फिल्मों ने कहानीकारों के साथ परफेक्शन को किया परिभाषित

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टिस्का चोपड़ा, पंकज पराशर, मानसी जैन, डॉ. पलाश सेन और समीर चंद ने सिनेमाई उत्कृष्टता के लिए चर्चा में हिस्सा लिया

लखनऊ, 11 नवंबर, 2017: लघु फिल्मों में परफेक्शन यानी पूर्णता की तलाश में रॉयल स्टैग बैरेल सेलेक्ट लॉर्ज शॉर्ट फिल्म्स ने एक पैनल चर्चा का आयोजन किया। इस आयोजन में सिनेमाई महारथी, जैसे टिस्का चोपड़ा, पंकज पराशर, मानसी जैन, डॉ. पलाश सेन और समीर चंद, अपनी-अपनी प्रसिद्धि की कहानियों के साथ एक मंच पर आए।

इस आयोजन के दौरान चार बेहतरीन लघु फिल्में दिखाई गईं। ये फिल्में रहीं- समीर चंद की ‘टेस्ट ड्राइव’, जिसमें आशुतोष राणा हैं, मानसी जैन की ‘चुर्री’, जिसमें टिस्का चोपड़ा हैं, पंकज पराशर की ‘स्किन ऑफ मार्बल’ तथा डॉ. पलाश सेन की ‘जिया जाये’। सभी कहानीकारों ने इन फिल्मों को बनाने के पीछे की प्रेरणा के बारे में बताया। रॉयल स्टैग बैरेल सेलेक्ट लॉर्ज शॉर्ट फिल्म्स भारत में लघु फिल्मों का पथ-प्रदर्शक बनकर इस क्रांति के शीर्ष पर है। इस मंच ने लघु फिल्मों का जबर्दस्त आकर्षण फैलाया है। इसके अलावा, इसने दर्शकों और एक जैसे फिल्मकारों के लिए वास्तविकता जांचने का भी काम किया। यह आयोजन न सिर्फ काफी लोकप्रिय रहा, बल्कि भारत में लघु फिल्मों के लिए सबसे भरोसेमंद और प्रतिष्ठित मंचों में एक बन गया है।  इस आयोजन में बेहद प्रतिभाशाली फिल्म-निर्माता और कलाकार एक साथ आए और रॉयल स्टैग बैरेल सेलेक्ट लार्ज शॉर्ट फिल्म्स के साथ अपने अनुभव बांटें। जहां उन्होंने स्वतंत्रता पर अधिक बल दिया, वहीं इस मंच ने उन्हें अपनी रचनात्मकता और नवाचार सबसे अच्छे तरीके से पेश करने की इजाजत दी।

इसमें जो फिल्में दिखाई गईं, वे काफी मौलिक, विचारोत्तजक और स्पष्ट थीं। इन फिल्मों में बदलाव लाने का सामथ्र्य था। इस मंच के बारे में परनोड रिकार्ड इंडिया के असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट, मार्केटिंग श्री राजा बनर्जी ने कहा, ‘भारत में लघु फिल्मों का विकास अभूतपूर्व रहा है और इसके शीर्ष पर होने का हमें गर्व है। हम सिनेमाई दुनिया के इन अतुलनीय कहानीकारों के साथ जुड़कर बेहद खुश हैं, जिन्होंने इस मंच के लिए न केवल मौलिक लघु फिल्में तैयार कीं, बल्कि इस मंच द्वारा पूर्णता की तलाश के मानदंडों को और ऊंचा किया। इस ब्रांड का दर्शन है- ‘मेक इट परफेक्ट’। इसी तर्ज पर हम कुशल फिल्मकारों को प्रोत्साहित और प्रेरित करेंगे कि वे हमारे मंच के जरिये अपनी मौलिक रचना मुफ्त दिखाएं।’‘मेक इट परफेक्ट’ के दर्शन पर आधारित, रॉयल स्टैग बैरेल सेलेक्ट लार्ज शॉर्ट फिल्म्स उन महत्वाकांक्षी  निर्देशकों के लिए एक मंच है, जो इस इंडस्ट्री में अपनी रचनात्मक ऊर्जा से खुद के लिए एक बेहतर जगह बनाने के दौरान मुख्यधारा के बॉलीवुड निर्देशकों के साथ दिखना चाहते हैं।

यह प्लेटफॉर्म कहानीकारों को एक भरोसेमंद मंच प्रदान करता है कि वे अपनी कलात्मक रचना पेश करें और डिजिटल संसार के जरिये अपने लक्षित दर्शत तक पहुंचे।रॉयल स्टैग बैरेल सेलेक्ट लार्ज शॉर्ट फिल्म्स द्वारा दिखाई गई चारों फिल्में असाधारण और अतुलनीय कला से भरपूर थीं।फिल्म के बारे में और अधिक जानकारी:ऽ ‘चुर्री’ मानसी निर्मल जैन की एक लघु फिल्म है, जिसमें टिस्का चोपड़ा और अनुराग कश्यप ने काम किया है। यह उस दंपति की कहानी है, जिसमें ऐय्याश पति का शादी से इतर एक संबंध है। फिल्म का अपरंपरागत कथानक दर्शकों के जे़हन में एक जिज्ञासा पैदा करता है, जब पत्नी का सामना पति की प्रेमिका से होता है और फिर एक असामान्य व आश्चर्यजनक मोड़ आ खड़ा होता है। ऽ समीर चंद की ‘टेस्ट ड्राइव’ में आशुतोष राणा हैं। यह कहानी संघर्ष कर रहे एक अभिनेता की है, जो खुद पर यकीन करता है और प्रतिभा के दम पर सफलता पाना चाहता है।

वे प्रसिद्धि, धन और भौतिक चीजों के दम पर सफलता को परिभाषित करते हैं, जिसका वह पुरजोर विरोध करता है। जब फिल्म आगे बढ़ती है, तो वह टूट जाता है और प्रसिद्धि और भौतिक चीजों की टेस्ट ड्राइव पर जाने का फैसला करता है, जिसे उसके इर्द-गिर्द के सभी लोग हमेशा से करने के लिए कहते थे।ऽ डॉ. पलाश सेन की ‘जिया जाये’ दिल को छू लेने वाली संगीतमय फिल्म है। इसमें किंशुक सेन और साहिबा बाली हैं। यह फिल्म प्रेम विषय पर है। यह लघु फिल्म उन दोस्तों की कहानी सामने लाती है, जो आतंक व कथित राष्ट्रवाद के दौर में दुश्मन बन जाते हैं और उनके बीच की नादानी कहीं खो जाती है। यह एक मजबूत, भावनात्मक, संगीतमय ड्रामा है। इस फिल्म में इस्तेमाल गाना यूफोरिया के आगामी एल्बम से लिया गया पहला गाना है।ऽ पंकज पराशर की ‘स्किन ऑफ मार्बल’ प्रेम, विश्वासघात और सर्वोच्च त्याग पर आधारित है। यह सहादत हसन मंटो की ‘मोजिल’ से प्रेरित है। इसकी कहानी 1947 में बंटवारे से पहले की दिल्ली की है, जो एक नौजवान और उसकी यूरोपियन गर्लफ्रेंड के बीच की प्रेम-कहानी पर टिकी है। ये अपने घर से भाग जाते हैं, क्योंकि इनके परिवारवाले और गांववाले इनको सपोर्ट नहीं करते।

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