अनुराग कश्यप और फरहान अख्तर ने किया विरोध
मोदी सरकार के ताजा संशोधित प्रस्तावित सिनेमैटोग्राफ बिल-2021 को लेकर बॉलीवुड प्रोड्यूसर्स में हैरानी औऱ परेशानी हैं। इस संशोधन के मुताबिक कोई फिल्म सेंसर बोर्ड से पास भी हो जाए तो उस पर प्रतिबंध का खतरा बरकरार रहेगा। ‘केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड’ (सीबीएफसी) की तरफ से मंजूरी मिलने के बाद भी इसकी जांच की जा सकती है। इस बदलाव के खिलाफ अनुराग कश्यप और फरहान अख्तर समेत कई प्रोड्यूसर्स ने ऑनलाइन याचिका दर्ज करवाई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार ने प्रस्तावित सिनेमैटोग्राफ बिल 2021 को लेकर फिल्म इंडस्ट्री के लोगों से 2 जुलाई तक सुझाव भी मांगे थे। इस समय सीमा को बढ़ाने की मांग कुछ फिल्म मेकर्स की तरफ से की गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, विवेक अग्निहोत्री ने सरकार से सुझाव मांगने को बेहतर कदम बताया है। विवेक का कहना है कि सरकार सुझाव मांग रही है तो हम लोगों को इस बारे में अपनी राय देनी चाहिए, ये तो अच्छी बात है कि कानून में बदलाव लाने से पहले हमसे राय मांगी जा रही है।
बॉलीवुड और साउथ फिल्म इंडस्ट्री के स्टार कमल हसन इस बदलाव पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दे चुके हैं। वहीं सुधीर मिश्रा ने भी आपत्ति जताई है। इनका कहना है कि कोरोना महामारी की वजह से एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री पहले ही आर्थिक संकट झेल रही है। ऐसे में अब नया कानून सामने आ गया है। हालांकि बड़े प्रोडक्शन हाउस ने इस मामले में अभी तक चुप्पी साध रखी है। किसी तरह का बयान उनकी तरफ से नहीं आया है।
दरअसल, सरकार सिनेमैटोग्राफ एक्ट 1952 में बदलाव लाने जा रही है। नए प्रावधान के मुताबिक ‘केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड’ (सीबीएफसी) से सर्टिफिकेट मिलने के बावजूद किसी को शिकायत है तो उसे फिर से सेंसर बोर्ड के पास समीक्षा के लिए भेजा जाएगा। किसी को अगर लगता है कि किसी फिल्म से भारत की सुरक्षा, सार्वजनिक शांति के साथ-साथ शिष्टता और नैतिकता का पालन नहीं किया जा रहा या इससे कोर्ट का अपमान हो रहा है तो सरकार ऐसी किसी भी फिल्म पर फिर से विचार करने को कह सकती है। ऐसे में आशंका है कि प्रोड्यूसर को काफी नुकसान उठ पड़ सकता है।







