नई दिल्ली, 11 अगस्त 2025: कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बिहार में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी और वोट चोरी के मुद्दे पर जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने दावा किया कि ‘इंडिया’ गठबंधन के सांसदों को चुनाव आयोग से मिलने से रोका गया और हिरासत में लिया गया। राहुल गांधी ने इसे लोकतंत्र और संविधान पर हमला करार देते हुए कहा, “यह लड़ाई राजनीतिक नहीं है, बल्कि संविधान और ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के सिद्धांत को बचाने की है। हम साफ-सुथरी मतदाता सूची की मांग करते हैं, और यह हक हर हाल में लेंगे।”
मतदाता सूची में हेरफेर का आरोप:
उन्होंने कर्नाटक और महाराष्ट्र के उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और बीजेपी ने मिलकर वोटर लिस्ट में हेरफेर किया, जिसके कारण लोकसभा और विधानसभा चुनावों में गड़बड़ी हुई। राहुल ने दावा किया कि उनके पास कर्नाटक के एक निर्वाचन क्षेत्र में वोट चोरी के “100% पुख्ता सबूत” हैं और जल्द ही इसे जनता के सामने लाया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट से लोकसभा चुनाव रद्द करने की मांग:
इस बीच, वरिष्ठ वकील भानु प्रताप ने राहुल के आरोपों का समर्थन करते हुए सुप्रीम कोर्ट से तत्काल सुनवाई की मांग की और लोकसभा चुनाव रद्द करने की बात कही। सोशल मीडिया पर भी राहुल गांधी के समर्थन में कई न्यूट्रल लोग और विपक्षी नेता एकजुट दिख रहे हैं, जो इस मुद्दे को लेकर वीडियो और पोस्ट साझा कर रहे हैं।
चुनाव आयोग ने राहुल के आरोपों को “बेबुनियाद” बताते हुए खारिज किया और कहा कि अगर उनके पास सबूत हैं, तो वे शपथ पत्र के साथ कोर्ट में याचिका दायर करें। आयोग ने यह भी कहा कि राहुल ने जून में भेजे गए पत्र का जवाब नहीं दिया।
प्रदर्शन में अखिलेश यादव गिरफ्तार हो गए
सपा मुखिया अखिलेश यादव ने प्रदर्शन के दौरान मीडिया को दिए बयान में कहा, “कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है। वहां जिन अधिकारियों, एसडीएम स्तर के कर्मचारियों या बूथ लेवल ऑफिसर्स (बीएलओ) ने मिलकर मतदाता सूची में हेरफेर कर वोट चोरी कराई है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ने इस मुद्दे पर संसद से सड़क तक लड़ाई का ऐलान किया है, जबकि बीजेपी और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इन आरोपों को “लोकतंत्र का अपमान” करार दिया। यह मामला अब सियासी और कानूनी रूप लेता जा रहा है, जिसमें जनता और सोशल मीडिया की भागीदारी इसे और गर्म कर रही है।