मनोविज्ञान ने पूरी कर ली है तैयारी, आगामी सत्र से ही होगा शुरू
लखनऊ विश्वविद्यालय का मनोविज्ञान विभाग हैप्पी थिकिंग लैब की स्थापना करने जा रहा है। यह आगामी सत्र से शुरू हाे जाएगा। इसमें विद्यार्थियों को आध्यात्मिक ज्ञान को सहज, सरल बनाकर विद्यार्थियों के जीवन को आनंद दायक उल्लासपूर्ण और ऊर्जावान बनाना सिखाया जाएगा।
मनोविज्ञान विभाग की विभागध्यक्ष प्रोफेसर मधुरिमा ने बताया कि विद्यार्थियों के साइको-स्प्रीट्युअल डवलपमेन्ट हेतु हैप्पी थिकिंग लैब की स्थापना होगी। स्प्रीट्युअल शब्द लैटिन भाषा के ‘‘स्विरिटस’ शब्द से आया है, जिसका अर्थ है श्वास। अतः स्प्रीट्युलिटी इतनी आवश्यक है जैसे हमारी श्वास परन्तु भारतीय उच्च शिक्षा में साइको-स्प्रीट्युअल डवलपमेन्ट की पढ़ाई का न होना चिन्ताजनक है। इसे ध्यान में रखते हुए मनोविज्ञान विभाग आगामी सत्र से हैप्पी थिकिंग लैब की स्थापना करने जा रहा है जिसका उद्देष्य है आध्यात्मिक ज्ञान को सहज, सरल बनाकर वि़द्यार्थियों के जीवन को आनन्द यापक उल्लासपूर्ण और ऊर्जावान बनाना जिससे वे अपने जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त करने की क्षमताओं का विकास कर सके।
उन्होंने बताया कि स्प्रीट्युलिटी (आध्यात्मिकता) को लेकर अनेक प्रकार की भ्रांतियां युवा मस्तिष्क में उपजी है, जैसे व्यक्ति केवल वृद्धावस्था में ही स्प्रीट्युल होता है। आध्यामित्कता व धार्मिकता एक जैसी बातें है, स्प्रीट्युलटी का अर्थ है जीवन से विरत होना आदि। हैप्पी थिंकिग लैब में विद्यार्थी सीखेगें कि वास्तविक अर्थों में स्प्रीटुयल होने का तात्पर्य है अपने अंदर की आन्तरिक खुशी स्त्रोत से जुड़ना। जीवन की कठिन से कठिन परिस्थिति में भी नए-नए अवसर की तलाष कर लेना और खुश रहना। जीवन में आने वाली चुनौतियों से बचना, स्वयं व दूसरों के जीवन में सकारात्मकता का संचार करना।
इस प्रयोगशाला में विद्यार्थी अपने मस्तिश्क में उठने वाले प्रत्येक विचार की शक्ति की पहचान करेंगे, किस प्रकार नकारात्मक विचारों को सकारात्मक बनाया जा सकता है और अवांछनीय आदतों और व्यवहार पर काबू पाया जा सकता है। इसका कौषल इस प्रयोगशाला में सिखाया जाएगा। साथ ही विद्यार्थियों को तनावमुक्त जीवन जीने की कला, उल्लासपूर्ण और जीवन में टिकने वाली स्थायी हैप्पीनैस के टिप्स भी दिए जाएंगे।
इस प्रयोगशाला में विद्यार्थी स्वयं पर प्रयोग करेंगे। जीवन के मूलभूत प्रश्न जैसे में कौन हूँ? मेरे जीवन का क्या उद्देश्य है? मेरा जीवन किस दिषा में जा रहा है? क्या मैं अपने भागय का निर्माता हूँ? जैसे शम्मीर प्रश्नों के उत्तर विभिन्न कार्यशालाओं, प्रेरणादायक व्याख्यानों, खेलों, आध्यात्मिक अभ्यासों (जैसे- प्रार्थना, ध्यान, मानसिक, दर्षन, प्रतिबिम्ब क्षमा निर्माण, सर्जनात्मकता आभार, क्षमा इत्यादि) एवम् प्रेरणात्मक कहानियों के द्वारा विद्यार्थी स्वंय खोज सकेंगे।
वर्तमान समय की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए मनोविज्ञान विभाग कई अन्य कोर्स भी षुरू कर रहा है जिसमें निश्पादन चिन्ता का प्रबन्धन, संचार, कौषल सकारात्मक संवेगों का विकास, आत्म उन्नयन, सफल वृद्धावस्था, सकारात्मक जीवन, जीवन कौषल, एलजीबीटी समुदाय का सामाजिक समावेशन प्रमुखहै। एमए तृतीय चितुर्थ सेमेस्टर के अन्य विद्यार्थी भी इन कोर्सो की पढाई मनोविज्ञान विभाग में जाकर कर सकेंगें।







