कंपनियों को नियामक आयोग में दो दिन बाद दाखिल करना है जवाब, उपभोक्ता परिषद ने शुरू की लामबंदी : उपभोक्ताओं से की अपील कहा अपनी व्यथा भेजें जिससे कि याचिका में उनके मामले को भी किया जाए शामिल
लखनऊ, 21 दिसम्बर: प्रदेश के अनेकों जनपदों में लाखों विद्युत उपभोक्ताओं को अधिक विद्युत आपूर्ति देने के नाम पर सप्लाई टाइप बदलकर ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की बिलिंग को शहरी दर पर किए जाने के मामले में तूल पकडता जा रहा है उपभोक्ता परिषद की याचिका पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा अवमानना की कार्यवाही स्वता शुरू किए जाने का अल्टीमेटम देते हुए 15 दिसंबर को पावर कार्पोरेशन से 7 दिन में रिपोर्ट तलब की है
इस मामले को लेकर बिजली कंपनियों में जहां एक तरफ हडकंप मच गया है वही पावर कॉरपोरेशन ने अवमानना की कार्यवाही से बचने के लिए सभी बिजली कंपनियों से चार दिन में पूरी रिपोर्ट तलब की है और एक प्रोफार्मा भी भेजा है जिसमें बिजली कंपनियों को यह बताना होगा कि किसके आदेश पर किस फीडर पर कितने विद्युत उपभोक्ताओं का सप्लाई टाइप बदल गया जिसकी वजह से विद्युत उपभोक्ताओं को अधिक बिल का भुगतान करना पडा।
सूत्रों के अनुसार पावर कार्पोरेशन प्रबंधन के निर्देश पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी फरमान के मध्य नजर पावर कारपोरेशन के निदेशक कमर्शियल की तरफ से सभी बिजली कंपनियों के प्रबंध निदेशकों को निर्देश जारी करते हुए 4 दिन में पूरी विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है और यह भी कहा गया है कि आयोग इस मामले पर बहुत गंभीर हो गया है आयोग में जवाब दाखिल करना है इसलिए अभिलंब रिपोर्ट भेजी जाय।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने प्रदेश के अपने सभी ग्रामीण क्षेत्र के उन जनपदों के जागरूक विद्युत उपभोक्ताओं से से अपील की है जहां पर सप्लाई टाइप बदलकर ग्रामीण दर को शहरी दर पर किया गया है वह सभी विद्युत उपभोक्ता उपभोक्ता परिषद को अवगत कारण जिससे आगे उनके मामले को भी की आज का में शामिल किया जा सके।
अधिक वसूली बिजली कंपनियों को वापस करना होगा: अवधेश कुमार वर्मा
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा जिस प्रकार से सप्लाई टाइप बदलकर के ग्रामीण क्षेत्र के लाखों विद्युत उपभोक्ताओं से अधिक वसूली की गई है उसकी वापसी बिजली कंपनियों को करना होगा गौरतलब में की उपभोक्ता परिषद इस गंभीर मामले पर अगस्त में ही विद्युत नियामक आयोग में याचिका दाखिल किया था लेकिन बिजली कंपनियों के दबाव में इस पर कार्यवाही लंबित थी लेकिन जब उपभोक्ता परिषद ने अपनी रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत विधिक कार्यवाही को तेज किया और बार-बार आयोग अध्यक्ष से मुलाकात कर गुहार लगाई तो विद्युत नियामक आयोग भी सक्रिय हो गया और अंततः अब जब सभी बिजली कंपनियां में पावर कॉरपोरेशन की तरफ से जारी निर्देश के साथ विद्युत नियामक आयोग का फरमान पहुंचा तो सभी बिजली कंपनियों में हडकंप मचा हुआ है वह रास्ता ढूंढ रही है कि किस प्रकार से इसका जवाब दिया जाए जिससे बिजली कंपनिया अवमानना की कार्रवाई से बच सके।उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा उपभोक्ता परिषद ने विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 142 के तहत अवमानना याचिका दाखिल की है उसके तहत सभी बिजली कंपनियों के प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्यवाही किया जाना चाहिए क्योंकि जिस प्रकार से टैरिफ आदेश का उल्लंघन कर उपभोक्ताओं से अधिक वसूली की गई है वह बहुत ही गंभीर मामला है।







