प्रदर्शनी का प्रगति पथ

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डॉ दिलीप अग्निहोत्री

स्वतंत्रता के बाद भारतीय किसानों ने मेहनत व तकनीक के बल पर कृषि उत्पादन तो बढ़ाया, लेकिन इसके अनुरूप उनकी आमदनी नहीं बढ़ी। कृषि पर्याप्त मुनाफे का कार्य नहीं रह गया। प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने इस ओर गंभीरता से ध्यान दिया। उन्होंने कृषि आय को दो गुना करने का लक्ष्य बनाया। इस दिशा में अनेक कदम उठाए जा रहे है। पहली बार समर्थन मूल्य में सर्वाधिक डेढ़ गुना वृद्धि की गई। खाद की उपलब्धता बढाई गई। मृदा हेल्थ कार्ड बनवाये गए। लखनऊ राजभवन में संबंधित विभागों के सहयोग से कृषि उत्पादों की दो दिवसीय प्रदर्शनी लगाई गई।

इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने प्रदर्शनी के विजेताओं को सम्मानित किया। लखनऊ राजभवन अपने विशाल परिसर के लिए विख्यात है। ऐसे आयोजनों में राजभवन आमजन से भर जाता है। कृषि उत्पाद प्रदर्शनी में भी यही नजारा था। किसानों के अलावा शहरी नागरिक भी इसमें शामिल हुए। किसानों को अधिक आय के तरीके बताए गए। शहरी लोगों के लिए गमलों में ही सब्जी, फल, फूल उगाने की बेहतर विधि समझाई गई। यह बताया गया कि प्रदूषण पूरे विश्व के लिए चिन्ता का विषय है। प्रदूषण रोकने में पेड़ पौधों का महत्वपूर्ण योगदान होता है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष दो हजार बाइस तक किसानों की आय को दोगुना करने का संकल्प लिया है। किसानों को उचित मार्गदर्शन मिलने के साथ-साथ उनके ज्ञान में वृद्धि हो तो उपज और आय दोनों अच्छी हो सकती है। खाद्य प्रसंस्करण एवं फसलों के उचित संरक्षण से किसानों की आय दोगुनी हो सकती है। ऐसी प्रदर्शनी का उद्देश्य उन्नत प्रकार के फल,फूल,शाक,भाजी, औषधीय पौधों को बढ़ावा देना है। इस प्रदर्शनी का लाभ किसानों तथा फल फूल से जुडे़ व्यवसाय करने वालों को मिलेगा। किसान वैज्ञानिक जानकारी भी प्रदान की जा रही है।

हमारा देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर है। स्वतंत्रता के बाद से लेकर आज की जनसंख्या में तीन गुना वृद्धि हुई है। किसानों की मेहनत और कृषि संवर्द्धन के कारण हम खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हुए हैं। आज निर्यात की स्थिति में भी हैं। ऐसी प्रदर्शनी से किसानों की आय दो गुनी करने के मोदी सरकार के सपनो को साकार करेगा।विविध सब्जियों और फूलों की प्रजातियां किसानों की आय को बढ़ाने का काम कर सकती हैं। कृषि की कुल आय का अठ्ठाइस प्रतिशत हिस्सा सब्जी और फूलों का है। ऐसे में किसान इनकी खेती कर अधिक आमदनी कर सकते हैं।

उत्तर प्रदेश का राजभवन देश के उन चुनिंदा राजभवनों में से एक है, जो पुष्प,फलों और शाकभाजी प्रदर्शनी जैसे रचनात्मक कार्यक्रमों के जरिए समाज के प्रत्येक तबके को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित करता है। इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रकृति के नजदीक जाने का अवसर मिलता है। यह आयोजन किसानों की समृद्धि से भी जुड़ा है।

जब किसान परम्परागत खेती करता है, तो उसकी आय में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो पाती है। जो किसान सामान्य तौर पर गेहूं और धान का उत्पादन करता है, वह वर्ष में एक एकड़ में पन्द्रह से पच्चीस हजार रुपए कमा पाता है। लेकिन अगर वही किसान फल, शाकभाजी एवं पुष्प के उत्पादन के साथ अपने आप को जोड़ता है, तो वह एक एकड़ खेती में एक लाख रुपए से लेकर के दो लाख रुपए तक की आय अर्जित कर सकता है। जब किसान एक एकड़ में एक लाख रुपए से ऊपर की आय अर्जित कर सकेगा,तो उसके जीवन में स्वाभाविक रूप से खुशहाली आएगी।

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