लाखों गालियां दे चुके, अब तारीफ करके ओहदे पाइये मियां

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नवेद शिकोह
एक बड़ी राशि पर एक रुपया भारी पड़ता है, जो उस राशि का अर्थ बदलकर उसे शगुन बना देता है।
शगुन के एक रूपये की तरह प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों की एक तारीफ भी विरोधियों को ओहदा दिला सकती है। वही विरोधी जो जीवन भर मोदी, भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की कड़ी आलोचना करते करते थकते नहीं थे।
आलोचनाओं और पुरानी कटुता को भुलाकर कोई विरोधी भाजपा और संघ का नया प्रशंसक बन जाये तो उसे दरियादिल भाजपा ओहदे की नेमत से नवाज़ सकती है। इस अहसास को लेकर कुछ मुस्लिम हस्तियों में भाजपा के पक्ष मे बयान देने की होड़ लगी है।
 जीवन भर भाजपा की आलोचना करने वाली कुछ मुस्लिम हस्तियां भाजपा सरकार की तारीफें करके ओहदे पाने की कतार मे लग गयी हैं। बरसों पहले कांग्रेस छोड़ने वाले आरिफ मोहम्मद खान को राज्यपाल बनाये जाने के बाद जमीयत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी भाजपा सरकार के सख्त फैसलों का स्वागत करते नजर आ रहे हैं। कश्मीर और एनआरसी पर सरकार के कड़े फैसलों की तारीफ करते हुए मदनी कह रहे हैं कि वो तो चाहते हैं कि पूरे देश मे एनआरसी लागू किया जाये। सरकार का हर कदम देशहित मे उठ रहा है।
ये सब देखते हुए अब चर्चाएं तेज हो गयी हैं कि मौलाना महमूद मदनी को भाजपा राज्यसभा भेज सकती है। मालूम हो कि बरसों पहले कांग्रेस छोड़कर सियासत से संनयास ले चुके आरिफ मोहम्मद ख़ान भी करीब डेढ़ महीना पहले गुमनामी से बाहर निकल कर मीडिया मे भाजपा की नीतियों की तारीफ करते नज़र आये। जिसके कुछ दिन बाद उन्हें राज्यपाल बनाने की घोषणा हो गयी।
इसके बाद खरबूज़े को देखकर खरबूजा रंग बदलने लगा। जमीयत उलमा-ए-हिंद के मदनी ब्रदर्स के तेवर बदले-बदले से नजर आ रहे हैं। राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ और भाजपा को लेकर जमायत उलमा-ए-हिंद काफी नर्म और सकारात्मक रुख दिखा रहा है।
ये वही मौलाना महमूद मदनी है जो कांग्रेस और लोकदल मे रहकर भाजपा और संघ को पानी पी पीकर कोसते थे। अब उन्हें भाजपा की सत्ता के सावन मे अपने राजनीति भविष्य के सब्जबाग दिखाई देने लगे हैं।
मौलाना महमूद के बदले रुख़ और केंद्र सरकार की नीतियों का समर्थन करने वाले बयानों से कुछ दिन पूर्व संघ प्रमुख मोहन भागवत ने जमीयत उलमा-ए-हिंद प्रमुख अरशद मदनी से लम्बी मुलाक़ात की थी।
मदनी ब्रदर्स से पहले देश की तमाम वो मुस्लिम हस्तियां जो जीवन भर भाजपा, संघ और मोदी का विरोध करती थी आज ये हस्तियां भाजपा की ख़ास बन गयी हैं।
विवादित बयानों से देश-दुनिया मे अपनी पहचान बनाने वाले शिया वक्फ बोर्ड के चैयरमैन वसीम रिजवी भी एक जमाने मे भाजपा विरोधी रहे हैं। बसपा ने इन्हें शिया वक्फ बोर्ड का चैयरमैन बनाया। इसके बाद सपा सरकार आयी और ये तत्कालीन वक्फ मंत्री आजम खान के बेहद करीबी हो गये। नतीजतन सरकार बदलने के बाद भी वसीम रिजवी का पद बर्करार रहा। और जब उत्तर प्रदेश मे योगी सरकार बनी तो वसीम भाजपा और संघ के चहीते बन गये। जिससे कि तमाम गंभीर आरोप होने के बावजूद ना तो ये जेल गये और ना ही सरकार ने वक्फ बोर्ड के चैयरमैन पद से इन्हें हटाया।
इसी क्रम मे सपा के पुराने वफादार एम एल सी बुक्कल नवाब अब भाजपा के हिंदुत्व के एजेंडे की अलमबरदारी करने के साथ गंगा जमुनी तहजीब की मिसालें पेश करते रहते हैं। गौ रक्षा और गीता-रामायण का अखंड पाठ करके कभी वो सुर्खियों मे रहते हैं तो कभी मंदिरों का घंटा बजाते बुक्कल नवाब की तस्वीरें सोशल मीडिया मे वायरल होती है। फलस्वरूप नवाब साहब की कथित अवैध सम्पत्ति महफूज है। मालूम हो कि जब बुक्कल नवाब सपा मे थे और यूपी मे नयी-नयी योगी सरकार बनी थी उस समय नयी सरकार ने बुक्कल नवाब की सम्पत्तियों की अनिमितताओं को लेकर उसके खिलाफ कार्यवाही करने का फैसला किया था। लेकिन भाजपा मे शामिल होते ही बुक्कल नवाब के खिलाफ शासन प्रशासन का हर.क़दम रुक गया।
इसी तरह शिया धर्म गुरु मौलाना कल्बे जव्वाद भी जीवनभर नरेंद्र मोदी, संघ और भाजपा को कोसते रहे, किंतु भाजपा की सरकारें आते ही मौलाना का रुख बदल गया। अब मौलाना मोदी और योगी सरकारों को पिछली सरकारों से बेहतर सरकारें बताते हैं। भाजपा के शीर्ष नेताओं की तारीफ करते हैं। नतीजतन भाजपा सरकारें मौलाना जव्वाद से भी खुश हैं। शिया वक्फ बोर्ड के चैयरमैन ने मौलाना पर तमाम गंभीर आरोप लगाये हैं, लेकिन सरकार/प्रशासन मौलाना पर लगे आरोपों को नजरअंदाज कर रही है। कभी भाजपा के घोर विरोधी पर आज भाजपा सरकार के प्रशंसक रहे मौलाना जव्वाद को सरकार ने इनाम के तौर पर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का मानद प्रोफेसर भी बनाया है।
खैर जो भी हो और जैसे भी हो जनाधार की आंधी मे विरोधी भी मोदी सरकार की नीतियों के कसीदे (प्रशंसा करना) पढ़ते नजर आ रहे हैं। और ईनाम भी पा रहे हैं।

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