ऑस्ट्रेलिया से सीरीज गंवाने के बाद हार से उठे सवाल टीम इंडिया को बेचैन कर सकते हैं, और इस बीच विराट के आईपीएल में चल रहे ख़राब प्रदर्शन पर भी तमाम प्रश्न चिन्ह लग रहे हैं हमारा प्रश्न टीम इंडिया के मनोबल को तोडना नहीं है लेकिन कहीं न कहीं जवाबदेही तो बनती ही हैं कि कैसे जीतेंगे विश्वकप!
इंडिया चार साल बाद घर में सीरीज हार गई। यह सीरीज भी ऐसी टीम से हारी है, जिसे वह दो माह पहले ही उनके घर में 2-1 से हराकर आई थी। इस हार को टीम इंडिया के लिए झटके के तौर पर देखने की वजह यह है कि एक तो ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान स्टीव स्मिथ और डेविड वॉर्नर पर पाबंदी लगने के बाद से उसे कमजोर माना जा रहा था। इस कमजोर टीम ने वह काम कर दिया, जिसे ऑस्ट्रेलिया की मजबूत टीमें भी पिछले दस साल से नहीं कर पा रहीं थीं।
इससे भी अहम बात यह है कि विश्व कप सिर पर आ जाने पर यह हार मनोबल पर असर करने वाली तो है। भले कप्तान कोहली ने कहा है कि इस हार से न तो खिलाड़ियों और ना ही सपोर्ट स्टाफ में कोई घबराहट आई है।विश्व कप का इंग्लैंड और वेल्स में मई के आखिर से आयोजन होना है। इसमें अब टीमें सही तालमेल बनाकर आजक ल उसके जलवे बिखेरने का प्रयास कर रही हैं। वहीं हम अभी तालमेल आजमाने का ही प्रयास कर रहे हैं। यह सही है कि विराट ने कहा है कि हमारी विश्व कप में कौन सी एकादश खेलेगी, उसको लेकर कोई संशय नहीं है। यह बात इस लिहाज से तो सही है कि टीम के करीब 15 में से 14 खिलाड़ी तय हो चुके हैं। लेकिन हम अब तक चौथे नंबर के खिलाड़ी का चयन को लेकर ही पक्का मन नहीं बना सके हैं।

इस सीरीज में इस स्थान पर पहले तीन मैचों में अंबाति रायडू को खिलाया गया और उन्होंने 13, 18 और दो रन बनाए। एक मैच में ऋषभ पंत को इस स्थान पर खिलाने पर 16 रन ही बना सके। मोहाली में तो कप्तान विराट खुद भी इस स्थान पर खेले और सीरीज का सबसे कम स्कोर सात रन बनाया। इस सीरीज के बाद भी यह समाधान नहीं निकल सका है कि इस स्थान पर किसे खिलाया जाए? इस सीरीज से पहले तक पंत दूसरे विकटकीपर के तौर पर विश्व कप टीम में चुने जाने के लिए पक्के माने जा रहे थे, लेकिन इस सीरीज के आखिरी दो मैचों में महेंद्र सिंह धोनी को आराम देने पर उन्हें खिलाया गया तो उनकी कलई खुल गई है।
उन्होंने कुछ स्टंपिंग के मौके गंवाकर मैच में टीम की स्थिति कमजोर कर दी। पर गौतम गंभीर जैसे खिलाड़ी किसी खिलाड़ी की परख के लिए सिर्फ दो मैच देने को उचित नहीं मानते हैं। उनके अनुसार रायडू के लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के बाद एक सीरीज खराब जाने पर बाहर बैठाना उचित नहीं है। अब लगता है कि इस स्थान के दावेदारों पंत, दिनेश कार्तिक के साथ लोकेश राहुल का प्रदर्शन आईपीएल में देखने के बाद ही कोई फैसला होगा। टीम इंडिया की घर में खेली ज्यादातर सीरीजों के जीतने में स्पिनरों की भूमिका अहम रहती आई है, मगर इस सीरीज में हमारे स्पिनर कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर सके।
यह सही है कि चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव ने सबसे ज्यादा 10 विकेट निकाले। लेकिन अमतौर पर उनकी गेंदबाजी का विदेशी बल्लेबाजों पर जो खौफ देखा जाता था, वह इस बार देखने को नहीं मिला। वहीं सीरीज शुरू होने से पहले तक यजुवेंद्र चहल को भारतीय आक्रमण की जान माना जाता था। लेकिन टी-20 मैच में बुरी तरह से ठुकाई होने पर कप्तान ने उन्हें पहले तीन मैचों में उतारने का जोखिम नहीं उठाया। उन्हें जब मोहाली में खेले गए चौथे वनडे मैच में मौका दिया गया, तो वह बिना विकेट लिये 80 रन खाकर एकादश की दौड़ से बाहर होते नजर आ रहे हैं।
चहल की जगह रविंद्र जडेजा को इस लिहाज से खिलाया गया कि वह जरूरत पड़ने पर बल्ले को चला सकते हैं। लेकिन वह बल्ले और गेंद दोनों से ही प्रभावित करने में असफल रहे हैं। हां, इतना जरूर है कि जडेजा बेहतर फील्डर हैं, इसका टीम को जरूर फायदा मिला। मौजूदा दौर में टीमें दौरे की तैयारी के लिए हरसंभव प्रयास करती हैं। ऑस्ट्रेलिया ने पिछले साल अक्टूबर में संयुक्त अरब अमीरात में पाकिस्तान के खिलाफ सीरीज खेलने के लिए भिवानी के लेग स्पिनर प्रदीप साहू और कोझीकोड के चाइनामैन गेंदबाज केके जियास की सेवाएं लेकर भारतीय स्पिन तिकड़ी के खिलाफ खेलने की तैयारी करके सभी को हैरत में डाल दिया। इसकी वजह से ही एश्टन टर्नर, पीटर हैंड्सकोंब जैसे युवा बल्लेबाज खुलकर खेलते नजर आए।
टीम इंडिया के ओपनरों रोहित शर्मा और शिखर धवन के रंगत में लौट आने से प्रमुख समस्या का हल हो गया है। किंतु इस टीम को कप्तान कोहली पर नर्भरता कम करनी होगी। यह काम धोनी, केदार जाधव और हार्दिक पांडय़ा कर सकते हैं। ऐसा किए बगैर टीम से विश्व कप में अच्छे परिणाम निकालने की उम्मीद करना बेमानी होगी। टीम के लिए यह अच्छी खबर है कि धोनी के साथ केदार ने मैच विजेता वाले गुण दिखाए हैं। यह शुभ संकेत है।
- मनोज चतुव्रेदी







