Share Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Post Views: 564 उषा कितना जानता हूँ मैं सुबह को सुबह को जिसने उतरते नहीं देखा हर-हर हरियाली पर बहुत-बहुत बर्फ़ पर तल-अतल जल पर जिसने हर सुबह को छोड़ दिया कल पर! कल मेरे बहुत क़रीब है सुबह उतनी नहीं है। – अविनाश मिश्र
प्रेमिका का अधूरा सपना पूरा करने आई आत्मा? वायरल वीडियो में प्रेमी के साथ नहाते और कपड़े बदलते दिखा भूत!
‘विधायक जी के करीबी’ नेता जी की धान काटने वाली मशीन के आगे निकली हेकड़ी, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल!
‘पुस्तकें मन को एकाग्र कर परंपराओं से जोड़ती हैं’-ब्रजेश पाठक; ईशा-मीशा रतन की कथक प्रस्तुति ने मोहा मन