‘एक जनपद, एक उत्पाद’ की तर्ज पर ‘एक जनपद, एक विशेष फसल’ प्रोजेक्ट करें तैयार: राज्यपाल

0
144

राजभवन में कृषि विभाग एवं कृृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के साथ बैठक सम्पन्न

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य कृषि विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने गुरुवार को राजभवन में आयोजित कृषि विभाग उत्तर प्रदेश एवं कृृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के कुलपति के साथ बैठक की।

इस बैठक में राज्यपाल ने कहा कि ‘एक जनपद एक उत्पाद’ की तरह ही ‘एक जनपद एक विशेष फसल’ प्रोजेक्ट तैयार किया जाये, जिससे जनपद में होने वाली फसल विशेष को प्राथमिकता मिल सके। इसके साथ ही कृषि विश्वविद्यालय अपने उन विद्यार्थियों को खेती से सीधे जोड़ें, जिनके पास खेती योग्य भूमि उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि इससे विद्यार्थी स्वयं का व्यवसाय कर सकेंगे और दूसरों को भी नौकरी दे सकेंगे।

राज्यपाल ने कहा कि स्वास्थ्य एवं पर्यावरण की दृष्टि से आज जैविक खेती को बढ़ावा दिये जाने की आवश्यकता है। अत्यधिक कृषि रासायनों एवं उर्वरकों के उपयोग से खाद्यान्न पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में किसानों को जागरूक किया जाये और उन्हें जैविक खेती को बढ़ावा देने को प्रेरित किया जाये। जैविक खेती द्वारा मृदा की प्राकृतिक उर्वरता भी बनी रहती है और पर्यावरण का क्षरण भी न्यूनतम होता है।

फसल उत्पाद बेचने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था की जरूरत:

राज्यपाल ने कहा कि किसानों के लिए ऑनलाइन फसल उत्पाद बेचने की व्यवस्था पर भी कार्य करने की आवश्यकता है। इससे किसान सीधे अपने कृषि उत्पादों को बाहर बेच सकेंगे और बिचैलिये फायदा नहीं उठा सकेंगे। किसानों की आय दोगुनी करने के लिये विशेष कार्य किये जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों को अपने उत्पादों को बेचने के लिए बाजार उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए तभी उनकी आमदनी में अपेक्षित वृद्धि हो सकती है।

नवीनतम तकनीकों का करें समावेश:

आनंदीबेन पटेल ने कहा कि कृषकों को पारम्परिक खेती में नवीनतम तकनीकों का समावेश कर प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्हें मोटे अनाज के उत्पादन को बढ़ाने हेतु प्रेरित करना चाहिए, क्योंकि वैज्ञानिक दृष्टि से यह सिद्ध हो चुका है कि मोटे अनाज मानव स्वास्थ्य के लिये बहुत लाभदायक हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनकी मांग बढ़ रही है।

सरकार पर निर्भरता कम करें, किसान को एक साथ जोड़ने में निभाएं भूमिका:

राज्यपाल ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय सरकार पर निर्भरता कम कर आर्थिक उन्नयन का प्रयास करें तथा पब्लिक और किसान को एक साथ जोड़ने में अपनी भूमिका निभायें। इसके साथ ही विश्वविद्यालय किसानों को मृदा स्वास्थ्य परीक्षण के अनुसार फसलों की बुआई करने, फसल अवशेष न जलाने तथा पर्यावरण बचाने हेतु भी प्रेरित करें।

18 मंडलों में किसानों को सब्जी बेचने की मंडियों में उपलब्ध कराया जाएगा स्थान:

प्रमुख सचिव कृषि अमित मोहन प्रसाद ने बैठक में कहा कि प्रदेश के 18 मण्डलों में किसानों की सब्जियों तथा अन्य फसलों के जैविक उत्पादों को बेचने के लिए मण्डियों में एक स्थान उपलब्ध कराया जायेगा, जिसमें किसान अपने कृषि उत्पादों को सीधे बेच सकते हैं। इसके लिये प्रत्येक माह के पहले और तीसरे शनिवार-रविवार का दिन निश्चित किया गया है। उन्होंने बैठक में यह भी बताया कि ‘द मिलियन फार्मर्स स्कूल’ के माध्यम से किसानों को खेती के बारे में नवीनतम जानकारी कृषि विशेषज्ञों द्वारा दी जाती है।

बैठक में ये लोग थे मौजूद:

बैठक में राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव हेमन्त राव, प्रमुख सचिव पशु बीएल मीना, पं. दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान मथुरा के कुलपति प्रो. जीके सिंह, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय मेरठ के कुलपति डाॅ. आरके मित्तल, नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय अयोध्या के कुलपति डाॅ. बृजेश, बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय बांदा के कुलपति डाॅ. यूएस गौतम, चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कानपुर के कुलपति डाॅ. डीआर सिंह, राज्यपाल के विशेष सचिव अशोक चन्द्र तथा राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी केयूर सम्पत उपस्थित थे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here