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    Home»इंडिया

    दिव्यांगों को मान व सम्मान

    ShagunBy ShagunDecember 4, 2021Updated:December 4, 2021 इंडिया No Comments5 Mins Read
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    डॉ दिलीप अग्निहोत्री

    दिव्यांग एक शब्द मात्र नहीं है। बल्कि इसमें सम्मान व स्वावलंबन का विचार भी समाहित है। इस शब्द के प्रचलन के बाद सकारात्मक परिवर्तन की शुरुआत हुई है। समाज की धारणा में बदलाव हुआ। इस संबन्ध में सरकार ने भी अनेक कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित किया है। देश की विकास यात्रा में दिव्यंजन भी सहभागी हो रहे है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिव्यांग शब्द के माध्यम से स्वाभिमान और सामर्थ्य का सन्देश दिया था। उनका कहना था कि शारीरिक रूप से विकलांग लोगों में ईश्वर प्रदत्त कोई न कोई विशेष क्षमता भी होती है। उन्हें इस क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने की सुविधा व अवसर मिलना चाहिए।

    केंद्र व उत्तर प्रदेश सरकार ने इसके दृष्टिगत अनेक योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित किया। सरकारी भवनों व यातायात के साधनों में उनके लिए विशेष व्यवस्था की कार्य योजना पर अमल किया गया। आर्थिक सहायता का भी प्रावधान है। दिव्यांग दिव्यंजनो में स्वाभिमान व उत्साह का संचार हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने भी इसके दृष्टिगत अनेक प्रयास किये है। दिव्यांगजनों को सुविधा सम्मान व प्रोत्सान हेतु अनेक योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। यह सन्देश दिया गया कि दिव्यांगता कोई अभिशाप नहीं है। इसको अवसर में बदलने की आवश्यकता है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंभीर विचार के बाद इस शब्द को प्रचलित किया था। इसे व्यापक रूप में स्वीकृति मिली है। सभी व्यक्तियों में कोई न कोई विशेष प्रतिभा होती है। इसे पहचाने तथा आगे बढ़े। दिव्यांगजन किसी से कम नहीं है। वह सभी क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा प्रदर्शित कर रहे है।
    दिव्यांग जनों को अपनी क्षमता का विकास करना चाहिए। 2015 से दिव्यांगों को विशेष सम्मान सरकार द्वारा दिया जा रहा है।

    इस शब्द से दिव्यांगों के भाव और मानसिकता में बदलाव आया है। उनको मानसिक मजबूती मिली है। उनमें आत्मविश्वास का संचार हुआ है। इसीलिए जीवन के हर क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ी है। विकलांगता कोई कमजोरी नही है, इन्हें सहयोग दिया जाए तो यह अपनी मानसिक मजबूती के बल पर उन दुर्बल लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं। जिनको प्राप्त करना किसी भी रूप में आसान नहीं है। सभी दिव्यांग जनों को यूडीआईडी कार्ड के माध्यम से सरकार द्वारा चल रही समस्त योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। सरकार द्वारा विकलांग बच्चों के लिए अलग से स्कूल, अलग से शिक्षा दीक्षा की व्यवस्था की जा रही है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्व दिव्यांग दिवस पर प्रत्येक जिले में सौ दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल दिये जाने की घोषणा की। सरकार इसके लिए युद्धस्तर पर कार्य कर रही है। योगी आदित्यनाथ ने दिव्यांगजनों के लिए काम करने वाली संस्थाओं को राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरित किये गए। दिव्यांगजनों को उपकरण का वितरण भी किया।

    योगी अदित्यनाथ ने कहा कि किसी भी परिस्थितियों में शारीरिक व मानसिक रूप से कोई कमी रह गई है तो उनकी प्रतिभा को ऊर्जा प्रदान करने का काम हो रहा है। कोरोना महामारी के बावजूद देश के पैराओलम्पिक खिलाड़ियों ने टोक्यो में शानदार प्रदर्शन किया। भारत ने उन्नीस मेडल प्राप्त किए। छप्पन खिलाड़ियों का दल पैराओलम्पिक में भागीदार बना।

    राज्य सरकार ने सभी मेडल प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों को पुरस्कार राशि से सम्मानित किया। पैराओलम्पिक में सफलता इस बात को प्रदर्शित करती है कि थोड़ा भी इन्हें प्राेत्साहन दिया जाए तो वे अपनी प्रतिभा का लाभ राष्ट्र को दे सकते हैं। वर्तमान में मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल देने की कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा हैं।

    तकनीक के साथ दिव्यांग जनों को जोड़ा जा रहा है। 2017 से दिव्यांगजनों की पेंशन, कुष्ठ जनों को पेंशन, कृतिम अंग,मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल, दिव्यांगजनों की शादी के लिए भी सरकार धनराशि प्रोत्साहन स्वरूप उपलब्ध कराती है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दिव्यांगता अभिशाप नहीं है। वर्तमान सरकार दिव्यांगजन की बेहतरी के लिए लगातार कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिव्यांगजन की प्रतिभा को बहुत नजदीक से पहचाना है। यही कारण उन्होंने विकलांग शब्द को दिव्यांग नाम दिया है।

    ऋषि अष्टावक्र भी दिव्यांग थे। उनकी प्रतिभा विलक्षण थी। सूरदास महाकवि व महान भक्त थे। उनकी रचना कालजयी है। सूरदास ने अपनी रचनाओं के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के प्रति जनमानस को आकर्षित करने का कार्य किया। विश्व प्रसिद्ध भौतिक वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंस की प्रतिभा से सभी परिचित हैं। ऐसे प्रतिभाशाली दिव्यांगजन की एक लम्बी श्रृंखला है, जो इस बात को प्रदर्शित करती है कि यदि दिव्यांगों को उचित माहौल दिया जाए तो वह बड़ी से बड़ी चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। प्रदेश सरकार दिव्यांगजन के हितों के लिए अनेक कार्यक्रम संचालित कर रही है।

    दिव्यांगजन की पेंशन तीन सौ रुपये से बढ़ाकर पांच सौ रुपये प्रतिमाह की गयी है। दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग का बजट भी बढ़ाया गया है। भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के साथ मिलकर प्रदेश के सभी जनपदों में दिव्यांगजन हेतु कृत्रिम अंग उपकरण वितरण कार्यक्रम भी आयोजित किये गये। राज्य सरकार द्वारा दिव्यांगजन को शादी के लिए प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। दिव्यांग युवक हेतु पन्द्रह हजार रुपये, युवती हेतु बीस हजार रुपये तथा युवक एवं युवती दोनों के दिव्यांग होने पर पैतीस हजार रुपये की धनराशि प्रदान की जाती है।

    दिव्यांगजन को स्वयं के व्यवसाय व दुकान निर्माण के लिए बीस हजार रुपये, स्ट्रीट वेण्डर के कार्य हेतु दस रुपये तथा किसी प्रकार की सर्जरी के लिए दस हजार रुपये दिए जाने की व्यवस्था है। दिव्यांगजन के लिए कॉक्लियर इम्प्लाण्ट योजना संचालित की जा रही है। इसके अन्तर्गत प्रत्येक लाभार्थी को छह लाख रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है। दिव्यांगजन को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है। डॉ शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में पचास प्रतिशत सीटें दिव्यांगजन के लिए आरक्षित की गयी हैं। भारत सरकार की तर्ज पर प्रदेश सरकार द्वारा भी दिव्यांगजन के लिए इक्कीस श्रेणियां निर्धारित की गयी हैं।

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