नई दिल्ली, 2 जुलाई 2025: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 8 दिवसीय महत्वपूर्ण विदेश दौरे पर रवाना हो गए हैं, जो ग्लोबल साउथ के देशों के साथ भारत के संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस यात्रा का पहला पड़ाव पश्चिम अफ्रीकी देश घाना है, जो तीन दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली द्विपक्षीय यात्रा है। पीएम मोदी की यह यात्रा घाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, अर्जेंटीना, ब्राजील और नामीबिया को कवर करेगी, जिसमें ब्राजील के रियो डी जनेरियो में 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में उनकी भागीदारी भी शामिल है। यह दौरा 2 से 9 जुलाई तक चलेगा और भारत के कूटनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का लक्ष्य रखता है।
घाना: ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत
पीएम मोदी का पहला पड़ाव घाना है, जहाँ वे 2-3 जुलाई को राष्ट्रपति जॉन द्रामनी महामा के साथ उच्च-स्तरीय वार्ता करेंगे। यह यात्रा भारत और घाना के बीच व्यापार, ऊर्जा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और विकास सहयोग जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने पर केंद्रित होगी। घाना, जो अफ्रीकी संघ और ECOWAS (पश्चिम अफ्रीकी राज्यों का आर्थिक समुदाय) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, भारत के लिए ग्लोबल साउथ का एक मूल्यवान साझेदार है। पीएम मोदी घाना की संसद को भी संबोधित करेंगे, जो दोनों देशों की साझा लोकतांत्रिक मूल्यों को रेखांकित करेगा। भारत और घाना के बीच 24,000 करोड़ रुपये का व्यापार और 16,000 करोड़ रुपये का निवेश इस रिश्ते की मजबूती का प्रमाण है।
त्रिनिदाद और टोबैगो: भारतीय डायस्पोरा के साथ जुड़ाव3-4 जुलाई को पीएम मोदी त्रिनिदाद और टोबैगो का दौरा करेंगे, जो 1999 के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली द्विपक्षीय यात्रा होगी। इस देश में 40-45% भारतीय मूल की आबादी है, जो कैरेबियन क्षेत्र में सबसे बड़ा भारतीय डायस्पोरा है। 2025 में भारतीय प्रवासियों के त्रिनिदाद पहुँचने की 180वीं वर्षगांठ के अवसर पर यह यात्रा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करेगी। पीएम मोदी राष्ट्रपति क्रिस्टीन कार्ला कांगालू और प्रधानमंत्री कमला परसाद-बिस्सेसर से मुलाकात करेंगे और संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करेंगे।
अर्जेंटीना: रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा4-5 जुलाई को पीएम मोदी अर्जेंटीना की यात्रा करेंगे, जो 57 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली द्विपक्षीय यात्रा होगी। राष्ट्रपति हावियर मिलेई के साथ वार्ता में रक्षा, कृषि, खनन, तेल और गैस, नवीकरणीय ऊर्जा, व्यापार और निवेश जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित होगा। भारत और अर्जेंटीना के बीच 2019 में स्थापित रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के साथ-साथ महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर भी चर्चा होगी।
ब्राजील: ब्रिक्स सम्मेलन और द्विपक्षीय वार्ता5-8 जुलाई को पीएम Modi ब्राजील में होंगे, जहाँ वे रियो डी जनेरियो में 6-7 जुलाई को आयोजित 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इस सम्मेलन का थीम “ग्लोबल साउथ सहयोग को मजबूत करना और समावेशी व टिकाऊ शासन” है। पीएम मोदी वैश्विक शासन सुधार, शांति और सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता का जिम्मेदार उपयोग, जलवायु कार्रवाई और वैश्विक स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इसके बाद, 8 जुलाई को ब्रासीलिया में राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा के साथ द्विपक्षीय वार्ता होगी, जो लगभग छह दशकों में किसी भारतीय पीएम की पहली राजकीय यात्रा होगी। दोनों देश व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, प्रौद्योगिकी और कृषि जैसे क्षेत्रों में अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेंगे। भारत और ब्राजील के बीच 12.2 बिलियन डॉलर का व्यापार इस रिश्ते की गहराई को दर्शाता है।
नामीबिया: ऐतिहासिक दोस्ती को नया आयामयात्रा का अंतिम पड़ाव 9 जुलाई को नामीबिया होगा, जो पीएम मोदी की पहली यात्रा और 27 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की तीसरी यात्रा होगी। राष्ट्रपति नेतुम्बो नांदी-नदैतवाह के साथ वार्ता में भारत और नामीबिया के बीच औपनिवेशिक संघर्ष की साझा विरासत को याद किया जाएगा। पीएम मोदी नामीबिया की संसद को संबोधित करेंगे और देश के संस्थापक पिता डॉ. सैम नुजोमा को श्रद्धांजलि देंगे। दोनों देश डिजिटल भुगतान (UPI), फार्मास्यूटिकल्स, महत्वपूर्ण खनिजों और हाइड्रोकार्बन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे। 2022 में नामीबिया से भारत लाए गए चीतों का सफल स्थानांतरण भी इस यात्रा में चर्चा का विषय होगा।
ग्लोबल साउथ और ब्रिक्स में भारत की भूमिकायह दौरा भारत के ग्लोबल साउथ के नेतृत्व को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पीएम मोदी ने अपने प्रस्थान वक्तव्य में कहा, “मैं आश्वस्त हूँ कि इन पाँच देशों की मेरी यात्राएँ ग्लोबल साउथ में हमारी दोस्ती को सुदृढ़ करेंगी, दोनों महासागरों के किनारों पर हमारी साझेदारी को मजबूत करेंगी और ब्रिक्स, अफ्रीकी संघ, ECOWAS और CARICOM जैसे बहुपक्षीय मंचों में हमारी भागीदारी को गहरा करेंगी।”
ब्रिक्स सम्मेलन में भारत आतंकवाद के खिलाफ मजबूत रुख अपनाएगा, विशेष रूप से हाल के पाहलगाम हमले के संदर्भ में, और वैश्विक शासन सुधारों को बढ़ावा देगा। भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालेगा, जिससे इस यात्रा का महत्व और बढ़ जाता है।
पीएम मोदी की यह 8 दिवसीय यात्रा भारत के वैश्विक कूटनीतिक प्रभाव को बढ़ाने और ग्लोबल साउथ के देशों के साथ आर्थिक, रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने का एक ऐतिहासिक अवसर है। घाना से नामीबिया तक, यह दौरा भारत की “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना को मूर्त रूप देता है, जो एक समावेशी और टिकाऊ विश्व व्यवस्था की दिशा में काम करता है।







