राज्या सभा में AAP सांसद ने उठाई तीन बड़ी मांगें – डेटा रोलओवर, एडजस्टमेंट और ट्रांसफर की सुविधा; कहा, डिजिटल ऑक्सीजन अब लग्जरी नहीं
नई दिल्ली: राघव चड्ढा दिनों खासी चर्चा में हैं वजह साफ़ है कि वह आम आदमियों से जुडी समस्यायें जोर – शोर से उठाते हैं। बता दें कि आज 23 मार्च 2026 को राज्या सभा में AAP सांसद और प्रवक्ता राघव चड्ढा ने टेलीकॉम कंपनियों के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि ज्यादातर रिचार्ज प्लान्स में डेली डेटा लिमिट (1.5GB, 2GB या 3GB per day) होती है, जो हर 24 घंटे में रीसेट हो जाती है। इस्तेमाल न होने वाला डेटा आधी रात को एक्सपायर हो जाता है, जबकि यूजर्स ने उसके पूरे पैसे पहले ही दे दिए होते हैं।
उदाहरण से समझाइए: आपको 2GB के लिए चार्ज किया जाता है, आप सिर्फ 1.5GB यूज करते हैं। बचा हुआ 0.5GB दिन खत्म होते ही गायब! कोई रिफंड नहीं, कोई रोलओवर नहीं – बस “gone”। चड्ढा ने इसे “पॉलिसी” बताते हुए कहा, “ये कोई एक्सीडेंट नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई नीति है – या तो फालतू में यूज करो या midnight पर खो दो!”
सोशल मीडिया पर लोगों ने लिखा –
अब्दुर रहमान : आप आम आदमी से जुड़े हुए जरूरी मुद्दे लगतार उठा रहे हैं। इस वक़्त देश मे विपक्ष एक भी संसद ऐसा नही है जो इस तरह के मुद्दे को उठाया हो, भाजपा के सांसद से वैसे भी उम्मीद नही थी इस तरह के मुद्दे उठाने का, ये मुद्दा सच में बहुत जरूरी था, telecom कंपनी मनमानी कर रही है, अब ऐसा नही होगा।
मीज़ान शेख ने लिखा : आप जिस तरह से मिडिल क्लास के मुद्दे उठा रहे हो आप को चुनाव में वोट मांगने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए आपने चुन चुन कर उन मुद्दों पर बोला है जो आम लोगों की जेब पर सीधा असर डालता है।
राजेश पटेल : डेटा आज की ज़रूरत है, विलासिता नहीं। राघव जी ने करोड़ों युवाओं और मिडिल क्लास की बात संसद में उठाई है। कंपनियों की ये मनमानी अब बंद होनी चाहिए।
देव शेखावत : बिल्कुल सही कहा सर! जो डेटा हमने खरीदा है, वो हमारी प्रॉपर्टी है। टेलीकॉम कंपनियों की इस मनमानी पर सख्त नियम बनने चाहिए। एक तरफ तो ये हमारा बचा हुआ डेटा ज़ब्त कर लेते हैं, और दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क इतना घटिया है कि कॉल तक नहीं लगती! स्लो नेट स्पीड और लगातार कॉल ड्रॉप्स से आम जनता परेशान है। जब हमें ढंग का नेटवर्क और सर्विस ही नहीं मिल रही, तो हम पूरे पैसे किस बात के दे रहे हैं? इस लूट के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए धन्यवाद!
फैक्ट चेक:
- ये मुद्दा आज (23 मार्च 2026) संसद में उठाया गया और राघव चड्ढा ने खुद X (ट्विटर) पर वीडियो पोस्ट कर तीन मांगें दोहराईं।
कई प्रमुख न्यूज साइट्स (LiveMint, Hindustan Times, Financial Express, India TV, Tribune India आदि) ने इसकी कन्फर्मेशन की है। - ट्राई (TRAI) के मौजूदा नियमों में डेली लिमिट वाले प्लान्स में अनयूज्ड डेटा का रोलओवर अनिवार्य नहीं है, ज्यादातर टेलीकॉम कंपनियां (Jio, Airtel, Vi) इसे लागू नहीं करतीं, जिससे यूजर्स को नुकसान होता है।
- ये पहली बार नहीं : चड्ढा ने पहले भी 28-दिन वाले “मंथली” प्लान्स और इनकमिंग कॉल ब्लॉक पर संसद में सवाल उठाए थे।
राघव चड्ढा की तीन मुख्य मांगें:
- डेटा कैरी-फॉरवर्ड/रोलओवर : दिन के अंत में बचा डेटा अगले दिन की लिमिट में ऐड हो, एक्सपायर न हो।
- अनयूज्ड डेटा का एडजस्टमेंट : अगर कोई यूजर लगातार कम डेटा यूज करता है, तो अगले महीने के रिचार्ज में डिस्काउंट या एडजस्टमेंट मिले।
- डेटा ट्रांसफर : अनयूज्ड डेटा को रिश्तेदारों/दोस्तों को ट्रांसफर करने की सुविधा – इसे “डिजिटल प्रॉपर्टी” मानकर, जैसे पैसे ट्रांसफर होते हैं।
चड्ढा का तर्क: “मोबाइल डेटा अब लग्जरी नहीं, डिजिटल ऑक्सीजन बन चुका है। टेलीकॉम कंपनियों की ये लूट बंद होनी चाहिए। अगर हमने पेमेंट की है, तो वो हमारा हक है मोबाइल डेटा गायब नहीं होना चाहिए!”
बता दें कि ये मुद्दा करोड़ों प्रीपेड यूजर्स (भारत में 125 करोड़+ मोबाइल यूजर्स में 90% प्रीपेड) को छूता है। अभी TRAI या सरकार से कोई आधिकारिक रिस्पॉन्स नहीं आया, लेकिन चड्ढा की मांग से बहस छिड़ गई है। क्या जल्दी कोई बदलाव आएगा? देखने वाली बात है !






