मनोज मिश्रा ने ताल ठोकी: कहीं समर्थन तो कहीं एतराज़

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नवेद शिकोह

हेट स्पीच, ध्रुवीकरण के दांव-पेच, इमोशनल कार्ड, झूठे वादे और भावनाए भड़काने वाली गंदी सियासत के सामने सवाल खड़े करने वाले पत्रकारों की दुनियां में भी खूब सियासत है। उ.प्र.राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति का कार्यकाल लगभग डेढ़ महीने बाद समाप्त हो जायेगा। अगले महीने यूपी के पत्रकारों के चुनाव की घोषणा हो सकती है। जिसकी आहट की सूरत में पत्रकार मनोज मिश्रा ने संवाददाता समिति के अध्यक्ष पद के लिए ताल ठोक दी है। उनकी घोषणा सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरों के साथ नजर आयी। कइयों ने उनका समर्थन किया। जिसके बाद जागरूक पत्रकार नाम से एक चिट्ठी बम ने मनोज मिश्रा की घोषणा वाली तस्वीरो़ और उसके साथ जारी पोस्ट को सवालों के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है।

पहले पढ़िये संवाददाता समिति के अध्यक्ष पद की दावेदारी पर ताल ठोकने वाली वायरल पोस्ट-

मनोज मिश्रा को सर्वसमिति से उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति, 2020-21 का अध्यक्ष बनाये जाने हेतु वर्तमान सचिव शिव शरण सिंह का सराहनीय प्रस्ताव

उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवादादाता समिति प्रदेश के राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त पत्रकारों की एकमात्र चयनित संस्था है, जिसका कार्यकाल 2 साल का होता है। मान्यता समिति पत्रकारों की समस्याओं के निराकरण के लिए गठित होती है लेकिन पिछले अनेक वर्षों से ये समिति आपसी गुटबाज़ी का शिकार रही है जिसके चलते पत्रकार हितों की बात तो बहुत दूर हो गयी है, एकजुटता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि वर्तमान समिति मुख्यमंत्री के साथ परम्परागत रूप से चाय पीने की परंपरा को भी नही निर्वाह कर सकी, समिति के समस्त पदाधिकारी बैठकों का कोरम तक नही पूरा कर सके, आपसी तनातनी के चलते समिति के नामित सदस्यों का भी नामांकन नही किया जा सका। अथक प्रयासों और अनेक पत्रकारों, छायाकारों की बैठकों के उपरांत किसी ऐसे चेहरे को तलाशने की ज़रूरत हुई जो सर्वप्रथम इस गुटबाज़ी की राजनीति से दूर हों, प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक दोनों मीडिया के वर्ग से बराबर जुड़ाव हो, लोकप्रिय हों औऱ पत्रकारों के हितों के लिए तत्परता से कार्य करने की क्षमता हों जिसकी तलाश आज पूरी हो गयी।


उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के सचिव शिव शरण सिंह ने तमाम पत्रकारों के सामने वर्ष 2020-21 की समिति हेतु भाई मनोज मिश्रा के नाम का प्रस्ताव किया जिस पर सभी एकत्रित पत्रकारों ने एकजुटता से अपनी सहमति दिखाई।

बुद्धिजीवियों के इस संगठन में लगभग 800 सदस्यों के बीच मान्यता समिति का गठन होना है और अध्यक्ष पद के लिए पत्रकारों के अत्यंत लोकप्रिय मनोज मिश्रा का सर्वसम्मति से अध्यक्ष बनाये जाने हेतु सभी पत्रकार साथियों द्वारा इस दिशा में सार्थक प्रयास करने का आव्हान किया है।

  • अब पढ़िये मनोज मिश्रा के समर्थन वाली पोस्ट और तस्वीरों पर गंभीर आरोप लगाने वाला चिट्ठी बम। ‘जागरूक पत्रकार’ नाम से जारी ये पत्र खूब चर्चा का विषय बना है –

उ.प्र.संवाददाता समिति में पत्रकारों का मताधिकार क्या छिन जायेगा !

लखनऊ के विकास दीप में एक युवा फोटो जर्नलिस्ट की शोकसभा में शोक व्यक्त करने वालों ने दुखी मन से भाषण दिए। इनमे से ही पांच-सात पत्रकार शोक सभा समापन के पांच मिनट के अंतराल के बाद विकास दीप मे ही जश्न मनाने लगे। इन लोगों ने एक दूसरे का मुंह मीठा करते हुए/मिठाइयां खिलाते और जश्न मनाने की अपनी तस्वीरे भी वायरल की।
सोशल मीडिया में जारी जश्न की इन तस्वीरों का मकसद जाहिर करने के लिए पोस्ट भी लिखी गई है। इसे पढ़कर सैकड़ों पत्रकार आश्चर्यचकित हैं। दुखी और व्याकुल हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या पत्रकारों की इलेक्टेड बाडी ‘उ.प्र. राज्य मुख्यालय मान्यवता प्राप्त संवाददाता समिति’ के पदाधिकारी चुनने का अधिकार पत्रकारों से छीनने का जाहिलाना प्रयास किया जा रहा है।

पोस्ट मे साफतौर से लिखा है कि-

‘मनोज मिश्रा को सर्वसमिति से उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति 2020-21 का अध्यक्ष बनाये जाने हेतु शिवशरण सिंह का सराहनीय प्रयास”।

सर्वसमिति का स्पष्ट अर्थ हुआ- ‘पूरी समिति’। जबकि संवाददाता समिति केवल दो नामित सदस्यों का चयन ही कर सकती है। यदि संवाददाता समिति यानी सर्वसमिति ही एक-एक कर सभी पदाधिकारियों का चयन कर लेगी तो क्या लगभग नौ सौ मान्यता प्राप्त पत्रकारों का मताधिकार छिन नहीं जायेगा !

हो सकता है कि कहने की कुछ और कोशिश की गयी हो और शब्द ज्ञान ना होने के कारण सर्वसमिति लिख दिया गया हो। किंतु इस बात को कैसे मान लिया जाये कि संवादों को जन्म देने वाले संवाददाताओं को ही शब्द ज्ञान नही होगा।
इतने बड़े सूबे उत्तर प्रदेश के राज्य मुख्यालय के पत्रकारों का नेतृत्व क्या ऐसे पत्रकार कर सकते हैं जिन्हें मामूली शब्द ज्ञान ना हो। शोकसभा के आदाब की समझ ना हो ..

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