नागर, डा.हरिओम, खुशबीर सिंह शाद सहित अनेक स्थानीय रचनाकारों की पुस्तकें हैं।
‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ थीम पर चल रहे लखनऊ पुस्तक मेले का आज आठवां दिन था। आज कार्यक्रमों का प्रारम्भ सुबह लेखक से संवाद कार्यक्रम में पद्मकांत शर्मा प्रभात ने रचनाकार डा.दिनेशचन्द्र अवस्थी से सवाल करने के साथ उनका कृतित्व सामने रखा। अनंत अनुनाद संस्था की ओर से सुनीलकुमार बाजपेयी के संयोजन में हुए काव्यपाठ हुआ तो काव्या सतत यात्रा समूह की ओर से आयोजित हुस्न तबस्सुम निहा की कविता संग्रह चांद ब चांद पर पुस्तक चर्चा में ओम नीरव, अलका और निवेदिता श्रीवास्तव सहित अनेक साहित्यकार शामिल हुए।
भारतीय भाषाओं व बोलियों को बचाने का काम कर रही कथाकथन के लखनऊ चैप्टर की प्रमुख नूतन वशिष्ठ के संयोजन में नाटकीय रंग भरी कहानियां अनूदित और अवधी रूपांतरित कर मंच से प्रस्तुत की र्गइं। ग्राबियल गार्सिया मारखेज की सोती सुंदरी और हवाईयात्रा के संग, प्रेमचंद की पंच परमेश्वर अवधी संवादों में, टैगोर की काबुलीवाला और सआदत हसन मण्टो की कहानी जी आया साहब को आकशवाणी लखनऊ केन्द्र से किसी न किसी रूप में जुडे़ कलाकारों प्रतुल जोशी, नूतन वशिष्ठ, सत्यानन्द, शिवांशु, राजीव, अंकुर, राखी किशोर, अनुपमा, प्रतीक व करण ने चुटीले अंदाज में प्रस्तुत किया।






