मोतीमहल लाॅन में मिल रहा नई किताबों का स्वाद

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  • महात्मा गांधी डेढ़ सौंवी जयंती की थीम पर केन्द्रित पुस्तक मेले में उमड़ी भीड़
  • उर्दू भी सीखिए और प्रतियोगियों में भाग भी लीजिए 
लखनऊ, 29 सितम्बर 2018: राणाप्रताप मार्ग मोतीमहल वाटिका लान में कल उद्घाटित हुआ सोलहवां राष्ट्रीय पुस्तक मेला आज शनिवार की शाम पूरे उफान पर था। अपनी पसंद की नई-पुरानी किताबों में कुछ नया स्वाद तलाशने पुस्तक प्रेमियों का उमड़ना सुबह से प्रारम्भ हो गया था। मेला यहां सात अक्टूबर तक रोज सुबह 11 से रात नौ बजे तक चलेगा। दि फेडरेशन आॅफ पब्लिशर्स एण्ड बुकसेलर्स एसोसिएशन्स इन इण्डिया, नई दिल्ली के सहयोग से हो रहे के.टी.फाउण्डेशन व फोर्सवन के इस आयोजन में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती की थीम पर आधारित इस निःशुल्क प्रवेश वाले मेले में हमेशा की तरह न्यूनतम 10 फीसदी की छूट हर पुस्तक पर मिल रही है।
मेल में नई किताबें में राजपाल के स्टाल पर नरेन्द्र कोहली की वरुण पुत्री, अशोककुमार पाण्डेय की कश्मीरनामा, असगर वजाहत की भीड़तंत्र, देवधर पटनायक की पौराणिक विषयों पर केन्द्रित 10 किताबें और भगवंत अनमोल की थर्ड जंेडर पर लिखी जिंदगी फिफ्टी-फिफ्टी पसंद की जा रही है। तीसरे लिंग पर लिखी किताबों में भगवंत की पुस्तक के अलावा सामयिक के स्टाल पर चित्रा मुद्गल के किन्नरों पर लिखे ताजा उपन्यास पोस्टबाॅक्स नं.-203 नाला सोपारा के साथ ही निर्मला भुराड़िया की गुलाम मण्डी, नीरजा माधव की यमदीप व महेन्द्र भीष्म की किन्नर कथा भी पाठकों का ध्यान खींच रही हैं। राधाकृष्ण के सटाल पर मन्नू भण्डारी का उपन्यास ताजगी भरा है। लोकभारती के यहां मिथिलेश्वर की तेरा संगी कोई नहीं, भैरवप्रसाद की बांदी व रामकेवल शर्मा की त्रिकोण पुस्तक प्रेमियों के हाथ में देखी जा सकती है। राजकमल में स्टाल पर नई किताबों में रामशरण जोशी की मै बोनसाई अपने समय का, सूर्यबाला की कौन देस को वासी और अलका सरावगी की एक सच्ची झूठी गाथा जैसी इसी वर्ष प्रकाशित हुई किताबें है। संयोजिका आस्था ढल ने बताया इस 16वें मेले के अन्य स्टालों पर बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए बहुत कुछ नया है।
आज के आयोजनों में व्यंग्थार्थ के संयोजन में संदीप सक्सेना के व्यंग्य संग्रह श्रीश्री जुगाड़ महात्म्य का लोकार्पण आकाशवाणी निदेशक पृथ्वीराज चैहान, अनूप श्रीवास्तव, संजीव जायसवाल, राजेन्द्र वर्मा व डा.अमिता दुबे की मंच पर उपस्थिति में हुआ। इससे पहले नव समानुभूति की ओर से हुए काव्य समारोह में डा.विजय कर्ण, विजय त्रिपाठी, वीके सचान, राजेश राय आदि रचनाकारों ने काव्यपाठ किया। मुख्य साहित्यिक मंच पर आज सुबह कर्मश्री पत्रिका की ओर से रचनाकारों के दायित्व पर रामकिशोर की अध्यक्षता व शरद पटेल के संचालन में चली संगोष्ठी में मो.खालिद फतेहपुरी परवेज मलिकजादा, रत्ना बापुली, विनय दास, अलका अस्थाना, निरजेश ने विचार व्यक्त किये। देर शाम संकल्प संस्था के म्यूजिक फार पीस कार्यक्रम में कलाकारों ने अपने जौहर दिखाए।

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